कुछ लोग सिरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, बुखार या किसी भी तरह के दर्द के लिए बिना डॉक्टर से पूछे सीधे पेनकिलर खा लेते हैं। ये दवाइयाँ मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती हैं और अक्सर तुरंत आराम पहुंचाती हैं। इसी वजह से लोग इनसे होने वाले साइड इफेक्ट को इग्नोर कर देते हैं और ईन दवाओं को आदत बना लेते हैं। लेकिन, लंबे वक़्त तक या जरूरत से ज़्यादा पेनकिलर लेना किडनी के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए, इस बात की पूरी जानकारी लेनी चाहिए कि दर्द के लिए ली जाने वाली पेनकिलर से कैसे खराब हो जाती है किडनी? साथ ही किडनी और पेनकिलर से जुड़े दूसरे अहम पहलुओं के बारे में समझना चाहिए जिसकी जानकारी नीचे दी गई है।
पेनकिलर यानी दर्द निवारक दवाइयाँ ख़ासकर तीन टाइप की होती हैं –
इनमें से NSAIDs वर्ग की दवाइयाँ किडनी को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाती हैं, क्योंकि ये डायरेक्ट किडनी के ब्लड फ्लो पर असर डालती हैं।
किडनी बॉडी का एक बहुत ही ज़रूरी अंग है, जिसका ख़ास काम होता है –
किडनी को ये सारे काम ठीक से करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ब्लड सर्कुलेशन की ज़रूरत होती है। जब ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट आती है, तो किडनी के काम पर बुरा असर पड़ता है।
NSAIDs दवाइयाँ बॉडी में बनने वाले कुछ खास केमिकल्स जैसे प्रोस्टाग्लैंडिन को रोक देती हैं। ये केमिकल्स किडनी में ब्लड का फ्लो बनाए रखने में मदद करते हैं। जब पेनकिलर इन केमिकल्स को रोक देती हैं तो किडनी तक खून कम पहुंचता है, फिल्ट्रेशन की प्रोसेस स्लो हो जाती है और किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। लंबे वक़्त तक पेनकिलर लेने से किडनी की नलिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे धीरे-धीरे किडनी खराब हो जाती है।
कुछ लोग रोज़ पेनकिलर लेते हैं, ख़ासकर माइग्रेन, कमर दर्द, गठिया या किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित लोग। शुरुआत में उन्हें कोई दिक्कत महसूस नहीं होती, लेकिन कुछ महीनों या सालों बाद किडनी में खराबी शुरू हो जाती है और नीचे दिए गए नतीजे दिखाई दे सकते हैं –
कई बार यह कन्डिशन इतनी सिरियस हो जाती है कि मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ जाती है।
कुछ लोगों में पेनकिलर से किडनी खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है, जैसे:
ये लोग बिना डॉक्टर से पूछे पेनकिलर न लें।
किडनी खराब होने पर शुरु में नीचे दिए गए ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं जिन्हें बिलकुल भी नज़रअंदाज़ न करें –
हाँ, ज़्यादा मात्रा और लंबे वक़्त तक पैरासिटामोल लेने से किडनी और लिवर दोनों को नुकसान हो सकता है।
कुछ लोगों में कुछ महीनों में असर दिखने लगता है, जबकि कुछ में सालों बाद किडनी खराब होती है।
नहीं, लेकिन बार-बार और लंबे वक़्त तक लेने से खतरा बढ़ जाता है।
किडनी की फिल्टरिंग केपेसिटी कम होने से खून में क्रिएटिनिन जमा होने लगता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि दर्द के लिए ली जाने वाली पेनकिलर से कैसे खराब हो जाती है किडनी? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर ज़्यादा पेनकिलर लेने की वजह से आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार की किडनी खराब है या किडनी की खराबी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से खराब किडनी का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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