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किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर

जानिए किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर का आपसी संबंध, इसके लक्षण, कारण, टेस्ट और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण।
By Dr. Puneet Dhawan | Published: January 27, 2026

किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर – Kidney Rog Aur High Blood Pressure

बहुत से लोग नहीं जानते कि किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर – ये दोनों बीमारियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लंबे वक़्त तक हाई रहता है, तो यह किडनी की blood vessels को नुकसान पहुँचा सकता है। इससे किडनी तक खून का flow कम हो जाता है, किडनी की filter करने की क्षमता घटने लगती है और धीरे-धीरे CKD की स्थिति बन सकती है। Uncontrolled हाई BP किडनी फेल होने का एक बड़ा कारण भी बन सकता है। कई बार हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुँचाता है, तो कुछ मामलों में किडनी रोग की वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है

किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर के ख़ास लक्षण – Kidney rog aur high blood pressure ke khaas lakshan

शुरुआत में कोई ख़ास लक्षण नहीं दिखते। लेकिन वक़्त के साथ ये लक्षण दिख सकते हैं –

  • पैरों, चेहरे या आँखों के नीचे सूजन
  • बार-बार पेशाब आना या बहुत कम पेशाब होना
  • थकान और कमजोरी
  • सिर दर्द
  • चक्कर आना
  • सांस फूलना
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किडनी रोग से ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण – Kidney rog se blood pressure badhne ke kaaran

1. प्राकृतिक संतुलन

हेल्दी किडनी शरीर में खून की मात्रा को संतुलित रखती है, सोडियम और पानी को बाहर निकालती है, कुछ hormones बनाती है जो BP को कंट्रोल करते हैं। जब किडनी ठीक से काम करती है, तो ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है। लेकिन किडनी रोग की कन्डिशन में यह सिस्टम गड़बड़ा जाता है।

2. बॉडी में पानी और नमक जमा होना

किडनी रोग में सबसे पहली दिक्कत होती है extra पानी शरीर से बाहर न निकल पाना, सोडियम का जमा होना। जब बॉडी में पानी और नमक ज़्यादा हो जाता है, तो खून की मात्रा बढ़ जाती है। ज़्यादा खून का मतलब blood vessels पर ज्यादा प्रेशर, और यही दबाव ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है। इसीलिए किडनी रोगियों को low-salt diet की सलाह दी जाती है।

3. रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम का बिगड़ना

किडनी एक ख़ास सिस्टम को कंट्रोल करती है जिसे Renin-Angiotensin System कहते हैं। यह सिस्टम ज़रूरत पड़ने पर BP बढ़ाता या घटाता है, blood vessels को सिकोड़ने या फैलाने का काम करता है। किडनी रोग में यह सिस्टम ज़रूरत से ज्यादा active हो जाता है। ऐसा होने पर नसें सिकुड़ जाती हैं, खून का प्रेशर बढ़ जाता है, ब्लड प्रेशर लगातार हाई रहने लगता है।

4. टॉक्सिन्स का जमा होना

खराब किडनी खून से टॉक्सिन्स को ठीक से नहीं निकाल पाती। ये ज़हरीले तत्व नसों को कठोर बना देते हैं, blood flow पर असर डालते हैं। जब नसें सख्त हो जाती हैं, तो उनमें से खून गुजरने के लिए ज़्यादा प्रेशर चाहिए होता है, जिससे BP बढ़ जाता है।

5. किडनी में खून की कमी

किडनी रोग में अक्सर किडनी तक खून का flow कम हो जाता है। इसे देखकर बॉडी को लगता है कि BP कम है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। इस गलत signal की वजह से बॉडी ज्यादा hormones release करती है, BP बढ़ती है। यह प्रोसेस लंबे वक़्त तक चलने पर हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है।

6. पेशाब से प्रोटीन का निकलना

कई किडनी रोगियों में पेशाब के साथ प्रोटीन निकलता है जिसे Proteinuria कहते हैं। इससे पता चलता है कि किडनी की filtering system खराब हो चुकी है। प्रोटीन लॉस के कारण blood vessels को नुकसान होता है, सूजन बढ़ती है और बी पी कंट्रोल से बाहर होने लगता है।

7. एनीमिया और हार्ट पर असर

किडनी रोग में Erythropoietin hormone कम बनने लगता है, जिससे एनीमिया हो सकता है। एनीमिया की वजह से हार्ट को ज़्यादा काम करना पड़ता है और यह भी BP बढ़ने का एक कारण बनता है।

8. आयुर्वेदिक कारण

किडनी रोग में कफ दोष के कारण बॉडी में पानी जमा होता है, वात दोष के बिगड़ने से ब्लड फ्लो असंतुलित होता है, पित्त दोष बढ़ने से नसों में जलन और कठोरता आती है। इन तीनों दोषों के असंतुलन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।

9. मेंटल स्ट्रेस और किडनी रोग

किडनी रोग एक लंबी चलने वाली बीमारी है। इससे रोगी में तनाव, डर और anxiety बढ़ती है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।

Important Points Jo Yaad Rakhne Hain

  • हाई ब्लड प्रेशर किडनी रोग का बड़ा कारण बन सकता है
  • किडनी रोग होने पर BP कंट्रोल करना बेहद ज़रूरी है
  • नमक और पानी का संतुलन बिगड़ने से BP बढ़ता है
  • रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम BP को सीधे प्रभावित करता है
  • समय पर जांच और इलाज से किडनी फेल होने से बचा जा सकता है
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FAQs

किडनी रोग में ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए? – Kidney rog mein high blood pressure kitna hona chahiye?

आमतौर पर किडनी रोगियों के लिए BP 130/80 mmHg से कम रखना बेहतर होता है, लेकिन यह रोगी की कन्डिशन पर निर्भर करता है।

किडनी रोग और हाई BP में कौन से टेस्ट जरूरी होते हैं? – Kidney rog aur high BP mein kaun se test zaruri hote hain?

Regular ब्लड प्रेशर टेस्ट, सीरम क्रिएटिनिन, ब्लड यूरिया, पेशाब में प्रोटीन की जांच और जीएफआर टेस्ट ज़रूरी होते हैं।

क्या आयुर्वेद से किडनी रोग और हाई BP में मदद मिल सकती है? – Kya ayurved se kidney rog aur high BP mein madad mil sakti hai?

आयुर्वेद बॉडी के दोषों को बैलेन्स करने, डाइट सुधारने और lifestyle ठीक करने पर ज़ोर देता है, जिससे BP और किडनी दोनों को सपोर्ट मिलता है।

किडनी रोग और हाई BP से बचाव कैसे करें? – Kidney rog aur high BP se bachaav kaise karein?

नमक कम लें, BP नियमित जांचें, सही डाइट लें, वजन कंट्रोल रखें, स्ट्रेस कम करें और टाइम पर इलाज लें।

आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर का कनेक्शन बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।