हमारी किडनी एक silent worker है, जो दिन-रात खून साफ करती रहती है। लेकिन जब किसी वजह से पेशाब का रास्ता block हो जाता है और पेशाब किडनी में ही जमा होने लगता है, तब किडनी फूलने लगती है। इसी condition को मेडिकल भाषा में Hydronephrosis यानी किडनी में सूजन कहते हैं। अगर Hydronephrosis का इलाज लंबे वक़्त तक ना किया जाए तो किडनी की filtering capacity धीरे-धीरे घट सकती है। इसलिए, शुरुआती stage में diagnosis और किडनी में सूजन (Hydronephrosis) का इलाज करना बहुत ज़रूरी होता है।
Hydronephrosis का सबसे बड़ा कारण है पेशाब के flow में रुकावट। जब पेशाब किडनी से bladder तक आसानी से नहीं पहुँच पाता, तो वह पीछे की ओर pressure बनाने लगता है। ऐसा आमतौर पर ईन कारणों से हो सकता है –
कई बार बच्चों में यह दिक्कत जन्म से भी हो सकती है। यह समस्या एक किडनी में भी हो सकती है और दोनों में भी।
शुरुआत में कई लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे सूजन बढ़ती है, बॉडी सिग्नल देने लगती है। ऐसे में ये लक्षण आम हैं –
अगर ऐसे symptoms बार-बार दिखें, तो ultrasound या दूसरी जांच ज़रूरी हो जाती है।
आयुर्वेद में किडनी को वृक्क (Vrikka) कहते हैं और पेशाब से जुड़ी समस्याओं को मूत्रवह स्रोतस के विकार के रूप में देखा जाता है। Hydronephrosis को आयुर्वेद में वात दोष (flow में रुकावट) और कफ दोष (सूजन और blockage) के असंतुलन से जोड़ा जाता है। जब वात सही दिशा में पेशाब को flow नहीं करने देता और कफ जमा होकर रुकावट पैदा करता है, तब किडनी में सूजन होने लगती है।
आयुर्वेद सिर्फ symptoms दबाने पर नहीं, बल्कि जड़ पर काम करता है। आयुर्वेदिक इलाज के ख़ास लक्ष्य होते हैं –
कुछ जड़ी-बूटियाँ किडनी हेल्थ के लिए जानी जाती हैं जैसे –
इनका सेवन हमेशा अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
किडनी में सूजन के दौरान सही diet और lifestyle रखना बहुत ज़रूरी होता है। इसलिए, हल्का, कम नमक वाला खाना खाएँ, उबली सब्ज़ियाँ और seasonal फल खाएँ, डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी पियें, वक़्त पर पेशाब करें। इसके अलावा कुछ चीज़ों का परहेज़ करें जैसे ज़्यादा नमक और junk food, बहुत spicy और fried चीज़ें। साथ ही painkillers का overuse न करें। कोई भी दवा बिना डॉक्टर से पूछे न लें। शराब और सिगरेट से दूर रहें।
हाँ, बच्चों में सही वक़्त पर इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।
आमतौर पर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, यूरिन टेस्ट और ब्लड टेस्ट किए जाते हैं।
हाँ, अगर कारण दोबारा पैदा हो जाए, जैसे पथरी बनना, तो यह फिर हो सकती है।
आयुर्वेदिक इलाज से सूजन कम करने और मूत्र मार्ग को साफ रखने में मदद मिल सकती है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी में सूजन का इलाज बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी में सूजन (Hydronephrosis) की बीमारी है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी में सूजन का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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