eGFR 60 से कम हो जाए तो क्या करें?
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह खून को फिल्टर करके अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। हालाँकि, कुछ जोखिम कारक किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का पता लगाने के लिए eGFR टेस्ट की सलाह देते हैं। इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि eGFR 60 से कम हो जाए तो क्या करें? साथ ही आप जानेंगे कि eGFR क्या है, इसके प्रमुख लक्षण और कारण क्या हैं। इसलिए, अगर आप भी किडनी की समस्या से परेशान हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
eGFR क्या है? - eGFR Kya Hai?
eGFR यानी ऐस्टीमेटेड ग्लौमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (Estimated Glomerular Filtration Rate) एक प्रकार की जांच है। इससे यह अनुमान लगाने में मदद मिलती है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है। यदि आपकी eGFR रिपोर्ट 60 से कम आई है, तो आपके लिए उसका कारण समझना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आगे की जांच कराना महत्वपूर्ण है। एक ही बार कम eGFR आने का मतलब स्थायी किडनी रोग होना नहीं है। लेकिन, यदि 3 महीने या उससे अधिक समय तक eGFR 60 से कम बना रहे, तो यह क्रोनिक किडनी डिजीज का संकेत हो सकता है।
eGFR 60 से कम होने का अर्थ - eGFR 60 Se Kam Hone Ka Arth
सामान्य रूप से कम eGFR का मतलब है कि किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता कम हो सकती है। ऐसे में eGFR की स्थिति को आमतौर पर निम्न प्रकार से समझा जाता है:
- 45 से 59- किडनी की कार्यक्षमता में हल्की से मध्यम कमी।
- 30 से 44- मध्यम से गंभीर कमी।
- 15 से 29- किडनी की कार्यक्षमता में गंभीर कमी।
- 15 से कम- किडनी फेलियर की स्थिति का संकेत।
इसके अलावा डॉक्टर पिछले eGFR नतीजों, क्रिएटिनिन, पेशाब में एल्ब्यूमिन/प्रोटीन और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी देखते हैं।
eGFR 60 से कम होने पर क्या करें? - eGFR 60 Se Kam Hone Par Kya Karen?
- डॉक्टर से रिपोर्ट की जांच कराएं- एक बार eGFR कम आने के पीछे डिहाईड्रेशन, बीमारी या अन्य अस्थाई कारण भी उत्तरदायी हो सकते हैं। ऐसे में रिपोर्ट को व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति के साथ समझना जरूरी है।
- डॉक्टर के सलाह पर दोबारा टेस्ट कराएं- किडनी की कार्यक्षमता को समझने के लिए समय के साथ eGFR में होने वाले बदलाव देखना महत्वपूर्ण है। एक ही टेस्ट के बजाय कई रिपोर्ट का ट्रेंड अधिक उपयोगी हो सकता है।
- यूरिन टेस्ट कराएं- डॉक्टर uACR या यूरीन एल्ब्यूमिन टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पेशाब में एल्ब्यूमिन या प्रोटीन की अधिक मात्रा किडनी डैमेज का संकेत हो सकती है।
- सभी दवाओं की जानकारी डॉक्टर को दें- अपनी सभी दवाओं की जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। कुछ दवाओं की खुराक किडनी की कार्यक्षमता के अनुसार बदलनी पड़ सकती है।
eGFR 60 से कम होने के लक्षण - eGFR 60 Se Kam Hone Ke Lakshan
- पेशाब की मात्रा या उसकी आवृत्ति में बदलाव होना।
- शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने से हाथ, पैर या टखनों में सूजन।
- किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर अधिक थकान या कमजोरी महसूस होना।
- शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के जमा होने पर मतली और उल्टी।
- हाथ, पैरों या अन्य मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होना।
- किडनी रोग बढ़ने पर त्वचा में खुजली की समस्या।
eGFR 60 से कम होने के कारण - eGFR 60 Se Kam Hone Ke Karan
- डायबिटीज- लंबे समय तक ब्लड शुगर अनियंत्रित रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं डैमेज हो सकती हैं।
- हाई ब्लड प्रेशर- लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं और किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
- शरीर में पानी की कमी- डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी कुछ स्थितियों में किडनी की कार्यक्षमता और टेस्ट रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती है।
- किडनी में सूजन या इंफेक्शन- किडनी से संबंधित कुछ बीमारियों और इंफेक्शन का असर भी किडनी की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।
- किडनी की बीमारी- यदि किडनी लंबे समय से डैमेज है, तो eGFR धीरे-धीरे कम हो सकता है।
- कुछ दवाओं का प्रभाव- कुछ दर्द निवारक दवाएं किडनी के लिए हानिकारक हो सकती हैं। ऐसे में कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।
eGFR बढ़ाने के लिए प्रभावी उपाय - eGFR Badhane Ke Liye Prabhavi Upay
- अधिक मात्रा में नमक के सेवन से परहेज करें।
- अत्यधिक प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से बचें।
- ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
- डॉक्टर की सलाह से ही प्रोटीन की मात्रा तय करें।
- पर्याप्त मात्रा में भोजन और तरल का सेवन करें।
eGFR को कम होने से कैसे रोकें? - eGFR Ko Kam Hone Se Kaise Roken?
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
- डायबिटीज को नियंत्रित करें।
- डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें।
- धूम्रपान और शराब से बचें।
- नियमित रूप से जांच कराएं।
डॉक्टर से कब संपर्क करें? - Doctor se Kb Sampark Karen?
यदि किडनी से संबंधित समस्या के साथ निम्न लक्षण दिखाई दें, तो जल्द चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है:
- कम पेशाब आना
- अत्यधिक सूजन
- सांस लेने में कठिनाई
- उल्टी या मतली
- अत्यधिक कमजोरी
FAQs
क्या eGFR 60 से कम होने पर ठीक हो सकता है?
यह मुख्य रूप से इसके कारण पर निर्भर करता है। यदि eGFR अस्थायी कारणों से कम हुआ है, तो कारण ठीक होने पर सुधार संभव है।
क्या घरेलू उपाय eGFR बढ़ाया जा सकता है?
eGFR बढ़ाने के लिए कौन-सा घरेलू उपाय उपयोगी है, यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। ऐसे में सही कारण जानना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करना सबसे महत्वपूर्ण है।
क्या आयुर्वेदिक या हर्बल दवाएं किडनी रोग में सुरक्षित हैं?
हर हर्बल या आयुर्वेदिक दवा सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं होती। कुछ सप्लीमेंट किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं या अन्य दवा के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। ऐसे में कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
क्या क्रिएटिनिन बढ़ने से eGFR कम होता है?
आमतौर पर क्रिएटिनिन और eGFR के बीच संबंध होता है। लेकिन, eGFR एक अनुमान है और कई व्यक्तिगत कारक नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
eGFR कम होने पर कब दोबारा टेस्ट कराना चाहिए?
यह eGFR में कमी के कारण और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर डॉक्टर आपकी रिपोर्ट देखकर दोबारा जांच का सही समय बता सकते हैं।
Clinical Experience
Clinical Experience: हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने आयुर्वेदिक उपचार पाकर किडनी की समस्या से राहत पाई है। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन और रोग की गंभीरता अलग होती है, इसलिए किसी भी तरह के इलाज से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
Medical Review
Medical Review: यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
Disclaimer
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
इस ब्लॉग में आपने जाना कि eGFR 60 से कम हो जाए तो क्या करें? लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी परिजन को किडनी से संबंधित कोई समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही आप कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों से उचित परामर्श भी ले सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।






















