जब भी किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में Creatinine बढ़ा हुआ दिखता है या Kidney function कम लिखा होता है तो सबसे पहले यही डर मन में आता है कि अब डायलिसिस करानी पड़ेगी। डायलिसिस एक बहुत ही रिस्की और जटिल प्रोसेस होता है। आमतौर पर इसके साइड इफेक्ट भी ज़्यादा होते हैं। इसलिए, अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि “क्या किडनी डायलिसिस के बिना इलाज संभव है?” इसका जवाब विस्तार से नीचे दिया गया है। साथ ही डायलिसिस और किडनी के उपचार से जुड़ी कुछ आम बातें भी शेयर की गई हैं जो उपचार के चुनाव में बहुत मदद कर सकती हैं।
डायलिसिस एक medical process है, जिसमें मशीन की मदद से खून को साफ किया जाता है। एलोपैथिक डॉक्टर इसकी सलाह तब देते हैं जब किडनी लगभग काम करना बंद कर देती है और शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकाल पाती। आमतौर पर डायलिसिस ईन cases में दी जाती है –
लेकिन, ईन cases में भी प्राकृतिक उपचार अपनाकर डायलिसिस की ज़रूरत को काफ़ी हद तक टाला जा सकता है।
हाँ, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचार से बिना डायलिसिस और बिना साइड इफेक्ट के भी किडनी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इस उपचार में नीचे दिए गए बिंदुओं को ख़ासतौर से शामिल किया जाता है –
किडनी मरीज के लिए खाना सिर्फ़ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि इलाज का हिस्सा होता है। हल्का, सादा और आसानी से पचने वाला खाना किडनी को आराम देता है। ज़्यादा नमक शरीर में पानी रोकता है, जिससे सूजन और BP बढ़ता है। ज़्यादा प्रोटीन से किडनी पर ज़्यादा लोड़ पड़ता है। ऐसे में संतुलित मात्रा में, डॉक्टर की सलाह से डाइट लेना किडनी को बचाने में मदद करता है।
बहुत लोग मानते हैं कि ज़्यादा पानी पीने से किडनी साफ हो जाएगी, लेकिन किडनी रोगी में यह सोच गलत साबित हो सकती है। ज़्यादा पानी शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, और फेफड़ों में पानी भर सकता है। कम पानी खून गाढ़ा करता है और टॉक्सिन बढ़ाता है। प्राकृतिक इलाज में पानी की मात्रा रोगी की कन्डिशन देखकर तय की जाती है।
प्राकृतिक इलाज का एक बड़ा हिस्सा होता है बॉडी की अंदरूनी सफाई करना। इसमें डाइजेशन को मजबूत करना, लिवर को सपोर्ट करना, आंतों की सफाई बनाए रखना शामिल होता है, ताकि किडनी पर एक्स्ट्रा प्रेशर न पड़े।
आयुर्वेद मानता है कि जब डाइजेशन कमजोर होता है, वात और कफ दोष बढ़ जाते हैं, शरीर में गंदगी बनने लगती है तो यही आम खून में मिलकर किडनी तक पहुंचता है और उसकी कार्यक्षमता को कमज़ोर कर देता है। आयुर्वेदिक इलाज में पाचन सुधारने, दोषों को balance करने, बॉडी की गंदगी निकालने पर एक साथ काम किया जाता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां किडनी की खराब कोशिकाओं को नहीं बदलतीं, लेकिन बची हुई हेल्दी कोशिकाओं को स्ट्रॉंग बनाती हैं। इससे क्रिएटिनिन कंट्रोल होता है, सूजन कम होती है, पेशाब की प्रोसेस बेहतर होती है।
यह थेरेपी बॉडी की गहरी सफाई करती है और टॉक्सिन को बाहर निकालने में हेल्प करती है। हालांकि पंचकर्म हर रोगी के लिए नहीं होता और इसे हमेशा एक्सपर्ट की देखरेख में ही किया जाता है।
डायलिसिस से बचने के लिए BP और Diabetes को कंट्रोल में रखना बहुत ज़रूरी है। यह काम आयुर्वेदिक हर्ब्स, योग और सात्त्विक डाइट की मदद से किया जाता है जिससे किडनी का प्राकृतिक या आयुर्वेदिक इलाज गहराई से असर करता है।
देर रात जागना, लगातार स्ट्रेस, शारीरिक गतिविधि की कमी – ये सभी किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में सही रूटीन, हल्की वॉक, योग, प्राणायाम और मानसिक शांति किडनी के प्राकृतिक इलाज को स्ट्रॉंग बनाते हैं।
BP और शुगर को कंट्रोल में रखना, सही डाइट और regular इलाज सबसे जरूरी है।
कुछ cases में हाँ, खासकर जब किडनी पूरी तरह खराब न हुई हो।
तेज सूजन, सांस फूलना, भूख न लगना, ज़्यादा कमजोरी और पेशाब में कमी।
नहीं, यह एक आम गलतफहमी है। हर किडनी रोगी डायलिसिस तक नहीं पहुँचता।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको इस सवाल का जवाब दिया कि “क्या किडनी डायलिसिस के बिना इलाज संभव है?” लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी की कोई भी समस्या है तो तुरंत आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी की हर समस्या का बिना डायलिसिस के आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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