किडनी रोग के शुरुआती संकेतों में बार-बार पेशाब आना, पैरों में सूजन, थकान, भूख कम लगना और पेशाब का रंग बदलना शामिल हैं। ज़्यादातर लोग इन लक्षणों को नॉर्मल कमजोरी, गर्मी या बढ़ती उम्र समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर इन संकेतों पर सही time पर ध्यान न दिया जाए, तो किडनी के काम करने की capacity धीरे-धीरे कम होने लगती है और गंभीर समस्या बन सकती है।
किडनी से जुड़ी ख़ास बीमारियाँ इस प्रकार हैं –
अगर रात में कई बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, तो यह किडनी की खराबी का लक्षण हो सकता है। अक्सर लोग इसे पानी ज़्यादा पीने या मौसम का असर समझकर ignore कर देते हैं।
झागदार पेशाब का मतलब पेशाब से प्रोटीन निकलना हो सकता है। यह Kidney Damage का शुरुआती संकेत माना जाता है।
जब किडनी extra पानी और नमक बाहर नहीं निकाल पाती, तो पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन आने लगती है।
किडनी खराब होने पर बॉडी में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। इससे व्यक्ति हर वक़्त थका हुआ महसूस करता है।
किडनी रोग में पाचन पर बुरा असर पड़ता है, जिससे भूख कम लगती है और वजन घटने लगता है।
बॉडी में गंदगी जमा होने से स्किन में खुजली और रूखापन बढ़ जाता है।
लगातार High BP किडनी खराब होने का कारण भी है और लक्षण भी। कई लोग इसे केवल stress की समस्या मान लेते हैं।
किडनी खराब होने पर फेफड़ों में पानी जमा हो सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
किडनी के आसपास लगातार दर्द होना Infection या Kidney Stone का लक्षण हो सकता है।
किडनी ठीक से काम न करे तो बॉडी में ऑक्सीजन की कमी और toxins बढ़ने लगते हैं, जिसका असर दिमाग पर पड़ता है।
| संकेत | संभावित कारण | घरेलू उपाय | कब डॉक्टर से मिलें |
| बार-बार पेशाब आना | किडनी फिल्टर कमजोर होना | पानी संतुलित मात्रा में पिएं | 1 हफ्ते से ज़्यादा रहे |
| पेशाब में झाग | प्रोटीन लीकेज | नमक कम करें | रोज झाग दिखे |
| पैरों में सूजन | पानी जमा होना | पैरों को ऊँचा रखें | सूजन बढ़ती जाए |
| थकान | टॉक्सिन जमा होना | पर्याप्त आराम लें | लगातार कमजोरी रहे |
| भूख कम लगना | पाचन प्रभावित होना | हल्का भोजन लें | वजन तेजी से घटे |
| हाई BP | किडनी पर दबाव | नमक कम करें | BP लगातार हाई रहे |
| खुजली | विषैले पदार्थ बढ़ना | स्किन मॉइस्चराइज रखें | पूरे बॉडी में खुजली हो |
| सांस फूलना | पानी जमा होना | भारी काम से बचें | सांस लेने में परेशानी बढ़े |
| कमर दर्द | Infection या Stone | पानी पर्याप्त पिएं | तेज दर्द या बुखार हो |
नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें –
Creatinine Test, Urine Test, GFR Test और Ultrasound आम tests हैं।
सेब, पपीता, नाशपाती और अमरूद लिमिट में लिए जा सकते हैं।
शुरुआती stage में सही इलाज और lifestyle से कई cases में किडनी रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।
हाँ, आयुर्वेद किडनी रोग का प्राकृतिक इलाज दे सकता है।
हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने किडनी रोग के शुरुआती संकेतों जैसे बार-बार पेशाब आना, सूजन, थकान और पेशाब में बदलाव को सही वक़्त पर पहचानने के बाद डॉक्टर द्वारा दी गई आयुर्वेदिक दवाइयों, संतुलित डाइट और healthy lifestyle अपनाकर बेहतर सुधार महसूस किया। कई cases में शुरुआती stage में ध्यान देने से किडनी की कार्यक्षमता को लंबे वक़्त तक सुरक्षित रखने में मदद मिली। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन और किडनी रोग की गंभीरता अलग होती है, इसलिए किसी भी दवा, आयुर्वेदिक उपाय या सपोर्टिव थेरेपी को शुरू करने से पहले Nephrologist या योग्य डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको किडनी रोग के शुरुआती संकेत बताए जिनको लोग नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग है या किडनी रोग के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ रोगी विशेष डाइट चार्ट प्लान भी मिलेगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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