किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) ब्लड और कभी-कभी यूरिन से जुड़ी जांच होती है, जिससे पता चलता है कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। जब किडनी खराब होने के लक्षण नज़र आते हैं तो ऐसे में doctor किडनी की सेहत जांचने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट (Kidney Function Test – KFT) करवाने की सलाह देते हैं।
KFT टेस्ट का ख़ास उद्देश्य यह जानना होता है कि किडनी बॉडी से गंदगी को सही तरीके से फिल्टर कर रही है या नहीं। आमतौर पर नीचे दिए गए ईन लक्षणों या कन्डिशन में डॉक्टर KFT टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं –
KFT एक ही टेस्ट नहीं है, बल्कि कई अलग-अलग जांचों का ग्रुप होता है। इनमें से कुछ ख़ास टेस्ट इस प्रकार हैं –
1. सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine)
क्रिएटिनिन body में मांसपेशियों से बनने वाला एक waste product है। हेल्दी किडनी इसे फिल्टर करके पेशाब के ज़रिए बाहर निकाल देती है। अगर खून में क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ जाता है, तो यह किडनी के कमजोर होने का लक्षण हो सकता है।
2. ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN)
यूरिया प्रोटीन के टूटने से बनता है। इसे भी किडनी बॉडी से बाहर निकालती है। अगर BUN का लेवल ज़्यादा हो जाए, तो यह किडनी की समस्या या डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है।
3. eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate)
यह एक बहुत ही ख़ास calculation होती है, जिससे यह पता चलता है कि किडनी प्रति मिनट कितना खून फिल्टर कर रही है। अगर eGFR कम होता है, तो यह किडनी फंक्शन में कमी का लक्षण देता है।
4. यूरिक एसिड
यूरिक एसिड body में बनने वाला एक और waste product है। इसका लेवल ज़्यादा होने पर किडनी पर प्रेशर बढ़ सकता है और पथरी (kidney stone) का खतरा भी बढ़ जाता है।
5. Electrolytes Test
इसमें सोडियम (Sodium), पोटैशियम (Potassium) और क्लोराइड जैसे मिनरल्स का test होता है। किडनी इन सभी मिनरल्स का balance बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आमतौर पर किडनी फंक्शन टेस्ट ब्लड सैंपल से किया जाता है। लैब में खून का sample लेकर उसमें क्रिएटिनिन, यूरिया और अन्य तत्वों की जांच की जाती है। कुछ मामलों में डॉक्टर यूरिन टेस्ट (Urine Test) भी करवाते हैं, जिससे यह पता चलता है कि पेशाब में प्रोटीन, खून या दूसरे असामान्य पदार्थ तो नहीं हैं। यह test सामान्य और सुरक्षित होता है और इसमें ज़्यादा समय भी नहीं लगता।
कुछ लोगों को regularly यह टेस्ट करवाने का सुझाव दिया जाता है, जैसे:
आयुर्वेद में किडनी को मूत्रवह स्रोत (Mutravaha Srotas) का ख़ास हिस्सा माना जाता है। जब बॉडी में दोषों (वात, पित्त, कफ) का balance बिगड़ जाता है, तो मूत्र प्रणाली पर असर पड़ सकता है। ज़्यादातर यह गलत diet, ज़्यादा नमक, तला-भुना खाना, कम पानी पीना और खराब लाइफस्टाइल की वजह से होता है। ये सब किडनी को कमजोर कर सकते हैं।
किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में कुछ प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं, जैसे –
कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ जैसे पुनर्नवा, गोक्षुर और वरुण को किडनी के लिए फायदेमंद होती हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से पूछकर ही करना चाहिए।
ज़्यादातर cases में फास्टिंग जरूरी नहीं होती, लेकिन कुछ लैब या डॉक्टर ख़ास condition में फास्टिंग की सलाह दे सकते हैं।
क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ना किडनी के कमजोर होने या फिल्टरिंग क्षमता कम होने का लक्षण हो सकता है।
यूरिया ज़्यादा होने पर शरीर में थकान, उल्टी, भूख कम लगना और किडनी की समस्या का लक्षण मिल सकता है।
यह एक गणना होती है जो बताती है कि किडनी कितनी तेजी से खून को फिल्टर कर रही है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि ‘किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) क्या है?’ लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी से जुड़ी कोई समस्या है या किडनी की बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी की हर समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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