यह एक ऐसी serious condition है जिसमें किडनी अचानक सही तरीके से काम करना बंद कर देती है। इसे मेडिकल भाषा में Acute Kidney Injury (AKI) भी कहा जाता है, यह बीमारी धीरे-धीरे नहीं बल्कि बहुत कम वक़्त में, यानी कुछ घंटों या कुछ दिनों के अंदर हो सकती है। इलाज में देरी हो जाए, तो यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। इसलिए, जल्द ही इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए कि “एक्यूट किडनी फेल्योर क्या होता है?”
हमारी बॉडी में दो किडनी होती हैं, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों side होती हैं। किडनी के ख़ास काम हैं:
आमतौर पर नीचे दिए गए ईन कारणों से एक्यूट किडनी फेल्योर होता है –
अगर बॉडी में blood flow कम हो जाए, तो किडनी तक सही मात्रा में खून नहीं पहुँचता। यह condition इन कारणों से हो सकती है – ज़्यादा खून बहना, हार्ट अटैक, गंभीर infection, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)।
कुछ दवाइयाँ या बीमारियाँ सीधे किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं, जैसे painkillers का ज़्यादा इस्तेमाल, कुछ एंटीबायोटिक दवाइयाँ, गंभीर infection और ज़हरीले केमिकल्स।
अगर पेशाब बाहर नहीं निकल पाता, तो किडनी पर pressure पड़ता है। किडनी स्टोन, प्रोस्टेट की समस्या, ट्यूमर इसके ख़ास कारण हो सकते हैं।
शुरुआत में इसके लक्षण हमेशा साफ दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ लक्षण दिख सकते हैं जैसे – पेशाब कम आना, पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन, थकान और कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत, उल्टी या मतली, भूख कम लगना, confusion या ध्यान न लग पाना। कई बार रोगी को कोई लक्षण महसूस नहीं होता और यह बीमारी सिर्फ़ ब्लड टेस्ट में ही पता चलती है।
कुछ लोगों में एक्यूट किडनी फेल्योर का खतरा ज़्यादा होता है, जैसे:
इसमें creatinine और urea का लेवल चेक किया जाता है जिससे किडनी की खराबी का पता चलता है।
इससे पता चलता है कि किडनी ठीक से पेशाब बना रही है या नहीं।
इससे किडनी की size और किसी रुकावट का पता लगाया जाता है।
आयुर्वेद में किडनी की समस्या को “मूत्रवह स्रोतस विकार” माना जाता है, जिसका इलाज बॉडी से toxins निकालकर किया जाता है। आमतौर पर आयुर्वेद में ईन दवाओं और तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है –
हाँ, अगर इलाज न हो तो यह गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
यह कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के अंदर विकसित हो सकता है।
किडनी जब खून साफ नहीं कर पाती, तो creatinine बॉडी में जमा होने लगता है।
एक्यूट किडनी फेल्योर अचानक होता है, जबकि क्रॉनिक किडनी फेल्योर धीरे-धीरे महीनों या सालों में होता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि एक्यूट किडनी फेल्योर क्या होता है। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को एक्यूट किडनी फेल्योर की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से एक्यूट किडनी फेल्योर का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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