किडनी की बीमारी पहले बुजुर्गों में ज़्यादा देखी जाती थी लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। जब किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ आता है, यूरिया ज़्यादा होता है या किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है, तो सबसे पहले दिमाग में यही सवाल आता है कि क्या अब डायलिसिस कराना पड़ेगा? बहुत से लोग डायलिसिस का नाम सुनते ही डर जाते हैं। क्योंकि ये एक जटिल और रिस्की प्रोसेस है। लेकिन, अच्छी बात ये है कि किडनी का इलाज बिना डायलिसिस भी किया जा सकता है ख़ासकर अगर बीमारी शुरुआती या मध्यम अवस्था में हो। इसलिए, इस बारे में पूरी जानकारी लें कि बिना डायलिसिस किडनी का इलाज कैसे करें।
नहीं। हर किडनी रोगी को डायलिसिस की ज़रूरत नहीं होती। डायलिसिस तब ज़रूरी होता है जब किडनी बहुत ज्यादा खराब हो जाए और खून को बिल्कुल भी साफ न कर पा रही हो। लेकिन ऐसी कन्डिशन में भी प्राकृतिक तरीकों से किडनी को ठीक किया जा सकता है। शुरुआती और मध्यम स्टेज में अगर वक़्त रहते सही आयुर्वेदिक इलाज शुरू कर दिया जाए, लाइफस्टाइल और डाइट का ध्यान रखा जाए तो किडनी फिर से ऐक्टिव हो सकती है और डायलिसिस की जरूरत को टाला जा सकता है।
किडनी का इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं होता, बल्कि पूरी लाइफस्टाइल बदलनी पड़ती है। किडनी को आराम देना, उस पर लोड़ कम करना और शरीर की सफाई प्रणाली को मजबूत बनाना बहुत जरूरी होता है। नीच दिए गए सुझाव और इलाज के तरीके अपनाकर किडनी को बिना डायलिसिस भी ठीक किया जा सकता है –
किडनी रोगी के लिए खाना सबसे बड़ी दवा होता है। गलत खानपान किडनी पर सबसे ज्यादा लोड़ डालता है। ज़्यादा नमक, ज़्यादा प्रोटीन, जंक फूड, पैकेट वाला खाना, कोल्ड ड्रिंक और बाहर का तला-भुना खाना किडनी को तेजी से खराब करते हैं। सादा, हल्का और ताजा खाना किडनी को आराम देता है। घर का बना खाना, कम नमक, कम मसाले और संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना किडनी के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
बहुत लोग सोचते हैं कि किडनी मरीज को ज्यादा पानी पीना चाहिए, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। किडनी मरीज के लिए पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह से फिक्स करनी चाहिए। ज़्यादा पानी पीने से सूजन बढ़ सकती है और कम पानी पीने से किडनी पर प्रेशर बढ़ जाता है। सही मात्रा में पानी पीना किडनी को साफ रखने में मदद करता है।
बिना डॉक्टर को कन्सल्ट किये दर्द की दवाइयां, एलोपैथिक, आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाइयां लेना किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, किडनी मरीज को कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछना चाहिए।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी के बहुत बड़े दुश्मन हैं। अगर ये दोनों कंट्रोल में रहें तो किडनी को होने वाला नुकसान काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए, बीपी और शुगर को रोज़ चेक करते रहें और इन्हें कंट्रोल में रखें।
लगातार तनाव में रहने से हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, जिससे बीपी और शुगर बढ़ते हैं और इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। पूरी नींद लेना, वक़्त पर सोना और सुबह जल्दी उठना किडनी को आराम देता है।
आयुर्वेद में किडनी को "वृक्क" कहा जाता है और इसे शरीर की सफाई का हिस्सा माना गया है। आयुर्वेद के हिसाब से जब बॉडी में वात और कफ दोष बिगड़ जाते हैं और पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है, तो बॉडी में आम यानी गंदगी बनने लगती है। यही आम धीरे-धीरे खून में मिलकर किडनी पर दबाव डालता है और किडनी की छानने की शक्ति को कमजोर कर देता है।
आयुर्वेद का इलाज शरीर की जड़ से सफाई करने पर बेस्ड होता है। यह इलाज पूरी तरह सुरक्षित और साइड इफेक्ट फ्री होता है। इसमें पाचन सुधारने, शरीर की गंदगी निकालने और दोषों का संतुलन बनाने पर काम किया जाता है। आयुर्वेद में किडनी को मजबूत बनाने के लिए कई जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, जो शरीर को अंदर से साफ करने में मदद करती हैं और किडनी पर बोझ कम करती हैं। पुनर्नवा, गोक्षुरा, वरुण, कासनी, भूम्यामलकी, चंद्रप्रभा वटी, पुनर्नवा मंडूर, वरुणादि काढ़ा – ये सब किडनी के इलाज की आयुर्वेदिक दवाएँ हैं, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेकर ही करना चाहिए।
शुरुआत में थकान, सूजन, पेशाब में बदलाव, भूख कम लगना और चेहरे पर सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
सही डाइट, ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल, रेगुलर जांच और तनाव से दूरी किडनी को बिगड़ने से रोकने में मदद करती है।
शुरुआती स्टेज में क्रिएटिनिन कंट्रोल करके डायलिसिस की जरूरत को टाला जा सकता है।
किडनी मरीज को हर 1 से 3 महीने में जांच ज़रूर करानी चाहिए।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि बिना डायलिसिस किडनी का इलाज कैसे करें। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी की कोई भी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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