सोरायसिस (Psoriasis) एक ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक चलती है। यह skin disease का एक ख़ास प्रकार है, जिसमें स्किन पर लाल चकत्ते, खुजली और सफेद पपड़ी बनने लगती है। बहुत से लोग पहली बार यह पपड़ी देखकर डर जाते हैं और सोचते हैं कि यह कोई infection है या छूने से फैलने वाली बीमारी है। लेकिन सच यह है कि सोरायसिस न तो संक्रमण है और न ही छूने से फैलता है। ऐसे में, यह साफ तौर पर समझना चाहिए कि “सोरायसिस के कारण शरीर में पपड़ी क्यों बनती है?”
सोरायसिस एक autoimmune रोग माना जाता है। इसमें बॉडी का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही skin cells पर हमला करने लगता है। इसका असर डायरेक्ट स्किन के बनने की प्रोसेस पर पड़ता है। नॉर्मली त्वचा में नई skin cells बनने और पुरानी cells के गिरने में लगभग 28 से 30 दिन लगते हैं। लेकिन सोरायसिस में यही प्रोसेस सिर्फ 3 से 5 दिन में हो जाती है।
ज़्यादातर ईन कारणों से सोरायसिस होता है और शरीर में पपड़ी बनती है –
जब skin cells ज़रूरत से ज़्यादा तेजी से बनने लगती हैं, तो पुरानी cells को गिरने का वक़्त नहीं मिलता। ये cells त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा होने लगती हैं। यही जमा हुई dead skin cells मिलकर मोटी, सफेद या चांदी जैसी पपड़ी बना देती हैं।
सोरायसिस में इम्यून सिस्टम ज़रूरत से ज्यादा active हो जाती है। यह सोचती है कि त्वचा को कोई नुकसान हो रहा है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। इस over-reaction के कारण सूजन बढ़ती है, त्वचा लाल हो जाती है, खुजली और जलन होती है, और पपड़ी बनने लगती है।
सूजन की वजह से blood flow बढ़ जाता है, जिससे skin लाल और मोटी दिखाई देती है। इसी मोटी स्किन के ऊपर dead cells जमकर पपड़ी बनाती हैं।
सोरायसिस वाली skin बहुत dry हो जाती है। जब त्वचा में नमी कम होती है, तो पपड़ी और ज़्यादा मोटी और साफ दिखाई देने लगती है।
इन जगहों पर skin ज़्यादा मोटी होती है, इसलिए पपड़ी भी ज्यादा बनती है –
ये कारण सोरायसिस को बढ़ा देते हैं –
आयुर्वेद में सोरायसिस को कुष्ठ रोग माना जाता है, खासकर एककुष्ठ और किटिभ कुष्ठ। आयुर्वेद के हिसाब से सोरायसिस में पपड़ी बनने के कारण इस प्रकार हैं –
वात दोष बढ़ने से skin dry हो जाती है, कफ दोष बढ़ने से त्वचा मोटी और पपड़ीदार हो जाती है। इन दोनों के बिगड़ने से त्वचा पर पपड़ी बनती है।
जब digestion ठीक नहीं होता, तो शरीर में आम यानी toxins बनते हैं। ये toxins खून में मिलकर त्वचा तक पहुंचते हैं और skin disease को जन्म देते हैं।
खराब खान-पान से रक्त दोष बढ़ता है, इससे त्वचा की कोशिकाएं सही तरीके से काम नहीं कर पातीं और पपड़ी बनने लगती है।
नहीं। पपड़ी को जबरदस्ती हटाने से bleeding हो सकती है, infection का खतरा बढ़ता है, सोरायसिस और फैल सकता है।
बिल्कुल नहीं। सोरायसिस की पपड़ी न छूने से फैलती है, न कपड़े, तौलिया या बिस्तर से।
क्योंकि यह immune system और metabolism से जुड़ी बीमारी है। जब तक अंदर का imbalance ठीक नहीं होता, तब तक पपड़ी बार-बार बनती रहती है।
ज़्यादातर cases में होती है, लेकिन कुछ लोगों में सिर्फ लालपन और खुजली होती है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि सोरायसिस के कारण शरीर में पपड़ी क्यों बनती है। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को सोरायसिस की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सोरायसिस की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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