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पंचकर्म क्या है? पूरी जानकारी और इसके 5 प्रमुख उपचार विधियाँ

पंचकर्म क्या है? आयुर्वेद की 5 प्रमुख पंचकर्म उपचार विधियाँ, फायदे, उपयोग, सावधानियाँ और FAQs की पूरी जानकारी। वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य, रक्तमोक्षण क्या होते हैं जानें।
By Dr. Puneet Dhawan | Published: December 2, 2025

पंचकर्म क्या है? पूरी जानकारी और इसके 5 प्रमुख उपचार विधियाँ – Panchakarma Kya Hai? Puri Jankari Aur Iske 5 Pramukh Upchaar Vidhiyaa

क्या है पंचकर्म?; 5 मुख्य कर्म – Kya hai panchakarma?; 5 mukhya karma

आयुर्वेद की एक ख़ास चिकित्सा पद्धति है जिसे पंचकर्म कहा जाता है। इसका अर्थ है "पाँच क्रियाएँ"। ईन क्रियाओं से शरीर में मौजूद ज़हरीले तत्त्व यानी गंदगी को बाहर निकाला जा सकता है। साथ ही वात, पित्त और कफ – ईन तीन दोषों को बैलेन्स करके शरीर, मन और आत्मा को फिर से जीवित किया जा सकता है। वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण – ये वो पाँच मुख्य कर्म हैं। किसी भी व्यक्ति को पंचकर्म करवाने से पहले इसकी पूरी जानकारी और इसकी 5 प्रमुख उपचार विधियाँ जान लेनी चाहिए।

पंचकर्म की 5 प्रमुख उपचार विधियाँ – Panchakarma ki 5 pramukh upchaar vidhiyaa

  • वमन: इस विधि में उल्टी के माध्यम से शरीर से एक्स्ट्रा कफ निकाला जाता है।
  • विरेचन: इसमें मल त्याग के माध्यम से पित्त को बाहर निकाला जाता है।
  • बस्ती: इस विधि में एनीमा के माध्यम से शरीर की गंदगी को बाहर निकाला जाता है; जिसमें दो तरह की क्रियाओं का उपयोग किया जाता है – निरूह/आस्थापना, जो शुद्धि करने वाला एनीमा है और अनुवासन यानी तैल-आधारित एनीमा।
  • नस्य: इसमें नाक के रास्ते से दवा डालकर सिर और गले से गंदगी निकाली जाती है।
  • रक्तमोक्षण: इस विधि में खराब खून को एक लिमिट में बाहर निकाल कर उसे साफ किया जाता है।
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किस बीमारी में कौनसी पंचकर्म विधि उपयोगी है – Kis bimai mein kaunsi panchakarma vidhi upyogi hai?

नीचे विस्तार में जानकार दी गई है कि किस पंचकर्म से कौनसी बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं –

  • बस्ती (एनीमा): यह गठिया, जोड़ दर्द, कब्ज, गैस, अपच और दूसरी वात से जुड़ी बीमारियों में फायदेमंद है।
  • विरेचन (रेचक): इससे लिवर, स्किन, आँतों और पित्ताशय से जुड़े रोगों जैसे पीलिया आदि को ठीक करने में मदद मिलती है।
  • रक्तमोक्षण (रक्त निकालना): यह विधि त्वचा से जुड़े रोग जैसे सोरायसिस और एक्जिमा में फायदा करती है। साथ ही पीलिया और सिरदर्द जैसी पित्त वाली बीमारियों में उपयोगी है।
  • नस्य: इस प्रोसेस से माइग्रेन, सिरदर्द, साइनसाइटिस, पुरानी सर्दी और श्वसन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
  • वमन: यह विधि कफ से जुड़ी दिक्कतों जैसे अस्थमा, ऐसिड रिफ्लक्स और एलर्जी में मदद करती है। इसमें शरीर से एक्स्ट्रा बलगम और गंदगी निकालने के लिए औषधीय जड़ी-बूटियों की मदद से उल्टी कराई जाती है।
  • शिरोधारा: यह स्ट्रेस, चिंता, नींद की समस्या और माइग्रेन के लिए फायदेमंद है।
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FAQs

पंचकर्म थेरेपी का क्या उद्देश्य होता है – Panchakarma therapy ka kya uddeshya hota hai?

बॉडी की सफाई, दोषों को बैलेन्स करना, इम्यूनिटी बढ़ाना और आयुर्वेदिक उपचार को ज़्यादा प्रभावी बनाना इसका ख़ास उद्देश्य है।

पंचकर्म कब करवाना चाहिए – Panchakarma kab karwaana chahiye?

जब मौसम में बदलाव हो और जब शरीर में भारीपन, थकान, या बीमारियों का संकेत मिले तब पंचकर्म करवाना फायदेमंद होता है।

पंचकर्म कितने दिन का होता है – Panchakarma kitne din ka hota hai?

आम तौर पर पंचकर्म उपचार 7 से 21 दिनों तक चलता है, जो व्यक्ति की कन्डिशन और दोष असंतुलन पर निर्भर करता है।

पंचकर्म कराने के बाद क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए – Panchakarma karaane ke baad kya saavdhaniyaa rakhni chahiye?

उपचार के बाद हल्का खाना खाएँ। साथ ही कोल्ड ड्रिंक्स, धूप और स्ट्रेस से बचें तथा डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट फॉलो करें।

क्या पंचकर्म से वजन कम होता है – Kya panchakarma se wajan kam hota hai?

हाँ, पंचकर्म बॉडी से एक्स्ट्रा चर्बी और गंदगी निकालता है, जिससे वजन नेचुरली कम होता है।

पंचकर्म थेरेपी किसे नहीं करवानी चाहिए – Panchakarma therapy kise nahi karwaani chahiye?

गर्भवती महिलाएँ, ज़्यादा कमजोर व्यक्ति, बच्चों और बुजुर्गों को यह थेरेपी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही करवानी चाहिए।

आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको ‘पंचकर्म क्या है? पूरी जानकारी और इसके 5 प्रमुख उपचार विधियाँ’ के बारे में बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके कोई साथी/रिश्तेदार पंचकर्म के माध्यम से शरीर को शुद्ध करके रोग का उपचार चाहते हैं तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से पंचकर्म थेरेपी ले सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।