किडनी रोग (Kidney Disease) के रोगी अक्सर ये दो शिकायते करते हैं – हमेशा थकान महसूस होना और ठीक से नींद न आना। कई बार लोग सोचते हैं कि यह कमज़ोरी, उम्र या काम की वजह से है, लेकिन असल में इसका डायरेक्ट कनेक्शन किडनी की खराबी से होता है। इसलिए, किडनी रोग में थकान और नींद की समस्या के बारे में डीटेल में जानना चाहिए।
किडनी Erythropoietin (EPO) नाम का एक hormone बनाती है। यह hormone बॉडी में लाल रक्त कण (RBC) बनाने में हेल्प करता है। किडनी खराब होने पर EPO कम बनता है, जिससे खून की कमी हो जाती है और रोगी को जल्दी थकान लगती है, सांस फूल जाती है और बॉडी में भारीपन जैसी दिक्कतें होती हैं।
किडनी खून से गंदगी बाहर निकाल देती है। लेकिन किडनी खराब होने पर ये गंदगी बॉडी में जमा होने लगती है, जिससे हर वक़्त सुस्ती, काम में मन न लगना, दिमाग भारी रहना जैसी कन्डिशन बन जाती है।
किडनी रोगियों को कई चीज़ों से परहेज़ करना पड़ता है। सही पोषण न मिलने से भी बॉडी को पूरी energy नहीं मिल पाती, जिससे थकान बढ़ती है।
रात में बार-बार पेशाब लगना (Nocturia) किडनी के रोगियों की आम समस्या है। इससे नींद बार-बार टूटती है और गहरी नींद नहीं आ पाती।
कुछ रोगियों को सोते समय पैरों में झनझनाहट, खिंचाव या हिलाने की इच्छा होती है जिसे Restless Legs Syndrome कहा जाता है। यह किडनी रोग में अक्सर देखा जाता है।
किडनी की बीमारी अक्सर लंबे समय तक चलती है। भारी दवाइयाँ, reports और future को लेकर चिंता बनी रहती है। यह mental stress नींद पर बहुत असर डालता है।
लगातार थकान के कारण रोगी दिन में सो लेते हैं, जिससे रात की नींद खराब हो जाती है।
आयुर्वेद के हिसाब से किडनी रोग में थकान और नींद की समस्या ईन कारणों से हो सकती है –
किडनी रोग में वात दोष बढ़ जाता है जिससे बॉडी में कमजोरी, अनिद्रा (Insomnia), बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं। वात का कनेक्शन nervous system से होता है, इसलिए नींद पर सीधा असर पड़ता है।
कफ दोष बढ़ने से बॉडी में भारीपन, सुस्ती और आलस बढ़ता है। इससे रोगी हर समय थका-थका महसूस करता है।
ओज को बॉडी की immunity और energy का आधार माना गया है। किडनी रोग में ओज कमज़ोर हो जाता है, जिससे ताकत की कमी, मन उदास रहना, नींद न आना जैसी दिक्कतें बढ़ती हैं।
शरीर में ज़हर बढ़ने और लंबे इलाज के तनाव से दिमाग भी थक जाता है।
नहीं, बहुत ज्यादा सोने से रात की नींद और खराब हो सकती है। Balance ज़रूरी है।
जब थकान इतनी बढ़ जाए कि रोज़ का काम मुश्किल हो जाए या चक्कर आने लगें।
बिना डॉक्टर की सलाह नींद की दवा लेना नुकसान कर सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी रोग में थकान और नींद की समस्या के बारे में विस्तार से बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग है और थकान और नींद की समस्या तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग, थकान और नींद की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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