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क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है?

क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है, इसके कारण, लक्षण, स्टेज, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण, डाइट और लाइफस्टाइल की पूरी जानकारी।
By Dr. Puneet Dhawan | Published: February 5, 2026

क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है? – Chronic Kidney Disease Kya Hai?

जब हमारी किडनी धीरे-धीरे और लंबे वक़्त तक खराब होने लगती है, तो इस कन्डिशन को क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) कहा जाता है। क्रॉनिक का मतलब है – लंबे वक़्त तक चलने वाली समस्या, यानी यह बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि महीनों या सालों में धीरे-धीरे बढ़ती है। इसलिए डीटेल में हमें ये जानना चाहिए कि क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है, ताकि वक़्त पर इसे पकड़ लिया जाए और इलाज शुरू किया जाए।

कैसे होती है क्रॉनिक किडनी डिजीज? – Kaise hoti hai chronic kidney disease?

जब किसी वजह से किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है और यह समस्या 3 महीने या उससे ज़्यादा वक़्त तक बनी रहती है, तब इसे क्रॉनिक किडनी डिजीज कहा जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, और कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनकी किडनी कमजोर हो रही है। बाद में जैसे-जैसे किडनी डैमेज बढ़ता है, बॉडी में गंदगी जमा होने लगती है और धीरे-धीरे कई दिक्कतें सामने आने लगती हैं।

क्रॉनिक किडनी डिजीज के ख़ास कारण – Chronic kidney disease ke khaas kaaran

क्रॉनिक किडनी डिजीज आमतौर पर ईन कारणों से होती हैं –

  • डायबिटीज – लंबे वक़्त तक शुगर बढ़ी रहने से किडनी की छोटी नसें खराब होने लगती हैं।
  • हाई ब्लड प्रेशर; लगातार हाई BP से किडनी पर प्रेशर पड़ता है।
  • बार-बार किडनी इंफेक्शन होना।
  • Painkillers का ज़्यादा उपयोग (बिना डॉक्टर से पूछे)
  • पेशाब में रुकावट
  • Genetic कारण; अगर परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी हो।
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क्रॉनिक किडनी डिजीज के लक्षण – Chronic kidney disease ke lakshan

शुरुआती स्टेज में लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। लेकिन बीमारी बढ़ने पर नीचे दिए गए ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

  • जल्दी थकान लगना
  • चेहरे, पैरों या आंखों के आसपास सूजन
  • पेशाब में झाग आना
  • पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा होना
  • भूख कम लगना
  • मतली या उल्टी
  • नींद न आना
  • स्किन में खुजली
  • सांस फूलना

कई बार लोग इन लक्षणों को नॉर्मल कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है।

क्रॉनिक किडनी डिजीज की स्टेज – Chronic kidney disease ki stage

आमतौर पर CKD को ईन 5 स्टेज में बाँटा जाता है, जिसका पता GFR (किडनी की फ़िल्टर करने की क्षमता) से चलता है –

  • स्टेज 1: किडनी डैमेज है लेकिन लगभग ठीक काम कर रही है।
  • स्टेज 2: किडनी में हल्की कमजोरी है।
  • स्टेज 3: मध्यम कमजोरी है।
  • स्टेज 4: किडनी का ज़्यादा खराब होना।
  • स्टेज 5: किडनी फेलियर की समस्या।

जितनी जल्दी बीमारी पकड़ में आ जाए, उतना ही बेहतर कंट्रोल किया जा सकता है।

आयुर्वेद की नज़र में क्रॉनिक किडनी डिजीज – Ayurved ki nazar mein chronic kidney disease

आयुर्वेद के हिसाब से किडनी की बीमारी मुख्य रूप से वात दोष, कफ दोष और मेद धातु के imbalance से जुड़ी होती है। गलत diet, ज्यादा नमक, तला-भुना खाना, chemical वाला खाना, तनाव और खराब lifestyle से शरीर में toxins बनने लगते हैं। यही toxins धीरे-धीरे किडनी के सूक्ष्म चैनल (Srotas) को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे किडनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। आयुर्वेद में क्रॉनिक किडनी डिजीज को मूत्रवह स्रोतस की विकृति के रूप में देखा जाता है।

किडनी को मजबूत करने का आयुर्वेदिक सिद्धांत – Kidney ko majboot karne ka ayurvedic siddhant

आयुर्वेदिक उपचार सिर्फ़ symptoms दबाने पर नहीं, बल्कि जड़ से सुधार पर काम करता है। इसमें body से आम (toxins) को बाहर निकालना, दोषों का संतुलन, किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाना, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।

पुनर्नवा, गोक्षुर, वरुण, शिलाजीत जैसी जड़ी-बूटियाँ आयुर्वेद में किडनी के लिए उपयोगी मानी जाती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

क्रॉनिक किडनी डिजीज में डाइट और लाइफस्टाइल का महत्व – Chronic kidney disease mein diet aur lifestyle ka mahatva

किडनी की बीमारी में दवा के साथ-साथ सही खान-पान और lifestyle बहुत ज़रूरी होती है। नमक कम करना, प्रोसेस्ड फूड से बचना, सही मात्रा में पानी पीना, ब्लड शुगर और BP कंट्रोल में रखना – ये सब किडनी को आगे खराब होने से बचाने में help करते हैं। आयुर्वेद भी सात्विक, हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लेने की सलाह देता है।

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FAQs

क्रॉनिक किडनी डिजीज कितनी स्टेज में होती है? – Chronic kidney disease kitni stage mein hoti hai?

इस बीमारी में 5 स्टेज में होती है, जो GFR के आधार पर तय की जाती हैं।

क्रॉनिक किडनी डिजीज की जांच कैसे होती है? – Chronic kidney disease ki jaanch kaise hoti hai?

ब्लड टेस्ट (Creatinine, Urea), यूरिन टेस्ट और GFR के ज़रिए।

क्रॉनिक किडनी डिजीज से कैसे बचा जा सकता है? – Chronic kidney disease se kaise bacha ja sakta hai?

डायबिटीज और BP कंट्रोल में रखना, balanced डाइट लेना, दवाओं का लिमिटेड उपयोग और regular जांच से इससे बचाव संभव है।

क्या क्रॉनिक किडनी डिजीज जानलेवा है? – Kya chronic kidney disease jaanleva hai?

अगर वक़्त पर इलाज न हो तो यह गंभीर हो सकती है, लेकिन सही मैनेजमेंट से मरीज लंबे समय तक नॉर्मल जीवन जी सकता है।

आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।