सोरायसिस स्किन से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में तरह-तरह के डर, भ्रम और निराशा फैली हुई है। अक्सर रोगियों का यह सवाल होता है कि “क्या सोरायसिस हमेशा रहता है?” जिसके बारे में विस्तार से जानना बहुत ज़रूरी है क्योंकि अक्सर गलत जानकारी की वजह से लोग गलत इलाज शुरू कर देते हैं और रोगी को समझ नहीं पाते। इसलिए, नीचे दी गई जानकारी लेकर सोरायसिस का सही इलाज लें।
यह एक ऑटोइम्यून त्वचा रोग है, जिसमें बॉडी का इम्यून सिस्टम गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर अटैक करने लगता है। इसके कारण स्किन की कोशिकाएँ नॉर्मल से कई गुना तेजी से बनने लगती हैं। जहाँ नॉर्मल स्किन कोशिकाएँ 28 से 30 दिनों में बनती और झड़ती हैं, वहीं सोरायसिस में यह प्रोसेस सिर्फ़ 3 से 4 दिनों में पूरी हो जाती है।
आमतौर पर इस बीमारी में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देते हैं –
सोरायसिस एक क्रॉनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, लेकिन यह हमेशा ऐक्टिव नहीं रहती। यह भी हो सकता है कि यह बीमारी पूरी तरह खत्म न होकर अंदर ही अंदर लंबे वक़्त तक निष्क्रिय अवस्था में रहे। ऐसे में लक्षण बिल्कुल नहीं के बराबर होते हैं। कुछ मरीजों में यह बीमारी सालों तक शांत रहती है, जबकि कुछ में बार-बार भड़क सकती है।
वैसे तो सोरायसिस का ख़ास कारण इम्यून सिस्टम का असंतुलन है। जब तक बॉडी के अंदर की यह प्रॉब्लम ठीक नहीं होती, तब तक सोरायसिस दोबारा उभर सकता है। इसके पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं जो नीचे दिए गए हैं –
आमतौर पर यह सवाल हर सोरायसिस रोगी के दिमाग में होता है। आयुर्वेद सोरायसिस को कुष्ठ रोग के अंतर्गत मानता है और इसे बॉडी के अंदर जमा दोषों का परिणाम बताता है। आयुर्वेद में रोग को दबाने के बजाय जड़ से खत्म करने की कोशिश की जाती है। अगर सही आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म और लाइफस्टाइल अपनाई जाए, तो सोरायसिस को लंबे वक़्त तक या हमेशा के लिए शांत किया जा सकता है।
नीचे दिए गए ईन कारण से सोरायसिस बार-बार उभर सकता है –
1. सही डाइट लें
हरी सब्जियाँ, ताजे फल, हल्का, आसानी से पचने वाला खाना खाएँ और सही मात्रा में पानी पियें। साथ ही ईन चीज़ों से बचें – जंक फूड, बहुत मसालेदार खाना, डेयरी और रेड मीट, शराब।
2. स्ट्रेस कम करें
योग, प्राणायाम, ध्यान और सही नींद लेकर स्ट्रेस कम करें। इससे सोरायसिस के लक्षण भी कम होने लगते हैं।
3. स्किन केयर
मॉइस्चराइज़र का रेगुलर उपयोग करें, ज़्यादा गर्म पानी से न नहाएँ, केमिकल वाले साबुन आदि से बचें।
4. आयुर्वेदिक इलाज
आयुर्वेद में रक्तशोधन पंचकर्म, जड़ी-बूटियों से उपचार और डाइजेशन में सुधार के जरिए सोरायसिस को अंदर से ठीक किया जाता है।
हाँ, यह सिर्फ स्किन की नहीं बल्कि इम्यून सिस्टम की बीमारी है।
हाँ, ठंड और ड्राय मौसम में सोरायसिस के लक्षण बढ़ सकते हैं।
नहीं, यह इम्यून सिस्टम और डाइजेशन से जुड़ी बीमारी भी है।
हाँ, सही उपचार, डाइट और लाइफस्टाइल से रोगी पूरी तरह नॉर्मल लाइफ जी सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि “क्या सोरायसिस हमेशा रहता है?” लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को सोरायसिस की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सोरायसिस का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
AyuKarma Testo Build Capsules combine 12 Ayurvedic herbs and minerals to support strength, energy, stamina, physical performance, nourishment and overall daily vitality.
AyuKarma Hair Lush Capsules combine Ayurvedic herbs to support hair growth, reduce hair fall, strengthen roots, nourish the scalp and promote healthier-looking hair.
Karma Garcom Capsules contain Garcinia indica to support healthy metabolism, digestion, weight management, digestive comfort and daily wellness alongside a balanced lifestyle.
Doctor-recommended liver supplement that helps detoxify the liver, support healthy cholesterol, improve digestion & promote liver health. Developed by Dr. Puneet Dhawan with Karma Ayurveda philosophy.
Second Floor, 77, Block C, Tarun Enclave, Pitampura, New Delhi, Delhi, 110034