कमज़ोरी होने पर अक्सर लोगों को लगता है कि ये एक नॉर्मल समस्या है और कई बार इसे दूर करने के लिए लोग एनर्जी बढ़ाने वाली चीज़ों का सेवन कर लेते हैं लेकिन, अक्सर उन्हें ये पता नहीं होता कि कमज़ोरी का एक कारण डायबिटीज़ भी हो सकता है। ऐसे में कई बार बाज़ार की एनर्जी ड्रिंक्स और फूड आइटम्स उल्टा नुकसान करते हैं और समस्या को बढ़ा सकते हैं। सही इलाज न किया जाए तो किडनी, हार्ट, हाथ-पैरों की नसें आदि अंगों को भारी नुकसान भी पहुँच सकता है इसलिए, ये ज़रूर जानें कि डायबिटीज़ में कमज़ोरी क्यों होती है? ताकि कमज़ोरी और डायबिटीज़ दोनों का एक साथ सही ट्रीटमेंट लिया जा सके। आप चाहें तो डायबिटीज़ की बीमारी का सुरक्षित और आयुर्वेदिक उपचार कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल से भी ले सकते हैं लेकिन, पहले बीमारी की पूरी जानकारी लें जो नीचे दी गई है।
नीचे दिए गए लक्षणों से पता लगाया जा सकता है कि रोगी को नॉर्मल कमज़ोरी है या इसकी वजह डायबिटीज़ है –
डायबिटीज़ में या तो इंसुलिन कम बनता है या बॉडी उसका ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाती। इससे ब्लड में शुगर बढ़ जाती है, लेकिन कोशिकाओं को एनर्जी नहीं मिलती जिससे बॉडी थका-थका और कमज़ोर महसूस करती है।
ब्लड शुगर के बढ़ने से बॉडी एक्स्ट्रा शुगर को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करती है। इससे बार-बार पेशाब आता है, बॉडी में पानी की कमी होती है और कमज़ोरी, चक्कर, सुस्ती महसूस होती है।
डायबिटीज़ कंट्रोल न होने पर बॉडी एनर्जी पाने के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देती है। इससे वजन कम जो जाता है, मांसपेशियां कमज़ोर होती हैं और बॉडी का एनर्जी लेवल कम हो जाता है।
डायबिटीज़ की कुछ दवाएँ लंबे समय तक लेने पर Vitamin B12 या Iron की कमी हो सकती है। जिससे हाथ-पैरों में झनझनाहट, थकान, कमज़ोरी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
हाई शुगर का बूरा असर नसों पर पड़ता है, नसें कमजोर होने लगती हैं। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं जिससे पैरों में कमज़ोरी, जलन, सुन्नपन, चलने में दिक्कत हो सकती है।
हाई शुगर से रात में प्यास ज़्यादा लगती है, बार-बार पेशाब आता है और बीच-बीच में नींद टूट जाती है जो कमज़ोरी महसूस होने का एक ख़ास कारण है।
डायबिटीज़ में थायरॉयड की बीमारी होने का खतरा ज़्यादा होता है। इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं जिसमें थकान, वजन बढ़ना, सुस्ती आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।
खून का फ्लो कम होने और नर्व डैमेज के कारण पैरों में दर्द, जलन और कमज़ोरी होती है।
आयुर्वेद में डायबिटीज़ को मधुमेह कहते हैं, जिसका इलाज खान-पान में सुधार, हर्बल औषधियां, पंचकर्म और रूटीन में बदलाव करके किया जाता है।
जामुन बीज, गुड़मार, करेले का रस, मेथी दाना और त्रिफला डायबिटीज़ की सबसे असरदार दवाएँ हैं, जो शरीर में शुगर संतुलन बनाए रखती हैं।
पंचकर्म बॉडी से टॉक्सिन हटाकर मेटाबॉलिज़्म सुधारता है, जिससे ग्लूकोज़ को कंट्रोल किया जा सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि डायबिटीज़ में कमज़ोरी क्यों होती है? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को डायबिटीज़ की समस्या है या कमज़ोरी के लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से डायबिटीज़ का असरदार आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको प्राकृतिक इलाज के साथ-साथ डायबिटीज़ में कमज़ोरी दूर करने वाला हेल्दी डाइट चार्ट और ज़रूरी परामर्श भी दिया जाएगा। हेल्थ से जुड़े ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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