किडनी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका प्रमुख कार्य खून से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को छानकर शरीर से बाहर निकालना है। किडनी खून को ठीक से फिल्टर कर रही है या नहीं, इसका अनुमान लगाने के लिए eGFR टेस्ट किया जाता है।
जब किसी व्यक्ति का eGFR कम आता है, तो इसका अर्थ है कि किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता सामान्य से कम है। लेकिन, केवल एक बार के कम eGFR नतीजे देखकर तुरंत क्रोनिक किडनी डिजीज का निष्कर्ष नहीं निकला जाना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर eGFR के साथ अन्य जांच और समय के साथ होने वाले बदलाव भी देखते हैं। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि eGFR कम होने का क्या मतलब है? क्या इसे बढ़ाया जा सकता है?
eGFR का पूरा नाम ऐस्टीमेटेड ग्लौमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (Estimated Glomerular Filtration Rate) है। यह एक अनुमानित माप है, जो बताती है कि किडनी प्रति समय कितने प्रभावित तरीके से खून को फिल्टर कर रही है। आमतौर पर eGFR का अनुमान खून में मौजूद क्रिएटिनिन के स्तर और व्यक्ति की उम्र व अन्य संबंधित कारकों के आधार पर लगाया जाता है। कुछ परिस्थितियों में cystatin C जैसे टेस्ट भी उपयोगी हो सकते हैं।
आसान शब्दों में कहें तो,:
eGFR जितना कम होगा, किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता उतनी ही कम हो सकती है। लेकिन, ध्यान रखें कि eGFR एक अनुमानित संख्या है और कई अस्थायी कारणों से इसका परिणाम प्रभावित हो सकता है।
यदि eGFR कम है, तो यह संकेत हो सकता है कि किडनी खून से अपशिष्ट पदार्थों को सामान्य क्षमता से कम फिल्टर कर रही है।
सामान्य रूप से:
हालांकि, किडनी की वास्तविक स्थिति का आंकलन केवल eGFR एक संख्या से नहीं किया जाता। यदि eGFR 60 से कम तीन महीने या उससे अधिक समय तक बना रहता है, तो यह क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) का संकेत है। ऐसे में यूरिन में एल्ब्यूमिन की मात्रा भी किडनी की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
शुरुआती अवस्था में किडनी की बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होत। लेकिन, किडनी की कार्यक्षमता अधिक प्रभावित होने पर निम्न लक्षण दिख सकते हैं:
ध्यान रखें: जरूरी नहीं है कि यह सभी लक्षण केवल किडनी की बीमारी के कारण ही हों। ऐसे में सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
eGFR कम होने का मतलब है कि किडनी की खून को फिल्टर करने की क्षमता सामान्य से कम है। लेकिन, कम eGFR हमेशा स्थायी किडनी क्षति का प्रमाण नहीं होता, क्योंकि डिहाईड्रेशन, कुछ दवाएं और अन्य अस्थायी कारण भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। यदि समस्या एक्यूट किडनी इंजरी या किसी अस्थायी कारण से है, तो सही उपचार के बाद eGFR में सुधार संभव है। वहीं, लंबे समय से मौजूद क्रोनिक किडनी डिजीज में eGFR को पूरी तरह बढ़ाना हमेशा संभव नहीं होता। हालाँकि, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी को अधिक नुकसान से बचाने और स्थिति गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
eGFR आमतौर पर क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट के आधार पर निकाला जाता है। टेस्ट से पहले फास्टिंग की जरूरत है या नहीं, यह साथ में किए जाने वाले अन्य टेस्टों पर निर्भर करता है।
नहीं, eGFR कम होने का मतलब हमेशा डायलिसिस की आवश्यकता नहीं है। इसका निर्णय केवल eGFR संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य, लक्षण और अन्य मेडिकल कारकों को देखकर किया जाता है।
तेज गति से किए गए व्यायाम क्रिएटिनिन के स्तर को प्रभावित करते हैं और eGFR का अनुमान अस्थायी रूप से बदल सकते हैं।
कोई घरेलू उपाय, भोजन या सप्लीमेंट eGFR को प्राकृतिक रूप से नहीं बढ़ा सकता। ऐसे में इलाज के लिए eGFR का वास्तविक कारण जानें और इसी आधार पर उपचार, रक्तचाप व रक्त शर्करा पर नियंत्रण, उचित हाइड्रेशन और डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
नहीं, एक बार का कम परिणाम अस्थायी कारण से भी हो सकता है। ऐसे में क्रोनिक किडनी डिजीज का मूल्यांकन आमतौर पर समय के साथ लगातार कम eGFR या किडनी डैमेज के अन्य संकेतों के आधार पर किया जाता है।
Clinical Experience: हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने आयुर्वेदिक उपचार पाकर किडनी की समस्या से राहत पाई है। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन और रोग की गंभीरता अलग होती है, इसलिए किसी भी तरह के इलाज से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
Medical Review: यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
इस ब्लॉग में हमने बताया कि eGFR कम होने का क्या मतलब है? क्या इसे बढ़ाया जा सकता है? लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी परिजन को घुटने में दर्द की समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही आप कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में हमारे अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों से उचित परामर्श भी ले सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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