आजकल हेल्दी रहने के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने की सलाह बहुत आम है। वजन घटाना हो या शरीर को डिटॉक्स करना हो, नींबू पानी का इस्तेमाल हर छोटी-बड़ी समस्या में किया जाता है। लेकिन, जब बात लिवर की हो तो एक गंभीर सवाल उठता है कि नींबू पानी लीवर के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक? जिसका जवाब नीचे दी गई जानकारी से स्पष्ट हो जाता है।
आयुर्वेद में लीवर को यकृत कहते हैं। यह बॉडी का एक बहुत ज़रूरी अंग है, जो खून की सफाई करता है और साथ ही डाइजेशन में मदद करता है, टॉक्सिन्स हटाता है और पोषक तत्वों को प्रोसेस करता है। आयुर्वेद के अनुसार लीवर पित्त दोष से जुड़ा होता है। जब पित्त संतुलन में रहता है, तब लीवर हेल्दी रहता है, लेकिन पित्त बढ़ने या बिगड़ने पर लीवर से जुड़ी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।
नींबू का स्वाद अम्ल (खट्टा) होता है। आयुर्वेद में अम्ल रस अग्नि को प्रदीप्त करता है, पाचन सुधारता है, भूख बढ़ाता है, लेकिन ज़्यादा मात्रा में अम्ल रस लेने से पित्त दोष बढ़ सकता है, जो लीवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए नींबू पानी को आयुर्वेद किसी औषधि की तरह देखता है, न कि किसी नॉर्मल ड्रिंक की तरह।
नीचे दी गई ईन ख़ास कन्डिशन में नींबू पानी लीवर के लिए फायदेमंद हो सकता है –
जिन लोगों का डाइजेशन कमजोर होता है, उनमें लीवर पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है। हल्का गुनगुना नींबू पानी, बहुत कम मात्रा में नींबू रस, डाइजेशन को ऐक्टिव कर सकता है, जिससे लीवर का काम आसान हो जाता है।
अगर फैटी लीवर की शुरुआत है और पित्त बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ा है, तो नींबू पानी का सेवन, लिमिट में और वह भी शहद के साथ कर सकते हैं। यह मेटाबॉलिज़्म सुधारने में मदद करता है।
आयुर्वेद के हिसाब से जब बॉडी में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं, तब लीवर सुस्त हो जाता है। ऐसे में हल्का नींबू पानी, हफ्ते में 2 से 3 बार, शरीर को हल्का रखने में मदद कर सकता है।
नीचे दी गई कन्डिशन में नींबू पानी लाभकारी नहीं होता –
जिन लोगों में सीने में जलन, मुंह में छाले, ज़्यादा पसीना, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखाई दें उनके लिए नींबू पानी पित्त को और बढ़ाकर लीवर को नुकसान पहुँचा सकता है।
लीवर में सूजन या हेपेटाइटिस की कन्डिशन में नींबू का अम्लीय गुण, लिवर की कोशिकाओं को ट्रिगर कर सकता है। जिससे जलन और सूजन बढ़ सकती है।
रोज़ सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने की आदत लीवर की गर्मी बढ़ा सकती है, पित्त का बैलेन्स बिगड़ सकता है। यह आदत लंबे समय में नुकसान कर सकती है।
अगर नींबू पानी लेना है, तो आयुर्वेदिक विधि का पालन और नीचे दी गई बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है –
कुछ लोगों में शहद के साथ लिमिट में नींबू पानी लाभकारी हो सकता है, लेकिन यह सबकी प्रकृति पर डिपेंड करता है।
नहीं, सूजन की अवस्था में अम्लीय चीज़ें लीवर को और ट्रिगर कर सकती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार आंवला पानी लीवर के लिए ज़्यादा सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।
यह पित्त असंतुलन, जलन और लीवर पर एक्स्ट्रा दबाव डाल सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि नींबू पानी लीवर के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को लीवर की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से लीवर की बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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