Joint Pain vs Arthritis – कैसे पहचानें? | जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस में अंतर
Joint Pain vs Arthritis – कैसे पहचानें?
जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस के अंतर को समझें – Jodo ke dard aur arthritis ke antar ko samjhein
आजकल हर उम्र के लोग जोड़ों के दर्द से परेशान हैं। किसी को घुटनों में दर्द की शिकायत रहती है, तो कोई कमर, कंधे या उंगलियों में जकड़न महसूस करता है। ऐसे में कई बार लोग सोचते हैं कि जोड़ों का हर दर्द Arthritis की समस्या है, लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है। Joint Pain और Arthritis दोनों अलग-अलग समस्याएं हैं, जिनका कारण, लक्षण और उपचार भी अलग-अलग होता है। इसलिए, इस सवाल का सही जवाब जानना बहुत ज़रूरी है कि ‘Joint Pain vs Arthritis – कैसे पहचानें?’ साथ ही ईन दोनों समस्याओं के अलग-अलग पहलुओं को समझें ताकि समय रहते सही उपचार लिया जा सके।
क्या होता है Joint Pain? – Kya hota hai Joint Pain?
Joint Pain जोड़ों में होने वाला नॉर्मल दर्द है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है और कई बार यह बस कुछ समय के लिए होता है।
Joint Pain के आम कारण – Joint Pain ke aam kaaran
- गलत तरीके से चलना या उठना
- ज्यादा देर तक बैठना या खड़े रहना
- मोटापा
- विटामिन D और कैल्शियम की कमी
- हल्की चोट या मोच
- ज़्यादा मेहनत या एक्सरसाइज
यह आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है और इसमें ज्यादा सूजन या स्थायी जकड़न नहीं होती।
क्या होता है Arthritis? – Kya hota hai Arthritis?
Arthritis एक सिरियस और पुरानी बीमारी है जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और घिसाव शुरू हो जाता है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है और वक़्त के साथ जोड़ों को भारी नुकसान पहुँचा सकता है।
Arthritis के टाइप – Arthritis ke type
- ऑस्टियोआर्थराइटिस – यह जोड़ों के घिसने से होता है।
- रुमेटी गठिया – यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है।
- गाउट – यह यूरिक एसिड बढ़ने से होता है।
- सोरियाटिक गठिया – यह सोरायसिस से जुड़ा हुआ रोग है।
Joint Pain vs Arthritis – कैसे पहचानें? – Joint Pain vs Arthritis – Kaise Pahchaanein?
नीचे दिए गए ईन बिंदुओं के आधार पर Joint Pain और Arthritis में अंतर किया जा सकता है –
1. दर्द की अवधि
Joint Pain कुछ समय के लिए होता है और कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाता है। Arthritis का दर्द लंबे वक़्त तक बना रहता है और धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।
2. सूजन
Joint Pain में सूजन बहुत कम या नहीं होती है। Arthritis में जोड़ों में सूजन होती है और जोड़ गर्म महसूस होते हैं।
3. सुबह की जकड़न
Joint Pain में सुबह हल्की अकड़न हो सकती है जो जल्दी ठीक हो जाती है। Arthritis में ये जकड़न 30 मिनट से ज़्यादा रहती है।
4. चलने-फिरने में दिक्कत
Joint Pain में आराम करने से राहत मिल जाती है लेकिन Arthritis में टाइम के साथ चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है।
5. जोड़ों की बनावट
Joint Pain में जोड़ों की बनावट नॉर्मल रहती है। Arthritis में वक़्त के साथ जोड़ टेढ़े होने लगते हैं।
Joint Pain (संधि शूल) के आयुर्वेदिक कारण – Joint Pain (sandhi Shool) Ke Ayurvedic kaaran
- वात दोष का संतुलन बिगड़ना
- ठंडी चीज़ों का ज़्यादा सेवन
- कमजोरी और थकान
- गलत रूटीन
इसमें वात दोष बढ़ जाता है जिससे जोड़ों में दर्द होता है।
Arthritis (संधिवात / आमवात) के आयुर्वेदिक कारण – Arthritis (sandhiwaat / aamwaat) Ke Ayurvedic kaaran
- कमजोर पाचन
- आम (टॉक्सिन्स) का जमा होना
- वात और कफ दोष बढ़ना
- गलत खानपान और लाइफस्टाइल
आम बॉडी में जमा होकर जोड़ों में रुक जाता है, जिससे सूजन और दर्द शुरू होता है।
Joint Pain के लक्षण – Joint Pain ke lakshan
- कभी-कभी दर्द होता है
- आराम करने से ठीक हो जाता है
- सूजन ज्यादा नहीं होती
- मौसम बदलने पर बढ़ सकता है
Arthritis के लक्षण – Arthritis ke lakshan
- रोजाना दर्द रहना
- सुबह ज़्यादा जकड़न
- जोड़ों में सूजन और गर्माहट
- चलने में दिक्कत
- उंगलियों में टेढ़ापन
FAQs
सुबह जोड़ों में अकड़न क्यों होती है?
Arthritis में सूजन के कारण सुबह जकड़न ज़्यादा होती है।
क्या मौसम बदलने से Joint Pain बढ़ता है?
हाँ, ठंड और नमी में Joint Pain बढ़ सकता है।
Arthritis की जांच कैसे होती है?
एक्स-रे और ब्लड टेस्ट से Arthritis की जांच होती है।
Arthritis में जोड़ टेढ़े क्यों हो जाते हैं?
लगातार सूजन और घिसाव से जोड़ों की बनावट बिगड़ जाती है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको ‘Joint Pain vs Arthritis – कैसे पहचानें?’ पर जानकारी दी। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को Joint Pain या Arthritis की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से Joint Pain या Arthritis का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।