आजकल किडनी से जुड़ी समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। जब भी किडनी की जांच कराई जाती है तो रिपोर्ट में ज़्यादातर क्रिएटिनिन का बढ़ना सामने आता है। अगर क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ आता है तो यह किडनी के कमजोर होने का लक्षण हो सकता है जो आपको किडनी फेलियर तक पहुँचा सकता है। ऐसे में लोग सुरक्षित इलाज चाहते हैं और ये सवाल अक्सर पूछते हैं कि “किडनी क्रिएटिनिन कैसे कम करें आयुर्वेद से?” इस बारे में डीटेल में जानकारी नीचे शेयर की गई है साथ ही किडनी और क्रिएटिनिन से जुड़ी दूसरी अहम बातें भी समझाई गई हैं।
क्रिएटिनिन एक तरह का वेस्ट है जो हमारी मांसपेशियों से बनता है। नॉर्मल स्थिति में किडनी इसे खून से छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो यह गंदगी बॉडी में जमा होने लगती है और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है।
क्रिएटिनिन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
अगर वक़्त पर ध्यान न दिया जाए तो यह किडनी फेल होने तक की स्थिति पैदा कर सकता है।
आयुर्वेद में किडनी को वृक्क कहते हैं। आयुर्वेद मानता है कि किडनी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है।
जब शरीर में वात और कफ दोष बढ़ जाते हैं, तब मूत्र प्रणाली कमज़ोर हो जाती है और टॉक्सिनस बाहर नहीं निकल पाते। इसी वजह से खून में क्रिएटिनिन बढ़ने लगता है। ऐसे में, अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ईन आयुर्वेदिक दवाइयों का इस्तेमाल कर, क्रिएटिनिन कम किया जा सकता है –
पुनर्नवा एक बहुत ही जानी-मानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो किडनी की सफाई करती है। यह सूजन कम करती है, पेशाब की मात्रा बढ़ाती है, किडनी को डिटॉक्स करती है। पुनर्नवा का काढ़ा या चूर्ण डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए।
गोक्षुर पेशाब संबंधी रोगों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह किडनी की कमजोरी दूर करता है, पेशाब में जलन कम करता है और क्रिएटिनिन कम करने में मदद करता है।
वरुण जड़ी-बूटी किडनी स्टोन और यूरिन रुकावट में बहुत उपयोगी दवा है। यह मूत्र मार्ग को साफ करता है, किडनी को मजबूत बनाता है और सूजन कम करता है।
कासनी खून को साफ करने और किडनी को ठंडक देने वाली जड़ी-बूटी है। यह बॉडी से टॉक्सिन निकालने में मदद करती है और क्रिएटिनिन लेवल को कंट्रोल करने में उपयोगी है।
त्रिफला बॉडी की गंदगी को बाहर निकालने का प्राकृतिक उपाय है। यह पाचन सुधारता है, शरीर से गंदगी निकालता है, किडनी पर लोड़ कम करता है
आयुर्वेद में भोजन को भी दवा माना गया है। सही डाइट से किडनी को बहुत राहत मिलती है। इसलिए, क्रिएटिनिन कम करने के लिए ये खाएं –
हाई क्रिएटिनिन वाले ये न खाएं –
तनाव भी किडनी को कमजोर करता है, इसलिए योग और प्राणायाम को रूटीन में जरूर शामिल करें।
ये योगासन किडनी में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और अंगों को मजबूत बनाते हैं।
हाँ, पुनर्नवा, वरुण और गोक्षुर से बना काढ़ा किडनी को मजबूत बनाता है।
लौकी, तोरी, परवल, टिंडा और घीया बहुत फायदेमंद हैं।
हाँ, पर्याप्त पानी पीने से किडनी साफ रहती है और क्रिएटिनिन कंट्रोल होता है।
आयुर्वेद के हिसाब से वात और कफ दोष बढ़ने से किडनी कमजोर होती है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि किडनी क्रिएटिनिन कैसे कम करें आयुर्वेद से। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार का क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से क्रिएटिनिन कम करने का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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