आर्थराइटिस की बीमारी में जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है। यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बढ़ती उम्र, गलत लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण इसका खतरा ज्यादा बढ़ता है। दवाइयों के साथ-साथ अगर सही डाइट अपनाई जाए, तो आर्थराइटिस में दर्द और सूजन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए इस बात की पूरी जानकारी लें कि आर्थराइटिस में क्या खाएं और क्या बिल्कुल न खाएं?
आर्थराइटिस ख़ासकर दो प्रकार का होता है –
ऑस्टियोआर्थराइटिस: यह जोड़ों के घिसने, उम्र बढ़ने या जोड़ों के ज़्यादा उपयोग से होता है। इसमें हड्डियों के बीच की कार्टिलेज धीरे-धीरे खराब हो जाती है।
रूमेटॉइड आर्थराइटिस: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें बॉडी की इम्यूनिटी अपने ही जोड़ों पर हमला करती है।
दोनों ही स्थितियों में जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। गलत खान-पान बॉडी में सूजन को बढ़ा सकता है, जबकि सही डाइट सूजन को कम करके जोड़ों को स्ट्रॉंग बनाती है। कुछ फूड्स शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं, वहीं कुछ फूड्स नेचुरली सूजन कम करने में मदद करते हैं। इसलिए, आर्थराइटिस के इलाज में सही खानपान बहुत ज़्यादा मायने रखता है।
आयुर्वेद के हिसाब से आर्थराइटिस वात दोष से जुड़ी बीमारी है। इसलिए वात बढ़ाने वाला खाना जैसे बहुत ठंडा, बासी और सूखा भोजन से परहेज करना चाहिए। गर्म, ताजा और आसानी से पाचने वाला खाना आर्थराइटिस में ज़्यादा फायदेमंद माना जाता है।
आमतौर पर आर्थराइटिस में नीचे दी गई ईन चीज़ों को अपनी डाइट में शामिल करने का सुझाव दिया जाता है –
सेब, अनार, पपीता, अमरूद, ब्लूबेरी जैसे फल बॉडी में फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं जिससे सूजन और दर्द को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
पालक, मेथी, सरसों, बथुआ जैसी हरी सब्जियों में कैल्शियम, विटामिन K और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और सूजन कम कर सकते हैं।
अलसी के बीज, अखरोट और चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होता है, जो आर्थराइटिस में सूजन कम करने के लिए उपयोगी है।
हल्दी में करक्यूमिन और अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं जिससे जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
दूध, दही, छाछ और पनीर कैल्शियम और विटामिन D के अच्छे सोर्स हैं। ये हड्डियों को मजबूत करते हैं और जोड़ों की कमजोरी को कम करने में मदद करते हैं।
शरीर में पानी की कमी से जोड़ों में अकड़न बढ़ सकती है। सही मात्रा में पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और जोड़ों की लुब्रिकेशन बनी रहती है।
ब्राउन राइस, ओट्स, ज्वार, बाजरा और दलिया फाइबर से भरपूर होते हैं। ये बॉडी में सूजन बढ़ाने वाले तत्वों को कम करते हैं और वजन को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
नीचे दी गई ईन चीज़ों का परहेज़ करें –
केक, मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस में मौजूद रिफाइंड शुगर सूजन बढ़ाने का काम करती है।
समोसा, पकौड़ी, बर्गर, पिज़्ज़ा और फ्रेंच फ्राइज जैसी चीज़ें शरीर में सूजन बढ़ाती हैं और जोड़ों के दर्द को गंभीर बना सकती हैं।
मैदा, सफेद ब्रेड, बिस्किट और नूडल्स आदि पाचन बिगाड़ते हैं और बॉडी में इंफ्लेमेशन बढ़ा सकते हैं।
ज़्यादा नमक खाने से शरीर में पानी रुकने लगता है, जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द बढ़ सकता है। आर्थराइटिस के मरीजों को लिमिट में नमक खाना चाहिए।
लाल मांस में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है, जो सूजन को बढ़ाता है। यह जोड़ों के दर्द और अकड़न को और ज़्यादा बढ़ा सकता है।
चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट सूप और रेडी-टू-ईट फूड में प्रिज़र्वेटिव्स और केमिकल्स होते हैं, जो आर्थराइटिस रोगी के लिए हानिकारक हैं।
शराब और सिगरेट इम्यूनिटी कमजोर करते हैं और सूजन बढ़ाने वाले तत्वों को ऐक्टिव करते हैं, जिससे आर्थराइटिस के लक्षण बिगड़ सकते हैं।
पालक, मेथी, लौकी, तोरी और गाजर जोड़ों के लिए अच्छी मानी जाती हैं।
हां, लिमिट में दूध और दही कैल्शियम के लिए फायदेमंद होते हैं।
सरसों का तेल और ऑलिव ऑयल जोड़ों के लिए बेहतर माने जाते हैं।
सही डाइट अपनाने से दर्द, सूजन और अकड़न को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि आर्थराइटिस में क्या खाएं और क्या बिल्कुल न खाएं? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को आर्थराइटिस की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से आर्थराइटिस का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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