नपुंसकता की आयुर्वेदिक दवा

नपुंसकता को इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी कहा जाता है। यदि किसी भी वजह से पुरुषों की प्रजनन क्षमता कम हो जाती है, तो उसे नपुंसकता के रूप में जाना जाता है। इसमें न सिर्फ यौन क्रियाओं पर असर पड़ता है, बल्कि बच्चों को पैदा करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है, लेकिन नपुंसकता की आयुर्वेदिक दवा से इस समस्या का इलाज किया जा सकता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन का असर नपुंसकता के प्रकारों में से एक है। योनि में प्रवेश के लिए सही समय में इरेक्शन होना जरूरी होता है। ऐसा इसलिए ताकि शुक्राणुओं को ग्रभाशय में इंजेक्शन दिया जा सके। अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो संभोग अधूरा रह जाता है। आइए इसके आयुर्वेदिक इलाज के बारे में जानते हैं -

नपुंसकता की आयुर्वेदिक दवा

1) शतावरी - शतावरी एक ऐसी हर्ब मानी जाती है, जो पुरुषों की इंफर्टिलिटी और नपुंसकता की समस्या को बाहर निकालने में मदद कर सकती है। इस जड़ी-बूटी का सेवन करने से इरेक्शन बहुत बेहतर हो सकता है। शतावरी के सेवन से स्पर्म से क्वालिटी और मात्रा दोनों ही बेहतर होते हैं।

2) अश्वगंधा - अश्वगंधा का सीधा असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है, जिससे स्ट्रेस को कम करने में मदद मिल सकती है। अश्वगंधा में नाइट्रिक ऑक्साइड मौजूद होता है, जो गुप्तांगो में ब्लड के फ्लो को बढ़ाकर सेक्शुअल डिजायर को बेहतर बनाने में मदद करता है। आप इसके पाउडर का सेवन भी कर सकते हैं।

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3) शिलाजीत - वहीं शिलाजीत भी नपुंसकता का इलाज करने के लिए फायदेमंद मानी जाती है। इस जड़ी-बूटी के सेवन से सेक्शुअल परफॉर्मेंस को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे कोशिकाओं का निर्माण होता है और साथ ही उन्हें सुरक्षा भी मिलती है।

4) शतावरी - शतावरी भी पुरुषों की इंफर्टिलिटी और नपुंसकता की समस्या को खत्म करने में मदद कर सकती है। इस जड़ी-बूटी का सेवन करने से इरेक्शन बहुत बेहतर हो सकता है। इसके सेवन से स्पर्म क्वालिटी और मात्रा दोनों ही बेहतर होते हैं।

5) गोक्षुरा - गोक्षुरा को गोखरू भी कहा जाता है। इस जड़ी-बूटी के सेवन से ल्यूटल हार्मोन को एक्टिव करके टेस्टास्टेरान को बढ़ाकर सेक्स उत्तेजना और इच्छा को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। ये शुक्राणुओं की क्वालिटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

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तो जैसा कि आपने जाना कि नपुंसकता की आयुर्वेदिक दवा से किस तरह से उपचार किया जा सकता है। ऐसे में इस उपचार को अपनाने से पहले आप एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर कर लें।

अगर आपको भी नपुंसकता या उससे जुड़ी किसी भी तरह की समस्या है, तो आप अपना इलाज कर्मा आयुर्वेदा में आकर करवा सकते हैं। यहां पर सन् 1937 से किडनी रोगियों का आयुर्वेदिक इलाज किया जा रहा है और हाल ही में इसे डॉ. पुनीत धवन संभाल रहे हैं। कर्मा आयुर्वेदा में किडनी डायलिसिस का आयुर्वेदिक इलाज या किडनी ट्रांसप्लांट के बिना ही भारतीय आयुर्वेद के सहारे किडनी फेल्योर का इलाज कर रहा है।

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