बहुत से लोग नहीं जानते कि किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर – ये दोनों बीमारियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लंबे वक़्त तक हाई रहता है, तो यह किडनी की blood vessels को नुकसान पहुँचा सकता है। इससे किडनी तक खून का flow कम हो जाता है, किडनी की filter करने की क्षमता घटने लगती है और धीरे-धीरे CKD की स्थिति बन सकती है। Uncontrolled हाई BP किडनी फेल होने का एक बड़ा कारण भी बन सकता है। कई बार हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुँचाता है, तो कुछ मामलों में किडनी रोग की वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
शुरुआत में कोई ख़ास लक्षण नहीं दिखते। लेकिन वक़्त के साथ ये लक्षण दिख सकते हैं –
हेल्दी किडनी शरीर में खून की मात्रा को संतुलित रखती है, सोडियम और पानी को बाहर निकालती है, कुछ hormones बनाती है जो BP को कंट्रोल करते हैं। जब किडनी ठीक से काम करती है, तो ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है। लेकिन किडनी रोग की कन्डिशन में यह सिस्टम गड़बड़ा जाता है।
किडनी रोग में सबसे पहली दिक्कत होती है extra पानी शरीर से बाहर न निकल पाना, सोडियम का जमा होना। जब बॉडी में पानी और नमक ज़्यादा हो जाता है, तो खून की मात्रा बढ़ जाती है। ज़्यादा खून का मतलब blood vessels पर ज्यादा प्रेशर, और यही दबाव ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है। इसीलिए किडनी रोगियों को low-salt diet की सलाह दी जाती है।
किडनी एक ख़ास सिस्टम को कंट्रोल करती है जिसे Renin-Angiotensin System कहते हैं। यह सिस्टम ज़रूरत पड़ने पर BP बढ़ाता या घटाता है, blood vessels को सिकोड़ने या फैलाने का काम करता है। किडनी रोग में यह सिस्टम ज़रूरत से ज्यादा active हो जाता है। ऐसा होने पर नसें सिकुड़ जाती हैं, खून का प्रेशर बढ़ जाता है, ब्लड प्रेशर लगातार हाई रहने लगता है।
खराब किडनी खून से टॉक्सिन्स को ठीक से नहीं निकाल पाती। ये ज़हरीले तत्व नसों को कठोर बना देते हैं, blood flow पर असर डालते हैं। जब नसें सख्त हो जाती हैं, तो उनमें से खून गुजरने के लिए ज़्यादा प्रेशर चाहिए होता है, जिससे BP बढ़ जाता है।
किडनी रोग में अक्सर किडनी तक खून का flow कम हो जाता है। इसे देखकर बॉडी को लगता है कि BP कम है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। इस गलत signal की वजह से बॉडी ज्यादा hormones release करती है, BP बढ़ती है। यह प्रोसेस लंबे वक़्त तक चलने पर हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है।
कई किडनी रोगियों में पेशाब के साथ प्रोटीन निकलता है जिसे Proteinuria कहते हैं। इससे पता चलता है कि किडनी की filtering system खराब हो चुकी है। प्रोटीन लॉस के कारण blood vessels को नुकसान होता है, सूजन बढ़ती है और बी पी कंट्रोल से बाहर होने लगता है।
किडनी रोग में Erythropoietin hormone कम बनने लगता है, जिससे एनीमिया हो सकता है। एनीमिया की वजह से हार्ट को ज़्यादा काम करना पड़ता है और यह भी BP बढ़ने का एक कारण बनता है।
किडनी रोग में कफ दोष के कारण बॉडी में पानी जमा होता है, वात दोष के बिगड़ने से ब्लड फ्लो असंतुलित होता है, पित्त दोष बढ़ने से नसों में जलन और कठोरता आती है। इन तीनों दोषों के असंतुलन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
किडनी रोग एक लंबी चलने वाली बीमारी है। इससे रोगी में तनाव, डर और anxiety बढ़ती है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
आमतौर पर किडनी रोगियों के लिए BP 130/80 mmHg से कम रखना बेहतर होता है, लेकिन यह रोगी की कन्डिशन पर निर्भर करता है।
Regular ब्लड प्रेशर टेस्ट, सीरम क्रिएटिनिन, ब्लड यूरिया, पेशाब में प्रोटीन की जांच और जीएफआर टेस्ट ज़रूरी होते हैं।
आयुर्वेद बॉडी के दोषों को बैलेन्स करने, डाइट सुधारने और lifestyle ठीक करने पर ज़ोर देता है, जिससे BP और किडनी दोनों को सपोर्ट मिलता है।
नमक कम लें, BP नियमित जांचें, सही डाइट लें, वजन कंट्रोल रखें, स्ट्रेस कम करें और टाइम पर इलाज लें।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर का कनेक्शन बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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