For Kidney Diseases:
9971928080
For Other Diseases:
9910324343

आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज

आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज एक सुरक्षित, प्राकृतिक और साइड इफेक्ट फ्री तरीका है, जिसमें बिना डायलिसिस या ट्रांसप्लांट के किडनी को अंदर से ठीक किया जाता है।
By Dr. Puneet Dhawan | Published: February 6, 2026

आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज – Ayurved Se Kidney Rog Ka Ilaj

जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती, तो बॉडी से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और कई serious समस्याएं पैदा हो जाती हैं जो आज के वक़्त में बहुत आम है। किडनी से जुड़ी इन्हीं समस्याओं को किडनी रोग (Kidney Disease) कहा जाता है जिसका आधुनिक इलाज या Allopathic इलाज ज्यादातर दवाओं, डायलिसिस और ट्रांसप्लांट जैसे खतरनाक तरीकों पर निर्भर होता है, जिनके बहुत से side effects भी हो सकते हैं। इसलिए, आजकल लोग आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज चाहते हैं, क्योंकि यह ज़्यादा safe, प्राकृतिक और side effects free होता है। इस इलाज में बिना डायलिसिस या ट्रांसप्लांट के किडनी को अंदर से ठीक किया जाता है।

आयुर्वेद की नज़र में किडनी रोग – Ayurved ki nazar mein kidney rog

आयुर्वेद में किडनी को वृक्क कहते हैं। किडनी का direct connection बॉडी के तीन दोषों – वात, पित्त और कफ से होता है। वात दोष बढ़ने से पेशाब में रुकावट, सूखापन और कमज़ोरी आती है, पित्त बढ़ने से जलन, सूजन और इंफेक्शन हो सकता है और कफ दोष बढ़ने से बॉडी में पानी जमा होने लगता है। आयुर्वेद मानता है कि किडनी रोग अचानक से नहीं होता, बल्कि यह लंबे वक़्त तक चले दोष असंतुलन का result होता है। जब digestion कमजोर होता है, तो बॉडी में आम (toxins) बनने लगते हैं। यही आम धीरे-धीरे किडनी के काम पर बुरा असर डालता है।

🌿 Talk to Our Ayurvedic Expert Now – Get A Expert Consultation.
Delaying Treatment Can Worsen Your Condition.
👉 Call Now And Change Your Life

 

किडनी रोग के लक्षण; नजरअंदाज न करें – Kidney rog ke lakshan; nazarandaaz na karein

  • बार-बार या बहुत कम पेशाब आना
  • पैरों, चेहरे या आंखों के नीचे सूजन
  • थकान और कमजोरी
  • भूख न लगना
  • पेशाब में झाग आना
  • कमर दर्द
  • ब्लड प्रेशर बढ़ना

आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज – Ayurved se kidney rog ka ilaj

आयुर्वेद में किडनी का इलाज केवल रिपोर्ट सुधारने तक लिमिटेड नहीं होता, बल्कि इसमें बॉडी के पूरे system को अंदर से सुधार जाता है जिसके लिए ईन 5 तरीकों का इस्तेमाल ख़ासतौर पर किया जाता है –

1. दोषों को balance करना

सबसे पहले यह देखा जाता है कि रोगी में कौन-सा दोष ज़्यादा बढ़ा हुआ है। उसी के अनुसार इलाज तय किया जाता है। हर रोगी के लिए एक जैसा इलाज नहीं होता।

2. आम दोष की सफाई

बॉडी में जमी गंदगी (toxins) को बाहर निकालना बहुत ज़रूरी होता है। इसके लिए आयुर्वेद में हर्बल दवाएं, पंचकर्म थेरेपी, हल्का और जल्दी पचने वाले भोजन का सहारा लिया जाता है।

3. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो किडनी को सपोर्ट करती हैं, जैसे पुनर्नवा, गोक्षुर, वरुण, कुटकी, शिग्रु। ये जड़ी-बूटियाँ किडनी की सूजन कम करने, पेशाब के रास्ते साफ रखने और किडनी फंक्शन को सपोर्ट करने में मदद करती हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ़ अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेकर ही करना चाहिए।

4. किडनी रोग में पंचकर्म

पंचकर्म आयुर्वेद की एक ख़ास Detox Therapy है। किडनी रोग में हल्के और सुरक्षित पंचकर्म उपाय अपनाए जाते हैं, जैसे बस्ती थेरेपी, स्नेहन और स्वेदन। इससे बॉडी के अंदर जमा toxins बाहर निकलते हैं और किडनी पर load कम होता है।

5. किडनी रोग में आयुर्वेदिक डाइट का महत्व – Kidney rog mein ayurvedic diet ka mahatva

किडनी रोग में आयुर्वेदिक डाइट दवा के जितना ही महत्व रखती है। आमतौर पर किडनी रोग में नीचे दी गई ईन चीज़ों को खाना चाहिए –

  • हल्का, ताजा और घर का बना भोजन
  • उबली सब्जियां
  • लौकी, तोरी, टिंडा
  • सेंधा नमक, लेकिन कम मात्रा में
  • ऑलिव ऑइल, लिमिट में
  • डॉक्टर की सलाह अनुसार पानी

साथ ही किडनी रोग में ज़रूरी परहेज़ का ध्यान रखें और ईन चीज़ों का इस्तेमाल न करें –

  • ज़्यादा नमक
  • प्रोसेस्ड फूड
  • पैकेज्ड स्नैक्स
  • ज़्यादा प्रोटीन
  • कोल्ड ड्रिंक्स
📝 Share Your Health Problem With Us Now - Fill Out the Form Below and Take the First Step Toward Healing.
Enquiry Now

 

FAQs

आयुर्वेदिक इलाज में कितना समय लगता है? – Ayurvedic ilaj mein kitna samay lagta hai?

आयुर्वेदिक इलाज एक नेचुरल प्रोसेस है, इसलिए इसमें समय लगता है। आमतौर पर कुछ महीनों में सुधार दिखने लगता है।

क्या आयुर्वेदिक दवाओं के साइड इफेक्ट होते हैं? – Kya ayurvedic dawao ke side effect hote hain?

आयुर्वेदिक दवाओं के साइड इफेक्ट ना के बराबर होते हैं, अगर आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ली जाए।

आयुर्वेदिक डाइट किडनी रोग में क्यों जरूरी है? – Ayurvedic diet kidney rog mein kyo zaruri hai?

क्योंकि गलत खाना किडनी पर direct असर डालता है। हल्का और आसानी से पचने वाला खाना किडनी को आराम देता है।

आयुर्वेद में किडनी की सूजन कैसे कम की जाती है? – Ayurved mein kidney ki soojan kaise kam ki jati hai?

दोष संतुलन, सूजन कम करने वाली जड़ी-बूटियाँ और डाइट सुधार से सूजन को कंट्रोल किया जाता है।

आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।