किडनी स्टोन तब बनता है जब पेशाब में मौजूद कुछ minerals जैसे कैल्शियम, ऑक्सलेट या यूरिक एसिड आपस में मिलकर छोटे-छोटे क्रिस्टल बना लेते हैं। धीरे-धीरे यही क्रिस्टल पत्थर के रूप में जमा होने लगते हैं जिसे किडनी स्टोन कहा जाता है। शुरू में इसका size छोटा होता है, लेकिन वक़्त पर ध्यान न दिया जाए तो यह पथरी (stone) दर्द और इंफेक्शन का कारण बन सकती है।
आयुर्वेद में किडनी स्टोन को “अश्मरी” नाम दिया गया है। यह रोग ख़ासकर वात और कफ दोष के imbalance से जुड़ा माना जाता है। जब body में कफ बढ़ता है और मूत्र गाढ़ा हो जाता है, तब उसमें छोटे-छोटे कण जमा होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। आयुर्वेद का उद्देश्य केवल पथरी को तोड़ना ही नहीं, बल्कि उसके कारणों को जड़ से खत्म करना भी होता है।
आयुर्वेद में ऐसी जड़ी-बूटियाँ दी जाती हैं जो पेशाब की मात्रा बढ़ाती हैं और पथरी को धीरे-धीरे बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनमें से कुछ ख़ास दवाएँ इस प्रकार हैं जिनका इस्तेमाल doctor की सलाह से ही करना चाहिए –
कुछ ख़ास हर्बल काढ़े और चूर्ण किडनी स्टोन में दिए जाते हैं, जो पथरी को धीरे-धीरे घोलने और दर्द कम करने में मदद करते हैं। ये शरीर से toxins निकालने में भी सहायक होते हैं।
कुछ cases में हल्का विरचन (detox therapy) या अन्य शोधन प्रक्रियाएँ दोषों को balance करने के लिए दी जाती हैं। लेकिन यह patient की स्थिति और पथरी के आकार पर depend करता है।
आयुर्वेद में आहार को भी दवा समान माना जाता है। सही diet से पथरी दोबारा बनने से रोकी जा सकती है। इसलिए ईन चीज़ों को अपनी diet में शामिल करना चाहिए – सही मात्रा में पानी पियें (डॉक्टर की सलाह अनुसार), नारियल पानी (डॉक्टर से पूछकर), लौकी, तोरी, कद्दू जैसी हल्की सब्जियाँ खाएँ, जौ का पानी या धनिया पानी लें।
साथ ही ईन चीज़ों का परहेज़ करें – ज़्यादा नमक, बहुत ज़्यादा पालक और टमाटर (ऑक्सलेट अधिक), रेड मीट, सोडा और कोल्ड ड्रिंक और बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी। सही खानपान किडनी स्टोन में घरेलू उपाय की तरह काम करता है।
आयुर्वेद मानता है कि balanced lifestyle और दोष संतुलन से पथरी जैसी समस्याओं से बचाव किया जा सकता है। रोजाना 2 से 3 लीटर पानी (डॉक्टर से पूछकर) पिए, पेशाब न रोकें, हल्का व्यायाम करें, ज़्यादा देर तक बैठे न रहें और संतुलित-सात्विक खाना खाएँ।
हाँ, छोटे size की पथरी धीरे-धीरे टूटकर पेशाब के साथ निकल सकती है।
जब पथरी मूत्र मार्ग में फंस जाती है, तब दर्द बहुत तेज हो सकता है, जिसे “renal colic” कहा जाता है।
यह पथरी के size और कन्डिशन पर निर्भर करता है। आमतौर पर कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक इलाज चलता है।
हाँ, नींबू में मौजूद citrate पथरी बनने की संभावना कम कर सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक इलाज बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी स्टोन की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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