बहुत से लोग अपनी रिपोर्ट में क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ देखकर घबरा जाते हैं। मन में डर बैठ जाता है जब डॉक्टर कहते हैं कि किडनी का क्रिएटिनिन बढ़ रहा है। लेकिन, ऐसे में सबसे पहले ये समझना चाहिए कि क्रिएटिनिन होता क्या है और किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने के कारण क्या हैं ताकि बीमारी की ठीक से समझकर हाई क्रिएटिनिन का जड़ से उपचार किया जा सके।
यह एक तरह का waste product है, जो हमारी मांसपेशियों से बनता है। यह खून के ज़रिये किडनी तक पहुंचता है और हेल्दी किडनी इसे पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है। जब किडनी ठीक से काम कर रही होती है, तो क्रिएटिनिन नॉर्मल रहता है। लेकिन जब किडनी की सफाई करने की ताकत कम होने लगती है, तो क्रिएटिनिन खून में जमा होने लगता है और रिपोर्ट में बढ़ा हुआ दिखाई देता है।
यह क्रिएटिनिन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। जब किडनी डैमेज होती है या धीरे-धीरे कमजोर पड़ती है, तो वह खून को पूरी तरह साफ नहीं कर पाती जिससे क्रिएटिनिन बॉडी में जमा होने लगता है।
अगर बॉडी में पानी की कमी हो जाने से किडनी पर दबाव बढ़ जाता है। कम पानी की वजह से पेशाब कम बनता है, गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और क्रिएटिनिन लेवल बढ़ने लगता है। गर्मी, उल्टी-दस्त या कम पानी पीने की आदत भी क्रिएटिनिन बढ़ने का कारण बन सकती है।
अगर ब्लड शुगर लंबे वक़्त तक कंट्रोल में न रहे, तो किडनी की नसें डैमेज हो जाती हैं, फिल्टर सिस्टम खराब हो जाता है और क्रिएटिनिन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
ज़्यादा ब्लड प्रेशर किडनी की छोटी-छोटी नसों को नुकसान करता है। इससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता घट जाती है और क्रिएटिनिन बढ़ता है।
अगर पेशाब ठीक से बाहर न निकल पाए, तो भी क्रिएटिनिन बढ़ सकता है। प्रोस्टेट बढ़ना, किडनी स्टोन, पेशाब की नली में सूजन या रुकावट – ये सब इसके कारण हो सकते हैं। इस हालत में गंदगी वापस खून में जाने लगती है।
Painkiller दवाइयां अगर लंबे वक़्त तक ली जाएं, तो किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं। कई लोग बिना डॉक्टर से पूछे दवाइयां लेते रहते हैं, जिससे किडनी धीरे-धीरे कमजोर होती है और क्रिएटिनिन बढ़ने लगता है।
बहुत ज़्यादा प्रोटीन लेने से भी किडनी पर प्रेशर पड़ता है। खासकर जिम जाने वाले लोग और ज़्यादा protein supplements लेने वाले लोग। इनमें क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ दिख सकता है, खासकर अगर किडनी पहले से कमजोर हो।
तेज़ बुखार, इंफेक्शन या सेप्सिस जैसी हालत में बॉडी में dehydration हो जाती है जिसका असर किडनी पर अचानक पड़ता है और क्रिएटिनिन temporary बढ़ सकता है।
अगर दिल सही से खून पंप नहीं कर पा रहा, तो किडनी तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंचता। इससे किडनी की सफाई करने की ताकत कम हो जाती है और क्रिएटिनिन बढ़ने लगता है।
उम्र के साथ किडनी की ताकत धीरे-धीरे कम होती जाती है। इसलिए बूढ़े लोगों में क्रिएटिनिन बढ़ना आम बात है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किडनी में सूजन (Nephritis) या इंफेक्शन होने पर किडनी के फिल्टर खराब हो जाते हैं, गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और क्रिएटिनिन बढ़ जाता है।
हां, डिहाइड्रेशन, बुखार या दवाइयों से क्रिएटिनिन अचानक बढ़ सकता है।
थकान, सूजन, पेशाब कम आना और भूख न लगना इसके आम लक्षण हैं।
हल्का बढ़ाव भी किडनी की शुरुआती कमजोरी का लक्षण हो सकता है।
ऐसे में पानी का सेवन, डाइट और पुरानी बीमारियों की जांच ज़रूरी है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने के कारण बताए। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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