सोरायसिस directly लिवर की बीमारी नहीं है, लेकिन इसका connection बॉडी के इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म से होता है, जिसमें लिवर का रोल भी ख़ास होता है। जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो बॉडी में टॉक्सिन्स बढ़ सकते हैं, जिससे सोरायसिस के लक्षण भी ज़्यादा बढ़ सकते हैं।
सोरायसिस एक Autoimmune Disease है, जिसमें बॉडी का इम्यून सिस्टम त्वचा की कोशिकाओं को तेजी से बढ़ाने लगता है। इससे स्किन पर लाल चकत्ते, पपड़ी और खुजली होती है। वैसे तो यह एक स्किन डिजीज है, लेकिन रिसर्च और क्लिनिकल अनुभव बताते हैं कि इसका असर केवल स्किन तक लिमिटेड नहीं रहता। इसका कनेक्शन लिवर हेल्थ, पाचन और डिटॉक्स सिस्टम से भी हो सकता है।
नीचे दिए गए बिंदुओं से पता चल सकता है कि सोरायसिस किस प्रकार लिवर से जुड़ा होता है –
यह पूरी तरह ठीक नहीं है कि सिर्फ लिवर ठीक करने से सोरायसिस का इलाज हो जाएगा। लेकिन, लिवर हेल्थ सुधारने से और सही डाइट लेने से टॉक्सिन्स कम होते हैं जिससे सोरायसिस के लक्षणों को कम करने में काफी मदद मिल सकती है।
| ट्रीटमेंट | फायदे | नुकसान | Avoid / Risk |
| एलोपैथिक दवाएं (Allopathy) | जल्दी असर, inflammation कम | साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं | लंबे वक़्त तक बिना सलाह के न लें |
| स्टेरॉयड क्रीम | खुजली और लालिमा जल्दी कम | स्किन पतली हो सकती है | लगातार उपयोग से बचें |
| आयुर्वेदिक इलाज | नेचुरल, जड़ से सुधार पर फोकस | असर धीरे दिखता है | सही डॉक्टर से ही लें |
| डाइट थेरेपी | अंदर से सुधार | धैर्य जरूरी | गलत डाइट से नुकसान |
| होम रेमेडीज | आसान और सस्ते | हर किसी पर असर नहीं | severe केस में अकेले भरोसा न करें |
| फोटोथेरेपी (Light Therapy) | स्किन सेल्स की ग्रोथ कम | बार-बार क्लिनिक जाना पड़ता है | संवेदनशील स्किन में सावधानी |
अगर आपकी डाइट खराब है, तो इसका असर direct लिवर और फिर स्किन पर पड़ता है। इसलिए, हरी सब्जियां, फल (कम शुगर वाले), हल्का और घर का खाना खाएँ। साथ ही कुछ चीज़ें न खाएँ जैसे – जंक फूड, शराब, ज़्यादा तेल और मसाले। सही डाइट से बॉडी अंदर से साफ होती है और सोरायसिस कंट्रोल में रहता है।
हमेशा नहीं, लेकिन कुछ cases में यह लिवर हेल्थ खराब होने का signal हो सकता है।
हाँ, अगर लक्षण serious हों या लंबे वक़्त से हों, तो लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराना फायदेमंद हो सकता है।
हाँ, लिवर साफ रखने से सोरायसिस कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।
सोरायसिस genetic और immune system से जुड़ा है, लिवर का रोल indirect होता है।
Clinical Experience: हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने सोरायसिस के ट्रिगर को पहचानने के बाद, डॉक्टर द्वारा दी गई आयुर्वेदिक दवाइयाँ, संतुलित डाइट और लाइफस्टाइल अपनाने पर स्किन की लालिमा, खुजली और पपड़ी में सुधार महसूस किया और सोरायसिस को कंट्रोल किया। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन अलग होती है, इसलिए किसी भी इलाज या डाइट प्लान को शुरू करने से पहले Dermatologist या योग्य डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
Medical Review: यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको बताया कि ‘क्या सोरायसिस लिवर से जुड़ा है?’ लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को सोरायसिस या लिवर की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सोरायसिस और लिवर की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ रोगी विशेष डाइट चार्ट प्लान भी मिलेगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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