सोरायसिस एक बहुत पुरानी स्किन डिज़ीज़ है, जिसमें स्किन बहुत सूखी, पपड़ीदार, लाल और खुजली वाली हो जाती है। कई रोगियों के लिए ड्राई स्किन सबसे बड़ी दिक्कत होती है, क्योंकि आगे चलकर यही सूखापन, खुजली, जलन, खून निकलना और इंफेक्शन का कारण बनती है। ऐसे में हर रोगी के मन में ये सवाल उठता है कि “सोरायसिस में ड्राई स्किन कैसे कंट्रोल करें?” जिसके बारे में जानकार सोरायसिस का प्राकृतिक उपचार किया जा सकता है। इस बारे में डीटेल में जानकारी नीचे दी गई है लेकिन, पहले ये भी समझ लेना चाहिए कि सोरायसिस में स्किन ड्राय होती क्यों है, ताकि जड़ से उपचार किया जा सके।
यह एक ऑटोइम्यून डिज़ीज़ है, जिसमें बॉडी का इम्यून सिस्टम स्किन की कोशिकाओं को ज़रूरत से ज़्यादा तेजी से बनाने लगता है। आमतौर पर नीचे दिए गए ईन कारणों से सोरायसिस में स्किन ड्राय होती है –
गलत तरीके से नहाने पर स्किन और ज़्यादा ड्राई हो जाती है। इसलिए, बहुत गर्म पानी से नहाना, ज्यादा देर तक नहाना और हार्श साबुन या स्क्रब का उपयोग करना बंद करें। इसके बजाय गुनगुने पानी से नहाएँ, 10-15 मिनट से ज्यादा न नहाएँ, माइल्ड, मेडिकेटेड या हर्बल साबुन का इस्तेमाल करें और तौलिये से रगड़कर न पोंछें।
सोरायसिस में स्किन की नेचुरल नमी खत्म हो जाती है। मॉइस्चराइज़र स्किन में नमी लॉक करता है और पपड़ी को नरम बनाता है। इसलिए, नहाने के तुरंत बाद, दिन में कम से कम 2 से 3 बार मॉइस्चराइज़र लगाएँ जो बिना खुशबू वाला और केमिकल-फ्री हो। नारियल तेल, एलोवेरा जेल, तिल का तेल, शिया बटर या कोकोआ बटर अच्छे प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र हैं।
स्किन की सेहत सीधे आपके खानपान से जुड़ी होती है। इसलिए, हरी सब्जियाँ जैसे पालक, लौकी, गाजर खाएँ। साथ ही मौसमी फल, ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली और सूजन कम करने वाले तत्व जैसे हल्दी, अदरक आदि लें। इसके साथ कुछ चीज़ों का परहेज़ भी ज़रूरी है जैस – तला-भुना और जंक फूड, ज़्यादा चीनी और नमक, शराब और धूम्रपान, पैकेज्ड फूड आदि।
ड्राई स्किन में खुजली होना नॉर्मल है, लेकिन खुजलाने से स्किन फटती है, इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है और सोरायसिस के पैच फैल सकते हैं। खुजली होने पर ठंडी पट्टी रखें, मॉइस्चराइज़र लगाएँ, क्रीम लगाएँ।
सर्दियों में ड्राई स्किन ज़्यादा बढ़ती है। ऐसे में ऊनी कपड़े सीधे स्किन पर न पहनें और कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें। गर्मियों में ज़्यादा पसीने से सोरायसिस बढ़ सकता है। इसलिए, स्किन साफ और सूखी रखें।
कम पानी पीने से बॉडी और स्किन दोनों डिहाइड्रेट हो जाते हैं। दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएँ। नारियल पानी और गुनगुना पानी भी फायदेमंद है। यह स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखता है और ड्राईनेस कम करता है।
स्ट्रेस सोरायसिस को बढ़ाने वाला ख़ास कारण है। इसलिए, योग-प्राणायाम, ध्यान, अच्छी नींद आदि तरीकों से स्ट्रेस कम करें।
आयुर्वेद सोरायसिस को सिर्फ़ स्किन की बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के दोषों का असंतुलन मानता है। पंचकर्म थेरेपी, हर्बल तेल से मालिश, जड़ी-बूटियों से बना लेप, शरीर की अंदरूनी सफाई आदि आयुर्वेदिक तरीकों से सोरायसिस में ड्राय स्किन को कंट्रोल किया जा सकता है।
फ्रैग्रेन्स-फ्री, केमिकल-फ्री और गाढ़े मॉइस्चराइज़र जैसे नारियल तेल, एलोवेरा जेल और कोकोआ बटर ज़्यादा असरदार माने जाते हैं।
हाँ, रोज़ हल्का तेल या मॉइस्चराइज़र लगाने से स्किन की नमी बनी रहती है और पपड़ी नरम होती है।
हाँ, बार-बार या बहुत देर तक नहाने से स्किन की नेचुरल नमी खत्म हो जाती है।
हाँ, एलोवेरा स्किन को ठंडक देता है और नमी बनाए रखने में हेल्प करता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि सोरायसिस में ड्राई स्किन कैसे कंट्रोल करें? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को सोरायसिस में ड्राई स्किन की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से सोरायसिस का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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