खराब खान-पान और बदलते लाइफस्टाइल की वजह से आजकल क्रोनिक किडनी रोग होना आम बात हो गया है। क्रोनिक किडनी रोग को क्रोकिन किडनी फेलियर के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थिति में किडनी धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता खो देती है, जिसकी वजह से शरीर में अपशिष्ट और तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं, लेकिन क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक उपचार अपनाने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
क्रोनिक किडनी रोग जैसे-जैसे बढ़ने लगता है। वैसे-वैसे हाई ब्लड प्रेशर, एनीमिया, हड्डियां कमजोर होने की शिकायत रहने लगती है। इसमें किडनी ब्लड को छानने, अपशिष्ट पदर्थों को हटाने, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, रेड ब्लड वेसल्स का प्रोडक्सन करने, हड्डियों की हेल्थ को मेंटेन रखने और ब्लड केमिक्ल्स को कंट्रोल करने के लिए जरूरी हैं।
1) पुनर्नवा - पुनर्नवा में कई तरह के एंटी-ऑक्सिडेंट्स, ड्यूरेटिक्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जिसका सेवन करने से इसका सेवन करने से न सिर्फ किडनी को हेल्दी रखा जा सकता है, बल्कि इसके सेवन से आपको क्रोनिक किडनी रोग से बचा सकता है। आप इसका सेवन करने के लिए पुनर्नवा का काढ़ा रोजाना पी सकते हैं।
2) गोक्षुरा - वहीं गोक्षुरा जिसे गोखरू भी कहा जाता है। ये क्रोनिक किडनी रोग के लक्षणों को रोकने में बहुत मदद करती है। इसमें मौजूद ड्यूरेटिक गुण आपके शरीर से अतिरिक्त फ्लुइड को बाहर निकाल सकते हैं। ऐसे में आप इस जड़ी-बूटी को आहार में शमिल कर सकते हैं।
3) वरुण - वरुण जड़ी-बूटी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसे रोजाना डाइट में शामिल करने से क्रोनिक किडनी बीमारी से राहत मिल सकती है, क्योंकि ये एक ड्यूरेटिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है।
4) कासनी - कासनी एक ड्यूरेटिक जड़ी-बूटी है, जिसे नेफ्रोप्रोटेक्टिव और दवाई की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसका सेवन करने से क्रोनिक किडनी रोग में बेहद आराम पाया जा सकता है।
5) पंचकर्मा - पंचकर्मा को भी एक आयुर्वेदिक डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया माना जाता है। इस थेरेपी से टॉक्सिन्स को हटाने और किडनी को पुर्न:जीवित करने में मदद मिल सकती है। इसमें अभ्यंग, विरेचन जैसी थेरेपी शामिल है।
तो जैसा कि आपने जाना कि क्रोनिक किडनी रोग के आयुर्वेदिक दवा क्या है। ऐसे में इन उपचारों को अपनाने से पहले आप एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
अगर आपको भी नेफ्रॉटिक सिंड्रोम का रोग या उससे जुड़ी किसी तरह की समस्या हो रही है, तो आप अपना इलाज कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में आकर करवा सकते हैं। आयुर्वेद में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे किडनी को बिना डायलिसिस के ही ठीक किया जा सकता है। कर्मा आयुर्वेदा किडनी डायलिसिस का आयुर्वेदिक इलाज या किडनी ट्रांसप्लांट के बिना पूर्णतः प्राचीन भारतीय आयुर्वेद के सहारे से किडनी फेल्योर का आयुर्वेदिक इलाज कर रहा है।
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