जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो डॉक्टर सबसे पहले नमक कम करने की सलाह देते हैं। ऐसे में रोगी के दिमाग में कई सवाल उठते हैं जैसे, ‘किडनी रोग में नमक कितना लें?’, ‘क्या नमक पूरी तरह बंद कर दें?’ आदि। इससे जुड़ी सारी जानकारी नीचे डीटेल में दी गई है जो ट्रीटमेंट में बहुत फायदा करती है।
नमक यानी सोडियम एक ऐसा मिनरल है जो बॉडी में पानी को रोक कर रखता है। अगर हम नमक ज़्यादा खाते हैं, तो बॉडी में पानी भी ज़्यादा रुकता है। इससे सूजन, हाई BP और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक्स्ट्रा सोडियम को यूरिन के जरिए बाहर निकालना किडनी का ख़ास काम है। लेकिन, जब किडनी कमजोर हो जाती है, तो वह यह काम ठीक से नहीं कर पाती। ऐसे में नमक का सेवन कम करना बहुत ज़रूरी हो जाता है।
किडनी रोग में ज़्यादा नमक लेने से ये दिक्कतें हो सकती हैं –
आम तौर पर एक healthy इंसान दिन में लगभग 5 ग्राम नमक ले सकता है, जो करीब एक छोटी चम्मच के बराबर होता है। लेकिन किडनी रोगी के लिए यह मात्रा और भी कम हो सकती है। अक्सर डॉक्टर सलाह देते हैं कि किडनी रोग में सिर्फ़ सेंधा नमक ही लेना चाहिए और वो भी लिमिट में। यह मात्रा रोग की स्थिति, ब्लड प्रेशर और सूजन की हालत पर भी निर्भर करती है। इसलिए, सही मात्रा जानने के लिए अपने डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह ज़रूर लें।
कई लोग ऊपर से नमक डालना कम कर देते हैं लेकिन, आजकल कई पैकेट वाले खाने में पहले से ही नमक मिला होता है जो बहुत खतरनाक है और इनसे बचना चाहिए। ईन चीज़ों में ख़ास हैं –
नमक कम करना शुरुआत में मुश्किल लग सकता है, लेकिन थोड़ी आदत बदलने से यह आसान हो जाता है।
डायलिसिस वाले रोगी: डायलिसिस के बीच के वक़्त में अगर नमक ज़्यादा लिया जाए, तो बॉडी में पानी ज़्यादा जमा हो जाता है। इससे डायलिसिस के दौरान दिक्कतें बढ़ सकती है। ऐसे में डॉक्टर और डाइटीशियन की सलाह ज़रूरी है।
हाई ब्लड प्रेशर और नमक: नमक ज़्यादा लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे किडनी को और नुकसान हो सकता है। इसलिए, अगर किसी को किडनी रोग और हाई बीपी दोनों हैं, तो नमक पर ख़ास ध्यान देना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों में सावधानी: इनकी बॉडी जल्दी डिहाइड्रेट भी हो सकती है और जल्दी सूजन भी आ सकती है। ऐसे में बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी बदलाव न करें।
नहीं, लेकिन डॉक्टर से पूछकर लिमिट में सेंधा नमक लिया जा सकता है।
Low Sodium Diet का मतलब है ऐसा खाना जिसमें नमक और सोडियम कम हो।
हाँ, लेकिन इसे भी लिमिट में ही लेना चाहिए।
अगर बहुत लंबे वक़्त तक बिल्कुल नमक न लिया जाए, तो कमजोरी और लो ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो सकती है।
अगर रोग शुरुआती स्टेज में है, तो नमक कंट्रोल करने से डायलिसिस को टालने में मदद मिल सकती है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि किडनी रोग में नमक कितना लें? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग की बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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