अक्सर लोग सोचते हैं कि किडनी की बीमारी सिर्फ़ बड़ों को होती है, लेकिन सच यह है कि किडनी रोग के शिकार बच्चे भी हो सकते हैं। बच्चों में इसके लक्षण कई बार बहुत हल्के होते हैं और parents उन्हें नॉर्मल समस्या समझकर ignore कर देते हैं जिससे आगे चलकर परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए, बच्चों में किडनी रोग के लक्षण जानकर तुरंत इलाज शुरू करवाना चाहिए।
अगर बच्चा पहले से बहुत कम या बहुत ज़्यादा पेशाब करने लगे, तो यह चिंता की बात हो सकती है। पेशाब का रंग बहुत गहरा, झागदार या उसमें खून दिखाई देना भी किडनी समस्या का symptom हो सकता है। कुछ बच्चों को पेशाब करते वक़्त जलन या दर्द भी हो सकता है। छोटे बच्चे अगर बार-बार रोते हैं या पेशाब रोकने की कोशिश करते हैं, तो इस पर ध्यान देना चाहिए।
जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो बॉडी में पानी जमा होने लगता है जिसका असर चेहरे, आंखों के नीचे, पैरों या टखनों में सूजन के रूप में दिख सकता है। अगर सुबह उठते ही बच्चे की आंखें सूजी हुई दिखें, तो इसे ignore न करें। कई बार parents इसे नींद पूरी न होने या रोने की वजह समझ लेते हैं, जबकि यह किडनी की warning हो सकती है।
किडनी खून को साफ करने के साथ-साथ hemoglobin को balanced रखने में भी मदद करती है। किडनी खराब होने पर बच्चा ज़्यादा थका-थका महसूस कर सकता है। खेलने में मन न लगना, जल्दी थक जाना, पढ़ाई में ध्यान न लगना – ये सब symptoms हो सकते हैं। अगर चेहरा पीला दिखाई दे तो यह anemia का इशारा भी हो सकता है।
किडनी खराब होने पर बॉडी में toxins जमा होने लगते हैं। इसका असर digestion पर पड़ता है। बच्चा खाना खाने से मना कर सकता है, उसे मतली या उल्टी हो सकती है। कई बार मुंह का taste खराब रहता है। अगर बच्चा लगातार खाने से बचे और वजन भी कम हो रहा है, तो जांच ज़रूरी है।
कुछ मामलों में urine infection की वजह से किडनी खराब होती है। बिना किसी साफ वजह के बार-बार बुखार आना urinary infection का symptom हो सकता है। बच्चा पेशाब करते वक़्त दर्द बताए या पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत करे, तो डॉक्टर से consult करना चाहिए।
बच्चों में अगर किडनी ठीक से काम न करे तो blood pressure बढ़ सकता है। अक्सर यह बिना लक्षण के होता है, इसलिए रेगुलर जांच ज़रूरी है। सिर दर्द, चक्कर आना या धुंधला दिखना इसके लक्षण हो सकते हैं।
उम्र के अनुसार बच्चे की लंबाई या वजन न बढ़ना भी किडनी रोग का संकेत हो सकता है। किडनी की पुरानी बीमारी बच्चों की growth पर असर डालती है।
छोटे बच्चों में बिस्तर गीला करना नॉर्मल माना जाता है, लेकिन अगर बड़ा बच्चा अचानक फिर से बिस्तर गीला करने लगे, तो यह भी किडनी या urinary समस्या का लक्षण हो सकता है।
इसके लिए यूरिन टेस्ट और ब्लड टेस्ट से जांच होती है।
यह किसी भी उम्र में हो सकता है, यहां तक कि जन्मजात भी।
हां, अक्सर ऐसा chronic kidney disease (CKD) में हो सकता है।
हां, ख़ासकर निचले पेट या पीठ में दर्द।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बच्चों में किडनी रोग के लक्षण बताए। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आपके या आपके किसी साथी/रिश्तेदार के बच्चे को किडनी की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से बच्चों में किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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