पार्किंसन रोग के शुरुआत में ये 7 लक्षण दिखाई दे सकते हैं – हाथों या उंगलियों में कंपन, चलने की speed slow होना, हाथ-पैरों में अकड़न, संतुलन बनाने में कठिनाई, लिखावट का छोटा होना, आवाज में बदलाव और चेहरे के हाव-भाव कम होना।
यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो दिमाग और नसों को प्रभावित करती है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए कुछ शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लेना चाहिए ताकि रोग को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में मदद मिले।
अगर नीचे दिए गए लक्षण लगातार दिखाई दें, तो यह पार्किंसन रोग के शुरुआती संकेत हो सकते हैं –
पार्किंसन का सबसे आम शुरुआती लक्षण हाथों, उंगलियों या पैरों में हल्का कंपन होना है। यह कंपन आराम की condition में अधिक महसूस हो सकता है।
अगर इंसान पहले की तुलना में धीरे चलने लगे या routine काम करने में अधिक वक़्त लगने लगे, तो यह Bradykinesia का संकेत हो सकता है।
मांसपेशियों में stiffness या जकड़न के कारण हाथ-पैरों को हिलाने में परेशानी महसूस हो सकती है।
बार-बार गिरना, चलते समय अस्थिरता महसूस होना या शरीर का आगे की ओर झुकना भी पार्किंसन का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
अगर लिखावट पहले की तुलना में छोटी और सघन होने लगे, तो इसे Micrographia कहा जाता है और यह पार्किंसन का संकेत हो सकता है।
धीरे बोलना, आवाज का कम clear होना या बोलने का तरीका बदल जाना भी इस रोग का शुरुआती संकेत हो सकता है।
कुछ patients में चेहरा भावहीन दिखाई देने लगता है और मुस्कुराने या भाव व्यक्त करने की क्षमता कम हो सकती है।
अगर नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से consult करना ज़रूरी हो सकता है –
| विशेषता | पार्किंसन रोग | सामान्य बढ़ती उम्र |
| हाथों में कंपन | आम है | आमतौर पर नहीं |
| चलने की गति | काफी धीमी हो सकती है | हल्की कमी हो सकती है |
| मांसपेशियों में अकड़न | अधिक | कम |
| संतुलन की समस्या | अक्सर होती है | सामान्यतः कम |
| लिखावट में बदलाव | छोटी और सघन | सामान्य |
| चेहरे के हाव-भाव | कम हो सकते हैं | सामान्य |
Walking, योग और हल्की Physical Activity नसों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और एंटीऑक्सीडेंट वाली चीज़ें दिमाग के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं।
अच्छी नींद दिमाग और Nervous System को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
Meditation और योग mental Stress को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
अगर परिवार में पार्किंसन का इतिहास है, तो समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाना फायदेमंद हो सकता है।
अगर ये लक्षण दिखाई दे रहे हों, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए –
हाथ कांपने के कई कारण हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन अधिकतर cases में 60 वर्ष के बाद इसका risk बढ़ जाता है।
नहीं, यह धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारी है और इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
कुछ cases में पारिवारिक इतिहास इसकी संभावना को बढ़ा सकता है, लेकिन हर patient में ऐसा नहीं होता।
हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने पार्किंसन रोग का आयुर्वेदिक उपचार पाकर पार्किंसन का जड़ से इलाज पाया। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन और पार्किंसन रोग की गंभीरता अलग होती है, इसलिए हाथों में कंपन, चलने में कठिनाई या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देने पर Neurologist या योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको बताया कि ऊपर दिए गए ये 7 लक्षण दिखें तो समझ लें पार्किंसन की शुरुआत हो सकती है। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को पार्किंसन की समस्या है या ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से पार्किंसन की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ रोगी विशेष डाइट चार्ट प्लान भी मिलेगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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