अक्सर लोग पेशाब के रंग पर ध्यान नहीं देते, लेकिन डॉक्टरों के हिसाब से पेशाब का रंग बॉडी में पानी की मात्रा और किडनी की हालत बताता है। इसलिए आम लोगों को भी ये जानना चाहिए कि “पेशाब पीला क्यों होता है?” और “कौन-सा रंग किडनी के लिए खतरा है?” ताकि बड़ी बीमारी आने से पहले ही बचाव कर लिया जाए।
पेशाब का रंग पीला होने का ख़ास कारण बॉडी में बनने वाला एक तत्व होता है, जिसे Urochrome कहते हैं। यह तत्व ब्लड में मौजूद हीमोग्लोबिन के टूटने से बनता है और किडनी के जरिए पेशाब के रूप में बाहर निकलता है।
जब आप सही मात्रा में पानी पीते हैं, तो यह Urochrome ज़्यादा dilute हो जाता है और पेशाब का रंग हल्का पीला या लगभग साफ दिखाई देता है। लेकिन, जब बॉडी में पानी की कमी होती है, तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है और उसका रंग गहरा पीला दिखाई देता है। इसलिए हल्का पीला पेशाब आमतौर पर नॉर्मल माना जाता है।
सुबह उठते वक़्त पेशाब का रंग अक्सर ज़्यादा पीला होता है क्योंकि रात में हम कई घंटों तक पानी नहीं पीते, जिससे बॉडी में पानी की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में किडनी पेशाब को ज़्यादा concentrate कर देती है, और रंग गहरा हो जाता है। अगर दिन में पानी पीने के बाद पेशाब का रंग हल्का हो जाए, तो फिर चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं।
हर रंग का पेशाब नॉर्मल नहीं होता। कुछ रंग ऐसे होते हैं, जो किडनी या बॉडी की किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। अगर पेशाब बहुत ज़्यादा गहरा पीला या नारंगी रंग का हो और यह लंबे वक़्त तक बना रहे, तो यह dehydration, लिवर या किडनी पर एक्स्ट्रा प्रेशर का symptom हो सकता है।
भूरा या कोला रंग का पेशाब serious warning हो सकती है। यह किडनी में इंफेक्शन, मसल ब्रेकडाउन या लिवर से जुड़ी समस्या का लक्षण देता है।
अगर पेशाब लाल या गुलाबी रंग का दिखे, तो यह पेशाब में खून आने का लक्षण हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में Hematuria कहा जाता है। यह किडनी स्टोन, इंफेक्शन या किडनी की बीमारी से जुड़ा हो सकता है।
झागदार पेशाब भी किडनी के लिए खतरा माना जाता है, क्योंकि इसका मतलब है प्रोटीन की मात्रा ज़्यादा है।
अगर पेशाब सफेद या दूधिया दिखाई दे, तो यह पेशाब के रास्ते में इंफेक्शन या मवाद होने का लक्षण हो सकता है। कुछ cases में यह किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से जुड़ा होता है।
आयुर्वेद में पेशाब को मूत्र कहते हैं और यह बॉडी से गंदगी बाहर निकालने का ख़ास ज़रिया है। आयुर्वेद के हिसाब से पेशाब का रंग बॉडी में दोषों के balance बिगड़ने को दर्शाता है।
जब बॉडी में पित्त दोष बढ़ जाता है, तब पेशाब का रंग गहरा पीला या जलन वाला हो सकता है। वात दोष बढ़ने पर पेशाब की मात्रा कम हो सकती है और रंग गाढ़ा दिख सकता है। जब कफ दोष का balance बिगड़ता है, तो पेशाब में झाग या भारीपन महसूस हो सकता है।
आयुर्वेद मानता है कि खराब डाइजेशन, बॉडी में टॉक्सिन का जमाव और गलत रूटीन मूत्र से जुड़ी समस्याएं पैदा करता है।
किडनी कमज़ोर होने पर वह खून को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पाती। इसका असर डायरेक्ट पेशाब के रंग और बनावट पर पड़ता है।
किडनी रोगियों में पेशाब कभी बहुत गाढ़ा, कभी बहुत झागदार, कभी रंगहीन या कभी लाल/भूरा हो सकता है। ऐसे बदलावों को इग्नोर नहीं करना चाहिए।
अगर कई दिनों तक पेशाब का रंग बहुत गहरा या भूरा हो, लाल या गुलाबी हो, झाग लगातार आए या पेशाब में जलन, बदबू या दर्द हो।
सही मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना ज़रूरी है।
यह पेशाब के रास्ते में इंफेक्शन या मवाद होने का लक्षण हो सकता है।
हाँ, पेशाब का रंग किडनी हेल्थ का शुरुआती संकेत हो सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको इस सवाल का जवाब दिया कि “पेशाब पीला क्यों होता है?” साथ ही बताया कि “कौन-सा रंग किडनी के लिए खतरा है?” लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को पेशाब या किडनी से जुड़ी कोई भी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी और पेशाब की हर समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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