स्कैल्प सोरायसिस एक पुराना त्वचा रोग है, जो सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर असर डालता है। इस बीमारी में सिर की त्वचा पर सफेद या सिल्वर रंग की मोटी परतें जम जाती हैं, खुजली होती है, ड्रायनेस बढ़ जाती है और कई बार खून भी निकलने लगता है। देखने में भले ही यह सिर्फ़ त्वचा से जुड़ी समस्या लगती है, लेकिन असल में यह शरीर के अंदर मौजूद गड़बड़ियों का लक्षण होती है। इसलिए, ये जानना बहुत ज़रूरी है कि “स्कैल्प सोरायसिस कैसे ठीक होता है?” साथ ही स्कैल्प सोरायसिस के लक्षण, कारण और डाइट की जानकारी लें जो नीचे दी गई है।
यह एक ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें बॉडी की इम्यूनिटी खुद ही त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण त्वचा कोशिकाएं नॉर्मल से कई गुना तेज़ बनने लगती हैं और मृत कोशिकाएं स्कैल्प पर परत बनकर में जम जाती हैं। इस समस्या में हल्की रूसी हो सकती है या कई बार गंभीर गंभीर लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
आयुर्वेद इस रोग को कुष्ठ रोग समझता है। इसके पीछे की ख़ास वजह है – वात और पित्त दोष की गड़बड़ी, जिसमें खून भी दूषित हो जाता है। आयुर्वेद मानता है कि खराब डाइजेशन, बॉडी में विषैले तत्वों (आम) का जमाव, खून की अशुद्धि, गलत डाइट और खराब लाइफस्टाइल आदि की वजह से यह रोग पैदा होता है।
स्कैल्प सोरायसिस के उपचार के लिए आयुर्वेदिक इलाज सबसे अच्छा ऑप्शन है क्योंकि यह सिर्फ़ ऊपर से लगाने वाली दवाओं तक लिमिटेड नहीं होता, बल्कि बॉडी को अंदर से साफ और संतुलित करने पर आधारित होता है। नीचे दी गई आयुर्वेदिक औषधियां स्कैल्प सोरायसिस के इलाज में बहुत असरदार होती है जिन्हें किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के साथ लेना चाहिए –
आम तौर पर इस बीमारी में नीम तेल, ब्राह्मी तेल और नारियल तेल में नीम या मंजिष्ठा मिलकर स्कैल्प पर लगना चाहिए जिससे रूखापन और खुजली कम होती है।
पुराने और गंभीर मामलों में आयुर्वेद पंचकर्म थेरेपी का सुझाव देता है। स्कैल्प सोरायसिस में नीचे दिए गए ये 3 पंचकर्म बहुत उपयोगी होते हैं –
ईन कर्मों से शरीर अंदर से साफ होता है और रोग दोबारा उभरने की संभावना कम हो जाती है।
आमतौर पर स्कैल्प सोरायसिस में ईन चीज़ों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए –
साथ ही ईन चीज़ों का परहेज़ करें –
डैंड्रफ हल्की और अस्थायी समस्या है, जबकि स्कैल्प सोरायसिस में मोटी परत, खुजली और सूजन होती है।
आयुर्वेदिक इलाज में 2 से 3 महीनों में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगता है।
हाँ, यह बच्चों और बड़ों दोनों में हो सकता है।
इस रोग में केमिकल-फ्री, हर्बल या आयुर्वेदिक शैम्पू का उपयोग करना बेहतर होता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि स्कैल्प सोरायसिस कैसे ठीक होता है? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को स्कैल्प सोरायसिस की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से स्कैल्प सोरायसिस का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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