किडनी चुपचाप खराब होती है और शुरूआत में अक्सर दर्द नही होता लेकिन आगे चलकर दर्द दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द कई बार आम दर्द की तरह लगता है इसलिए लोग confuse हो जाते हैं और इसे नॉर्मल दर्द समझकर ignore कर देते हैं। ऐसा करना बहुत खतरनाक हो सकता और किडनी की बीमारी को बहुत ज़्यादा बढ़ा सकता है। इसलिए, ये ठीक से जानना चाहिए कि “किडनी दर्द कहां होता है?” ताकि सही वक़्त पर समस्या की ठीक से पहचान की जा सके और सही ट्रीटमेंट लिया जा सके।
हमारी बॉडी में दो किडनी होती हैं। ये रीढ़ की हड्डी के दोनों side, पेट के पीछे की ओर, पसलियों के ठीक नीचे स्थित होती हैं। किडनी का size राजमा जैसा होता है। इसलिए, किडनी का दर्द आमतौर पर पीठ के निचले हिस्से में, कमर के एक तरफ, पसलियों के नीचे पीछे की ओर होता है।
किडनी का दर्द ज़्यादातर पीठ के एक तरफ होता है। अगर दाईं तरफ की किडनी में समस्या है तो दर्द दाईं तरफ और अगर बाईं किडनी में दिक्कत है तो बाईं तरफ दर्द होता है। यह दर्द गहरा होता है और लगातार बना रह सकता है। कभी-कभी दर्द पेट के सामने की ओर या जांघ तक भी फैल सकता है। अगर किडनी स्टोन है तो ऐंठन जैसा बहुत तेज़ दर्द हो सकता है।
बहुत बार लोग किडनी दर्द को नॉर्मल कमर दर्द समझ लेते हैं। लेकिन, दोनों में कुछ फर्क होते हैं;
यह दर्द झुकने, बैठने या उठने पर बढ़ता है, muscles में खिंचाव जैसा लगता है और आराम करने से कम हो जाता है।
इसमें बॉडी की मूवमेंट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। यह गहरा और अंदर से आता हुआ लगता है। साथ में बुखार, पेशाब में जलन या सूजन हो सकती है। अगर दर्द के साथ पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून, बुखार, बॉडी में सूजन और उल्टी या मतली – ये लक्षण भी दिखें तो किडनी की जांच करवानी चाहिए।
आमतौर पर किडनी में दर्द ईन कारणों से हो सकता है, जैसे –
आयुर्वेद मानता है कि किडनी से जुड़ी दिक्कतें वात और कफ दोष के imbalance की वजह से होती हैं। जब बॉडी में वात बढ़ जाता है, तो तेज और चुभने वाला दर्द होता है। कफ बढ़ता है, तो सूजन और भारीपन महसूस होता है। किडनी की समस्या के आयुर्वेदिक कारण हैं – खराब पाचन (अग्नि की कमजोरी), ज़्यादा नमक, तला-भुना खाना और कम पानी पीना।
किडनी दर्द को ठीक करने के प्राकृतिक उपाय इस प्रकार हैं जो किडनी दर्द के आयुर्वेदिक इलाज को सपोर्ट करते हैं – गुनगुना पानी पीना, लिमिट में नारियल पानी लेना (डॉक्टर से पूछकर), हल्का और सादा खाना खाना। इसके अलावा ज़्यादा नमक और पैकेज्ड फूड से बचना भी ज़रूरी है। लेकिन, अगर दर्द तेज हो या लंबे समय तक बना रहे, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे में डॉक्टर से consult ज़रूर करें।
अगर पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द हो रहा है और साथ में पेशाब से जुड़ी समस्या है, तो इसे ignore न करें। कई बार किडनी की बीमारी शुरुआत में हल्का दर्द देती है। खासकर अगर आपको पहले से Diabetes, High BP या किडनी की पुरानी बीमारी है, तो ऐसे दर्द को seriously लें।
कभी-कभी हल्का प्रेशर देने पर दर्द बढ़ सकता है, खासकर इंफेक्शन या सूजन की स्थिति में।
नहीं, आमतौर पर किडनी दर्द पोजीशन बदलने से ज़्यादा कम नहीं होता।
अगर दर्द पथरी की शुरुआती समस्या से जुड़ा है तो पानी मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर कन्डिशन में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।
दर्द की जगह लगभग समान होती है, लेकिन महिलाओं में कभी-कभी इसे पीरियड्स या UTI से जोड़ने के कारण भ्रम हो सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि किडनी दर्द कहां होता है? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी में दर्द की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी में दर्द का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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