आमतौर पर मूंग दाल, मसूर दाल और छिलका उतरी हुई दालें किडनी रोगियों के लिए बेहतर मानी जाती हैं, क्योंकि दूसरी दालों की तुलना में इनमें प्रोटीन संतुलित मात्रा में होता है और ये आसानी से पच जाती हैं। हालांकि, हर मरीज की Kidney Function, Creatinine Level और Diet Plan अलग होता है, इसलिए दाल का चुनाव डॉक्टर या Dietitian की सलाह लेकर ही करें।
किडनी हमारी बॉडी से toxins और extra fluid को बाहर निकालने का काम करती है। जब किडनी सही तरह से काम नहीं करती, तब सही Diet बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। उचित आहार से किडनी पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है, शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखा जा सकता है और बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है। इसलिए किडनी रोगियों को खाने-पीने की हर चीज़ सोच-समझकर चुननी चाहिए।
किडनी की स्थिति के अनुसार प्रोटीन, पोटेशियम और फॉस्फोरस की मात्रा को नियंत्रित करना पड़ सकता है। इसलिए सही दाल का चुनाव बेहद जरूरी है। आमतौर पर नीचे दी गई ये दालें डॉक्टर से पूछकर खाई जा सकती हैं –
धुली हुई मूंग दाल को किडनी रोगियों के लिए सबसे अच्छी दालों में से एक माना जाता है। यह हल्की होती है और आसानी से पच जाती है। इसमें अन्य कई दालों की तुलना में कम गैस बनती है। मूंग दाल का सेवन limit में करने से बॉडी को ज़रूरी प्रोटीन मिलता है और किडनी पर अनावश्यक दबाव भी नहीं पड़ता।
मसूर दाल भी किडनी रोगियों के लिए एक अच्छा option हो सकती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि जिन मरीजों में पोटेशियम या फॉस्फोरस का level बढ़ा हुआ हो, उन्हें इसकी मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए।
धुली हुई उड़द दाल limit में खाई जा सकती है। यह प्रोटीन का अच्छा source है, लेकिन कुछ मरीजों में इसे पचाने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
अरहर दाल भारतीय घरों में सबसे अधिक खाई जाने वाली दालों में से एक है। किडनी रोगी इसे limit में ले सकते हैं। अगर डॉक्टर ने Low Protein Diet की सलाह दी है, तो इसकी मात्रा पर खास ध्यान देना चाहिए।
चना दाल में प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होते हैं। लेकिन इसमें पोटेशियम और फॉस्फोरस भी ज़्यादा हो सकते हैं। इसलिए Advanced Kidney Disease वाले मरीजों को इसे कम मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है।
| दाल | असर | फायदे | सावधानी / Risk |
| धुली मूंग दाल | हल्की और आसानी से पचने वाली | संतुलित प्रोटीन, कम गैस, पाचन के लिए अच्छी | मात्रा नियंत्रित रखें |
| मसूर दाल | पोषण देने वाली | प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत | पोटेशियम बढ़ा हो तो सीमित लें |
| अरहर दाल | ऊर्जा और प्रोटीन प्रदान करती है | स्वादिष्ट और आसानी से उपलब्ध | अधिक मात्रा किडनी पर दबाव बढ़ा सकती है |
| धुली उड़द दाल | प्रोटीन उपलब्ध कराती है | मांसपेशियों के लिए उपयोगी | कुछ लोगों में गैस और अपच हो सकती है |
| चना दाल | पौष्टिक और भरपूर फाइबर | लंबे वक़्त तक पेट भरा रखती है | फॉस्फोरस व पोटेशियम अपेक्षाकृत अधिक हो सकते हैं |
कुछ किडनी रोगियों में खून में पोटेशियम, फॉस्फोरस या यूरिया का level बढ़ सकता है। ऐसे cases में अधिक मात्रा में राजमा, काले चने, साबुत उड़द और ज़्यादा प्रोटीन वाली दालों का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसी भी दाल को नियमित रूप से खाने से पहले Kidney Function Report के अनुसार Diet Plan बनवाना चाहिए।
अगर ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए –
मूंग दाल को आमतौर पर सबसे हल्की और आसानी से पचने वाली दाल माना जाता है।
ज़्यादा प्रोटीन कुछ मरीजों में क्रिएटिनिन स्तर को प्रभावित कर सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है।
दाल की मात्रा मरीज की किडनी की condition, प्रोटीन की जरूरत और डॉक्टर या Renal Dietitian की सलाह पर निर्भर करती है।
कम नमक, कम तेल और हल्के मसालों के साथ दाल बनाना बेहतर माना जाता है।
Clinical Experience: हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई किडनी रोगियों ने आयुर्वेदिक treatment और सही खानपान लेकर अपनी किडनी का सुरक्षित इलाज पाया। हालांकि, हर मरीज की किडनी की कार्यक्षमता, क्रिएटिनिन स्तर और प्रोटीन की आवश्यकता अलग होती है, इसलिए कोई भी दाल या डाइट प्लान सभी मरीजों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। किडनी रोग में दालों की मात्रा और प्रकार का चयन करने से पहले Nephrologist, Renal Dietitian या योग्य डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
Medical Review: यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको बताया कि किडनी रोग में कौन-सी दाल खानी चाहिए। लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग है या ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ रोगी विशेष डाइट चार्ट प्लान भी मिलेगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
Second Floor, 77, Block C, Tarun Enclave, Pitampura, New Delhi, Delhi, 110034