क्रिएटिनिन बढ़ने का बड़ा नुकसान ये है कि अगर इसे ignore किया जाए तो यह धीरे-धीरे गंभीर किडनी डैमेज तक ले जा सकता है। इसका बढ़ना इस बात का संकेत है कि आपकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है और बॉडी से waste material बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
क्रिएटिनिन एक वेस्ट प्रोडक्ट है। यह मसल्स की एक्टिविटी से बनता है। यह खून के ज़रिए किडनी तक जाता है और फिर यूरिन के माध्यम से बाहर निकलता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो क्रिएटिनिन बॉडी में जमा होने लगता है और इसका लेवल खून में बढ़ जाता है।
क्रिएटिनिन बढ़ना सिर्फ एक रिपोर्ट का नंबर नहीं है, बल्कि यह आपकी किडनी हेल्थ का बड़ा लक्षण है। इसके कई नुकसान हो सकते हैं –
| ट्रीटमेंट प्रकार | कैसे काम करता है | फायदे | Avoid / Risk |
| एलोपैथिक दवाइयां | किडनी फंक्शन को सपोर्ट करती हैं | जल्दी असर | साइड इफेक्ट, लंबे वक़्त तक निर्भरता |
| डायलिसिस | खून को मशीन से साफ किया जाता है | तुरंत राहत | महंगा, बार-बार करना पड़ता है |
| किडनी ट्रांसप्लांट | नई किडनी लगाई जाती है | स्थायी समाधान | रिस्क, खर्च, लाइफटाइम दवाइयां |
| आयुर्वेदिक उपचार | जड़ी-बूटियों से किडनी को ठीक करना | नेचुरल, कम साइड इफेक्ट | सही डॉक्टर की जरूरत, धीमा असर |
अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से consult करना चाहिए –
आयुर्वेद में किडनी को अंदर से heal करने के लिए कई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जैसे गोखरू, पुनर्नवा, वरुण, गिलोय। ये जड़ी-बूटियां बॉडी से टॉक्सिन्स निकालने और किडनी के काम की capacity सुधारने में मदद करती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि कोई भी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। साथ ही क्रिएटिनिन कम करने के लिए डाइट से related ईन बातों का ध्यान रखें –
आम तौर पर 1.2 mg/dL से ऊपर का लेवल ध्यान देने योग्य होता है, और 2.0 से ज़्यादा होने पर खतरा बढ़ जाता है।
हाँ, बॉडी में पानी जमा होने से हाथ-पैर और चेहरे पर सूजन हो सकती है।
अगर लंबे time तक इलाज न हो तो किडनी फेलियर हो सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।
हल्की एक्सरसाइज फायदेमंद होती है, लेकिन ज़्यादा मेहनत क्रिएटिनिन को बढ़ा भी सकती है।
हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने क्रिएटिनिन बढ़ने के सही कारण (जैसे किडनी की कमजोरी, डिहाइड्रेशन, या गलत डाइट) की पहचान करने के बाद डॉक्टर द्वारा दी गई आयुर्वेदिक दवाइयों, संतुलित डाइट और सात्विक लाइफस्टाइल अपनाकर क्रिएटिनिन लेवल कम किया। साथ ही थकान, सूजन और पेशाब से जुड़ी समस्याओं में भी सुधार देखा गया। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन, किडनी फंक्शन और बीमारी की गंभीरता अलग होती है, इसलिए किसी भी दवा, घरेलू उपाय या आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले Nephrologist या योग्य डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको क्रिएटिनिन बढ़ने के नुकसान बताए। लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को क्रिएटिनिन बढ़ने की समस्या है या ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से क्रिएटिनिन बढ़ने की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ रोगी विशेष डाइट चार्ट प्लान भी मिलेगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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