कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही दिल दहल जाता है। मॉडर्न चिकित्सा में कैंसर का इलाज संभव है लेकिन, यह इलाज बेहद खर्चीला और तकलीफदेह हो सकता है। इसीलिए कैंसर की देसी दवा के बारे में जानना बहुत ज़रूरी है जो सपोर्टिव ट्रीटमेंट दे सकती हैं, लेकिन इससे पहले हमें कैंसर के बारे में आम जानकारी लेनी चाहिए जो नीचे दी गयी है।
शरीर की कोशिकाओं का अब्नोर्मल तरीके से बढ़ना कैंसर कहलाता है, जो शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है। यदि समय पर इसका इलाज न हो, तो यह शरीर के अन्य अंगों में फैल सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। यह अलग-अलग टाइप का होता है, जिसमें सबसे आम हैं - स्तन कैंसर, फेफड़े का कैंसर, लिवर कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और ब्लड कैंसर।
आम तौर पर ईन कारणों से कैंसर होता है -
ईन आयुर्वेदिक और देसी तरीकों से कैंसर का ईलाज करने में मदद मिल सकती है -
1. कैंसर में गिलोय का उपयोग (Tinospora Cordifolia): गिलोय को आयुर्वेद में "अमृता" कहा जाता है। यह एक पावरफुल दवाई है जो शरीर में रोग से लड़ने की ताकत बढ़ाती है। गिलोय का रस या चूर्ण रोज सुबह खाली पेट लिया जा सकता है। यह शरीर से ज़हरीले तत्व बाहर निकालता है और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद करता है।
2. गोमूत्र (गाय का मूत्र): ये विवादित लेकिन लोकप्रिय इलाज है। कुछ आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि शुद्ध और देशी गाय का मूत्र कैंसर के खिलाफ काम करता है। आयुर्वेद में सुबह खाली पेट 10–15 ml गोमूत्र लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन मूत्र केवल स्वस्थ गाय का ही लें।
3. अश्वगंधा (Withania Somnifera): यह एनर्जी बूस्ट करती है और तनाव कम करने वाली दवाई है। इसे चूर्ण या कैप्सूल के रूप में लें। अश्वगंधा शरीर को ऊर्जा देता है और कैंसर थेरेपी से थके हुए शरीर को पुनर्जीवित करता है।
4. हल्दी (Turmeric / Curcumin): हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है जो एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-कैंसर गुणों से भरपूर होता है। एक चम्मच हल्दी को गर्म दूध या शहद के साथ लें। कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।
5. विटामिन-सी वाले देसी फल: नींबू, आंवला, अमरूद - ये सभी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं। रोज सुबह आंवला या नींबू पानी का सेवन करें क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं।
कैंसर के उपचार में ईन आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है जो शरीर को शुद्ध करने और ज़हरीले तत्वों को बाहर निकालने के लिए सहायक है -
ईन पारंपरिक नुस्खों से कैंसर का ईलाज करने में मदद मिल सकती है -
गेहूं के जवारे का रस (Wheatgrass Juice): यह कैंसर के मरीजों में खून बढ़ाने और शरीर की सफाई करने में मदद करता है। इसे 30 ml रोज़ खाली पेट लें।
कैंसर नाशक काढ़ा: नीम की पत्ती, गिलोय, हल्दी, तुलसी, अदरक - ईन सभी को 2-3 गिलास पानी में उबालें और 1 गिलास रहने पर छानकर पिएं। यह काढ़ा शरीर को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की ताकत देता है।
लहसुन (Garlic): इसे कैंसर की रामबाण देसी दवा माना जाता है। सुबह खाली पेट एक या दो कली कच्ची लहसुन चबाएं। इसमें सल्फर कंपाउंड्स होते हैं जो ट्यूमर सेल्स को नष्ट करते हैं।
कैंसर (Cancer) एक गंभीर बीमारी है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और आसपास के ऊतकों या अन्य अंगों तक फैल सकती हैं। आयुर्वेद में कैंसर से जुड़े मरीजों का उपचार रोगी की प्रकृति, कैंसर के प्रकार, स्टेज, लक्षणों की गंभीरता तथा संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन करने के बाद व्यक्तिगत रूप से तय किया जाता है जो कैंसर के इलाज में मदद कर सकता है।
रोगी की स्थिति के अनुसार कर्मा आयुर्वेदा में आयुर्वेदिक आहार, विहार, औषधियों और पंचकर्म आदि तरीकों की मदद से कैंसर को दूर करने पर ज़ोर दिया जाता है। सभी उपचार प्रत्येक मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होते और उनका चयन चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। आयुर्वेदिक उपचार को आधुनिक कैंसर उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
कैंसर के मरीजों के लिए ऐसा भोजन उपयोगी माना जाता है जो ताज़ा, हल्का, संतुलित और पोषण से भरपूर हो। मौसमी सब्जियां, ताज़े फल (रोगी की स्थिति के अनुसार), साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त प्रोटीन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार स्वस्थ वसा को आहार में शामिल किया जा सकता है।
यदि मरीज को भूख कम लग रही है, स्वाद में बदलाव या कमजोरी महसूस करता है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन लेने की सलाह दी जा सकती है।
अत्यधिक तला-भुना भोजन, जंक फूड, पैकेज्ड फूड, अधिक चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त पानी पीना और पोषण की कमी से बचना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
यदि मरीज को डायबिटीज, किडनी रोग, लिवर रोग या अन्य कोई बीमारी है, तो उसकी डाइट उसी के अनुसार संशोधित की जाती है।
आयुर्वेद में नियमित जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण भाग माना गया है। पर्याप्त नींद, तनाव को कम करना और नियमित दिनचर्या संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।
रोगी की क्षमता के अनुसार हल्की वॉक, चिकित्सक द्वारा सुझाए गए योगासन, प्राणायाम और हल्की फिजिकल एक्टिविटी की जा सकती है। आयुर्वेदिक जीवनशैली के अंतर्गत चिकित्सक की सलाह के अनुसार अनुलोम-विलोम, गहरी श्वास, ध्यान (Meditation) तथा हल्के योग अभ्यास किए जा सकते हैं। इनका उद्देश्य मानसिक शांति, तनाव कम करना और समग्र स्वास्थ्य को सहयोग देना होता है। यदि मरीज अधिक कमज़ोर हो, तो किसी भी प्रकार का व्यायाम केवल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
धूम्रपान, तंबाकू और शराब से पूरी तरह दूरी बनाना, संक्रमण से बचाव, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना तथा नियमित फॉलो-अप कराना भी उपचार योजना का हिस्सा हो सकता है。
परिवार का सहयोग, सकारात्मक सोच और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी मरीज के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयुर्वेद में शमन चिकित्सा का उद्देश्य दोषों का संतुलन बनाए रखना तथा रोगी के समग्र स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) को सहयोग देना होता है। औषधियों का चयन कैंसर के प्रकार, रोगी की प्रकृति, चल रहे आधुनिक उपचार और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार किया जाता है।
कुछ पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां जिनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जा सकता है, उनमें अश्वगंधा, गिलोय (गुडूची), हल्दी, आंवला, तुलसी, शतावरी, यष्टिमधु, गुग्गुल तथा त्रिफला शामिल हैं। इनका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
कौन-सी औषधि किस मरीज के लिए उपयुक्त होगी, यह केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक ही तय करते हैं। यदि मरीज कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या अन्य दवाएं ले रहा है, तो किसी भी आयुर्वेदिक औषधि को शुरू करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर और आयुर्वेदिक चिकित्सक दोनों से सलाह लेना आवश्यक है।
कैंसर के सभी मरीजों को एक जैसी पंचकर्म थेरेपी नहीं दी जाती। उपचार का चयन कैंसर के प्रकार, स्टेज, रोगी की ताकत, चल रहे इलाज और संपूर्ण चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। कई मरीजों में पंचकर्म उपयुक्त नहीं होता।
अभ्यंग (Abhyang)
रोगी की स्थिति के अनुसार औषधीय तेलों से हल्की मालिश की जा सकती है। इसका उद्देश्य शरीर को आराम देना तथा मांसपेशियों को सहयोग देना होता है।
स्वेदन (Swedan)
कुछ मरीजों में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार हल्का स्वेदन किया जा सकता है। यह उपचार सभी मरीजों के लिए आवश्यक या उपयुक्त नहीं होता।
शिरोधारा (Shirodhara)
यदि मरीज तनाव, चिंता या नींद की समस्या से परेशान है, तो चिकित्सक की सलाह के अनुसार शिरोधारा जैसी आयुर्वेदिक थेरेपी उपचार योजना का हिस्सा हो सकती है।
बस्ती (Basti)
आयुर्वेद में बस्ती को महत्वपूर्ण पंचकर्म माना गया है, लेकिन कैंसर के मरीजों में इसका उपयोग केवल चिकित्सकीय मूल्यांकन और विशेषज्ञ आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही किया जाता है।
विरेचन (Virechana)
यह आयुर्वेदिक शोधन प्रक्रिया केवल चुनिंदा मरीजों में और उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही की जा सकती है। यह सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होती।
कैंसर के मरीजों को अपने ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा बताई गई सभी जांचें समय पर करवानी चाहिए। कोई भी उपचार बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। यदि आयुर्वेदिक उपचार लिया जा रहा है, तो इसकी जानकारी अपने कैंसर विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक चिकित्सक दोनों को देना आवश्यक है ताकि उपचार सुरक्षित और समन्वित तरीके से किया जा सके।
कैंसर का आयुर्वेदिक उपचार प्रत्येक मरीज के लिए अलग होता है। पंचकर्म, औषधियां, आहार और जीवनशैली का चयन कैंसर के प्रकार, स्टेज, लक्षणों की गंभीरता, आयु, अन्य बीमारियों, चल रहे आधुनिक उपचार तथा संपूर्ण चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। आयुर्वेदिक उपचार को आधुनिक कैंसर उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, पंचकर्म या घरेलू उपाय को स्वयं शुरू करने के बजाय योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक और कैंसर विशेषज्ञ (Oncologist) से परामर्श लेना आवश्यक है।
कैंसर के कारण और इलाज के अलावा कुछ ज़रूरी सवाल और जानकारियाँ नीचे दी गयी हैं जो कैंसर रोग में फायदा पहुंचा सकती हैं।
कैंसर में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज खाएं और जंक फूड, ज्यादा मीठा और डीप फ्राइड फूड आदि न खाएं। इसके अलावा सिगरेट, शराब और तम्बाकू से भी दूर रहें।
इस पर क्लियर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन, एक स्टडी में पता चला है कि जिन रोगियों ने कीमोथेरेपी से इनकार कर दिया था या इसे बंद कर दिया था, उनके जीवन की क्वालिटी, उन रोगियों से अलग नहीं थी जिन्होंने उपचार पूरा किया था।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको कैंसर की देसी दवा के बारे में बताया। लेकिन आप सिर्फ़ ईन सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आपको या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को कैंसर रोग है तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से अपना इलाज करवा सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ऐसे ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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