अगर क्रिएटिनिन 3 तक पहुँच गया है तो सबसे पहले डॉक्टर से consult करें और अपनी किडनी की पूरी जांच करवाएं। साथ ही ऐसी चीजों का परहेज़ करें जो किडनी पर load, शुगर लेवल और toxins बढ़ा सकती हैं। सही डाइट, दवा और लाइफस्टाइल बदलाव से क्रिएटिनिन लेवल कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए, इस बारे में पूरी जानकारी लें कि ‘क्रिएटिनिन 3 हो जाए तो क्या करें?’। यह जानकारी नीचे डीटेल में दी गई है।
क्रिएटिनिन लेवल 3 mg/dL का मतलब है कि आपकी किडनी की काम करने की capacity बहुत कम हो चुकी है। इस स्थिति को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में तुरंत सही कदम उठाने की ज़रुरत होती है।
क्रिएटिनिन एक वेस्ट प्रोडक्ट है जो हमारी बॉडी में मसल्स के काम करने से बनता है। किडनी इसे फिल्टर करती है और पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देती है। किडनी खराब होने पर क्रिएटिनिन ब्लड में बढ़ने लगता है, क्योंकि किडनी इसे बाहर नहीं निकाल पाती। आमतौर पर क्रिएटिनिन का Normal level 0.6 – 1.2 mg/dL मना जाता है।
जब क्रिएटिनिन 3 तक पहुँच जाता है, तो बॉडी में ये लक्षण दिख सकते हैं –
नीचे अलग-अलग तरीकों की तुलना दी गई है:
| तरीका | कैसे काम करता है | फायदा | Avoid/Risk |
| एलोपैथिक दवा | किडनी पर दबाव कम करता है | जल्दी असर | लंबे वक़्त में साइड इफेक्ट |
| Diet पर कंट्रोल | वेस्ट प्रोडक्ट कम बनता है | सुरक्षित और जरूरी | गलत डाइट से नुकसान |
| पानी | टॉक्सिन बाहर निकालता है | सरल तरीका | ज़्यादा पानी नुकसान कर सकता है |
| Exercise | मेटाबॉलिज्म सुधारता है | overall हेल्थ बेहतर | ज़्यादा एक्सरसाइज से क्रिएटिनिन बढ़ सकता है |
| आयुर्वेदिक Treatment | किडनी को प्राकृतिक रूप से ठीक करता है | साइड इफेक्ट कम | गलत जड़ी-बूटी नुकसान दे सकती है |
| Dialysis | खून साफ करता है | life-saving | महंगा, dependency बढ़ती है |
आयुर्वेद में क्रिएटिनिन बढ़ने का इलाज प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से किया जाता है, जिसमें किडनी को अंदर से मजबूत किया जाता है और बॉडी से टॉक्सिन्स यानी गंदगी बाहर निकाली जाती है। आमतौर पर ये आयुर्वेदिक उपाय आजमाए जाते हैं –
पुनर्नवा, गिलोय, गोखरू और वरुण – ये जड़ी-बूटियां किडनी की सफाई करती हैं और उसके काम करने की capacity को धीरे-धीरे सुधारती हैं। पुनर्नवा खास तौर पर सूजन कम करने और यूरिन फ्लो बढ़ाने में मदद करती है। ध्यान रखें – बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के कोई भी जड़ी-बूटी लेना सही नहीं है, क्योंकि गलत उपयोग से नुकसान हो सकता है।
यह आयुर्वेदिक इलाज का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें वमन, विरेचन और बस्ती जैसे उपचार शामिल होते हैं, जो बॉडी से विषैले पदार्थ बाहर निकालते हैं। इससे किडनी पर प्रेशर कम होता है और क्रिएटिनिन लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है।
आयुर्वेद में diet भी दवा के बराबर होती है। इसमें हल्का, सुपाच्य और कम नमक वाला खाना दिया जाता है। जैसे: लौकी, तोरी, मूंग दाल और नारियल पानी (डॉक्टर की सलाह से)।
आयुर्वेद में दिनचर्या पर भी ध्यान दिया जाता है। सुबह जल्दी उठना, योग और प्राणायाम करना किडनी के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खासकर अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम बॉडी को detox करने में help करते हैं।
हाँ, अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो किडनी की गंभीर बीमारी पैदा हो सकती है।
Painkillers का ज़्यादा इस्तेमाल, High protein diet, Fast food और processed food – इनसें बचकर रहें।
हाँ, लेकिन सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है।
आमतौर पर सीधा दर्द नहीं होता, लेकिन सूजन और थकान हो सकती है।
Clinical Experience: हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने क्रिएटिनिन लेवल 3 या उससे ज़्यादा होने पर डॉक्टर द्वारा दी गई आयुर्वेदिक दवाइयों, किडनी-फ्रेंडली डाइट तथा लाइफस्टाइल बदलावों को अपनाकर अपना क्रिएटिनिन लेवल नॉर्मल किया।
Medical Review: यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको बताया कि क्रिएटिनिन 3 हो जाए तो क्या करें। अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को ऐसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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