किडनी रोग में एनीमिया क्यों होता है?
किडनी रोग में एनीमिया क्यों होता है? – Kidney Rog Mein Anemia Kyon Hota Hai?
किडनी से जुड़ी बीमारी में अक्सर एनीमिया की समस्या भी देखने को मिलती है। एनीमिया का मतलब है body में खून की कमी, खासकर हीमोग्लोबिन का level कम हो जाना। किडनी और खून का गहरा रिश्ता है इसलिए, ये ठीक से समझना चाहिए कि “किडनी रोग में एनीमिया क्यों होता है?”
किडनी और खून का connection – Kidney aur khoon ka connection
हमारी किडनी सिर्फ़ शरीर से toxins बाहर निकालने का काम ही नहीं करती, बल्कि यह एक खास हार्मोन भी बनाती है जिसे Erythropoietin (EPO) कहते हैं। यह हार्मोन अस्थि मज्जा को लाल रक्त कोशिकाएँ बनाने के लिए प्रेरित करता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, खासकर Chronic Kidney Disease (CKD) में EPO का बनना कम हो जाता है। इस वजह से बॉडी में नई लाल रक्त कोशिकाएँ कम बनने लगती हैं और एनीमिया हो जाता है।
किडनी रोग में एनीमिया क्यों होता है? – Kidney rog mein anemia kyon hota hai?
1. EPO हार्मोन की कमी
खराब किडनी ठीक से EPO नहीं बना पाती। यह एनीमिया का सबसे बड़ा कारण है।
2. आयरन (Iron) की कमी
किडनी patients में आयरन की कमी हो जाती है। कभी-कभी डायलिसिस के वक़्त भी खून की थोड़ी मात्रा निकल जाती है, जिससे आयरन कम हो सकता है। इसलिए, जहाँ तक हो सके डायलिसिस को टालने की कोशिश करनी चाहिए।
3. शरीर में टॉक्सिन का जमना
जब किडनी ठीक से फिल्टर नहीं करती, तो बॉडी में toxins जमा हो जाते हैं। ये टॉक्सिन bone marrow के काम पर असर डालते हैं, जिससे खून कम बनता है।
4. पोषण की कमी
कई किडनी patients की भूख कम हो जाती है। उल्टी, मतली या diet restrictions के कारण वे enough पोषण नहीं ले पाते। इससे भी एनीमिया बढ़ सकता है।
एनीमिया के लक्षण – Anemia ke lakshan
- जल्दी थक जाना
- कमजोरी महसूस होना
- चक्कर आना
- सांस फूलना
- चेहरा और होंठ पीले पड़ना
- Heart Beat तेज होना
आयुर्वेद और एनीमिया – Ayurved aur Anemia
आयुर्वेद में एनीमिया को “पांडु रोग” कहा जाता है। पांडु का मतलब है शरीर का पीला या फीका पड़ जाना। आयुर्वेद के अनुसार जब digestion कमज़ोर हो जाता है और शरीर में “आम” (अधपचा विष) बनने लगता है, तो रस और रक्त धातु ठीक से नहीं बन पाती।
किडनी रोग में बॉडी में toxins बढ़ जाते हैं जिससे दोष असंतुलन (ख़ासकर वात और पित्त) बढ़ सकता है। इससे खून के बनने की प्रोसेस पर असर पड़ सकता है और एनीमिया जैसी condition पैदा हो सकती है। आयुर्वेद में उपचार का ख़ास उद्देश्य होता है अग्नि को मजबूत करना, बॉडी से आम निकालना और रक्त धातु को पोषण देना।
कुछ आयुर्वेदिक दवाइयाँ जैसे Iron based herbal formulations, मुनक्का, अनार, चुकंदर आदि खून बढ़ाने वाले माने जाते हैं। लेकिन ईन दवाओं का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर से पूछकर ही करना चाहिए।
एनीमिया के खतरे – Anemia ke khatre
अगर एनीमिया का ट्रीटमेंट न किया जाए, तो यह heart पर extra दबाव डाल सकता है। हार्ट को शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे वक़्त तक यह स्थिति Heart problems का कारण बन सकती है। इसीलिए किडनी रोग में एनीमिया को ignore नहीं करना चाहिए। रेगुलर Blood test, सही दवा और संतुलित diet से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
FAQs
किडनी रोग में एनीमिया की जांच कैसे होती है? – Kidney rog mein anemia ki jaanch kaise hoti hai?
Blood test से हीमोग्लोबिन, आयरन और दूसरे लेवल जांचे जाते हैं।
क्या किडनी रोग में एनीमिया खतरनाक है? – Kya kidney rog mein anemia khatarnaak hai?
हाँ, गंभीर एनीमिया दिल पर प्रेशर डाल सकता है।
क्या खान-पान से एनीमिया सुधर सकता है? – Kya khan-pan se anemia sudhar sakta hai?
संतुलित आहार और आयरन वाला खाना खाने से मदद मिल सकती है।
किडनी रोग में एनीमिया किस स्टेज में ज्यादा होता है? – Kidney rog mein anemia kis stage mein zyada hota hai?
आमतौर पर CKD की 3rd स्टेज के बाद ज़्यादा देखने को मिलता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि किडनी रोग में एनीमिया क्यों होता है। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग में एनीमिया की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग में एनीमिया का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।