जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती, तो बॉडी से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और कई serious समस्याएं पैदा हो जाती हैं जो आज के वक़्त में बहुत आम है। किडनी से जुड़ी इन्हीं समस्याओं को किडनी रोग (Kidney Disease) कहा जाता है जिसका आधुनिक इलाज या Allopathic इलाज ज्यादातर दवाओं, डायलिसिस और ट्रांसप्लांट जैसे खतरनाक तरीकों पर निर्भर होता है, जिनके बहुत से side effects भी हो सकते हैं। इसलिए, आजकल लोग आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज चाहते हैं, क्योंकि यह ज़्यादा safe, प्राकृतिक और side effects free होता है। इस इलाज में बिना डायलिसिस या ट्रांसप्लांट के किडनी को अंदर से ठीक किया जाता है।
आयुर्वेद में किडनी को वृक्क कहते हैं। किडनी का direct connection बॉडी के तीन दोषों – वात, पित्त और कफ से होता है। वात दोष बढ़ने से पेशाब में रुकावट, सूखापन और कमज़ोरी आती है, पित्त बढ़ने से जलन, सूजन और इंफेक्शन हो सकता है और कफ दोष बढ़ने से बॉडी में पानी जमा होने लगता है। आयुर्वेद मानता है कि किडनी रोग अचानक से नहीं होता, बल्कि यह लंबे वक़्त तक चले दोष असंतुलन का result होता है। जब digestion कमजोर होता है, तो बॉडी में आम (toxins) बनने लगते हैं। यही आम धीरे-धीरे किडनी के काम पर बुरा असर डालता है।
आयुर्वेद में किडनी का इलाज केवल रिपोर्ट सुधारने तक लिमिटेड नहीं होता, बल्कि इसमें बॉडी के पूरे system को अंदर से सुधार जाता है जिसके लिए ईन 5 तरीकों का इस्तेमाल ख़ासतौर पर किया जाता है –
सबसे पहले यह देखा जाता है कि रोगी में कौन-सा दोष ज़्यादा बढ़ा हुआ है। उसी के अनुसार इलाज तय किया जाता है। हर रोगी के लिए एक जैसा इलाज नहीं होता।
बॉडी में जमी गंदगी (toxins) को बाहर निकालना बहुत ज़रूरी होता है। इसके लिए आयुर्वेद में हर्बल दवाएं, पंचकर्म थेरेपी, हल्का और जल्दी पचने वाले भोजन का सहारा लिया जाता है।
आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो किडनी को सपोर्ट करती हैं, जैसे पुनर्नवा, गोक्षुर, वरुण, कुटकी, शिग्रु। ये जड़ी-बूटियाँ किडनी की सूजन कम करने, पेशाब के रास्ते साफ रखने और किडनी फंक्शन को सपोर्ट करने में मदद करती हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ़ अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेकर ही करना चाहिए।
पंचकर्म आयुर्वेद की एक ख़ास Detox Therapy है। किडनी रोग में हल्के और सुरक्षित पंचकर्म उपाय अपनाए जाते हैं, जैसे बस्ती थेरेपी, स्नेहन और स्वेदन। इससे बॉडी के अंदर जमा toxins बाहर निकलते हैं और किडनी पर load कम होता है।
किडनी रोग में आयुर्वेदिक डाइट दवा के जितना ही महत्व रखती है। आमतौर पर किडनी रोग में नीचे दी गई ईन चीज़ों को खाना चाहिए –
साथ ही किडनी रोग में ज़रूरी परहेज़ का ध्यान रखें और ईन चीज़ों का इस्तेमाल न करें –
आयुर्वेदिक इलाज एक नेचुरल प्रोसेस है, इसलिए इसमें समय लगता है। आमतौर पर कुछ महीनों में सुधार दिखने लगता है।
आयुर्वेदिक दवाओं के साइड इफेक्ट ना के बराबर होते हैं, अगर आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ली जाए।
क्योंकि गलत खाना किडनी पर direct असर डालता है। हल्का और आसानी से पचने वाला खाना किडनी को आराम देता है।
दोष संतुलन, सूजन कम करने वाली जड़ी-बूटियाँ और डाइट सुधार से सूजन को कंट्रोल किया जाता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको आयुर्वेद से किडनी रोग का इलाज बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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