गलत लाइफस्टाइल और डाइट की वजह से लिवर की बीमारियाँ आजकल बढ़ती जा रही हैं। इनमें एक बहुत आम बीमारी है, लिवर सूजन, जिसे हेपेटाइटिस भी कहते हैं। इस बीमारी में लिवर के टिश्यू में जलन या सूजन होती है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है खराब डाइट। ख़ासकर ये जानना बहुत ज़रूरी है कि लिवर सूजन में क्या नहीं खाना चाहिए ताकि इसके इलाज में आसानी हो सके। लेकिन पहले इस बीमारी के बारे में आम जानकारी लेनी चाहिए जो नीचे दी गयी हैं।
आम तौर पर ईन कारणों से लिवर में सूजन हो सकती है –
लिवर की सूजन होने पर आम तौर पर आपको ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं –
लिवर की सूजन में सही खान-पान बहुत ज़रूरी है खासकर उन चीज़ों का पता होना चाहिए जिनका लिवर की सूजन में परहेज़ करना होता है। ईन चीज़ों में ख़ास हैं –
शराब: शराब लिवर की सूजन को बढ़ा सकती है।
तली हुई चीज़ें: इनमें फैट और कैलोरी ज़्यादा होती है, जो लिवर पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालती है।
प्रोसेस्ड मीट: जैसे रेड मीट, यह भी लिवर के लिए हानिकारक हो सकता है।
मीठे स्नैक्स और ड्रिंक्स: सोडा, कैंडी, कुकीज़, और फलों के रस में चीनी ज़्यादा होती है, जो लिवर में फैट बढ़ा सकती है।
ज़्यादा फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स: पनीर, मक्खन जैसे ज़्यादा फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स से बचें।
ज्यादा नमक: बहुत अधिक नमक खाने से शरीर में पानी जमा हो सकता है, जो लिवर पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालता है।
ज़्यादा चीनी: इससे फैटी लिवर रोग हो सकता है
जंक फूड, फास्ट फूड, और मसालेदार खाने से भी बचना चाहिए, खासकर अगर आपको लिवर में इन्फेक्शन या सूजन है।
लिवर में सूजन के कारण, लक्षण और परहेज़ के अलावा इस बीमारी से जुड़े कुछ और ख़ास सवाल और जानकारियाँ नीचे दी गयी हैं जो रोगी को फायदा पहुंचा सकती हैं।
लिवर में सूजन (Liver Inflammation) एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर सामान्य से अधिक प्रभावित हो जाता है। इसके पीछे फैटी लिवर, वायरल हेपेटाइटिस, शराब का अधिक सेवन, कुछ दवाओं का प्रभाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं कारण हो सकती हैं। आयुर्वेद में लिवर सूजन का उपचार रोगी की प्रकृति, सूजन के कारण, लक्षणों की गंभीरता तथा संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन करने के बाद व्यक्तिगत रूप से तय किया जाता है।
रोगी की स्थिति के अनुसार कर्मा आयुर्वेदा में आयुर्वेदिक चिकित्सक आहार, विहार, औषधियों और पंचकर्म जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों का संयोजन सुझा सकते हैं। सभी उपचार प्रत्येक मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होते और उनका चयन चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
लिवर सूजन के मरीजों के लिए ऐसा भोजन उपयोगी माना जाता है जो हल्का, ताज़ा, संतुलित और आसानी से पचने वाला हो। हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल (चिकित्सकीय सलाह के अनुसार), साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन रोगी की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है।
अत्यधिक तला-भुना भोजन, जंक फूड, पैकेज्ड फूड, अधिक चीनी, अधिक तेल-मसाले वाला भोजन और शराब का सेवन पूरी तरह बंद या सीमित रखने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी लिवर के सामान्य कार्य को सहयोग देने में मदद कर सकता है।
यदि मरीज को डायबिटीज, मोटापा, किडनी रोग, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य कोई बीमारी है, तो उसकी डाइट उसी के अनुसार संशोधित की जाती है।
आयुर्वेद में नियमित जीवनशैली को उपचार का महत्वपूर्ण भाग माना गया है। समय पर सोना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना जाता है।
रोज़ाना हल्की वॉक, चिकित्सक द्वारा सुझाए गए योगासन, प्राणायाम और नियमित फिजिकल एक्टिविटी समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती है।
वजन को नियंत्रित रखना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना तथा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं या सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन न करना भी उपचार योजना का हिस्सा हो सकता है। आयुर्वेदिक जीवनशैली के अंतर्गत चिकित्सक की सलाह के अनुसार भुजंगासन, वज्रासन, मकरासन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी तथा गहरी श्वास संबंधी अभ्यास किए जा सकते हैं। इनका उद्देश्य समग्र स्वास्थ्य और पाचन क्रिया को सहयोग देना होता है।
यदि मरीज को वायरल हेपेटाइटिस जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी सावधानियों का पालन करना आवश्यक होता है।
आयुर्वेद में शमन चिकित्सा का उद्देश्य दोषों का संतुलन बनाए रखना तथा लिवर के सामान्य कार्य को सहयोग देना होता है। औषधियों का चयन रोगी की स्थिति, सूजन के कारण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार किया जाता है।
कुछ पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां जिनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जा सकता है, उनमें भूम्यामलकी, कालमेघ, कुटकी, पुनर्नवा, गिलोय (गुडूची), त्रिफला, हल्दी, आंवला, भृंगराज तथा दारुहरिद्रा शामिल हैं। इनका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
यदि मरीज पहले से एलोपैथिक दवाएं ले रहा है, तो आयुर्वेदिक औषधियों का चयन उसी के अनुसार किया जाता है। कौन-सी औषधि किस मरीज के लिए उपयुक्त होगी, यह केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक ही तय करते हैं।
लिवर सूजन के सभी मरीजों को एक जैसी पंचकर्म थेरेपी नहीं दी जाती। उपचार का चयन सूजन के कारण, रोग की अवस्था, रोगी की ताकत, आयु तथा अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
मृदु विरेचन (Mridu Virechana)
यह विरेचन की अपेक्षाकृत सौम्य आयुर्वेदिक शोधन प्रक्रिया है। रोगी की स्थिति, पाचन शक्ति और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार इसका चयन किया जा सकता है। इसका उद्देश्य आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार दोष संतुलन का समर्थन करना होता है。
पिझिचिल (Pizhichil)
इस थेरेपी में गुनगुने औषधीय तेल की लगातार धार के साथ पूरे बॉडी की विशेष तकनीक से मालिश की जाती है। रोगी की आवश्यकता के अनुसार इसका उपयोग आराम देने, रक्त संचार को सहयोग देने तथा समग्र स्वास्थ्य को समर्थन देने के लिए किया जा सकता है।
अभ्यंग (सर्वांग) – Abhyang (Sarvang)
इस थेरेपी में औषधीय तेलों से पूरे बॉडी की मालिश की जाती है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों को आराम देना, रक्त संचार को सहयोग देना तथा बॉडी को रिलैक्स महसूस कराना होता है। उपचार का चयन केवल चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
लिवर सूजन के मरीजों को समय-समय पर LFT (Liver Function Test), अल्ट्रासाउंड तथा डॉक्टर द्वारा सुझाई गई अन्य जांचें करवाते रहना चाहिए। यदि मरीज को पीलिया, तेज़ पेट दर्द, लगातार उल्टी, तेज़ बुखार या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि मरीज पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहा है, तो उसे बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करना चाहिए।
Note: लिवर सूजन का आयुर्वेदिक उपचार प्रत्येक मरीज के लिए अलग होता है। पंचकर्म, औषधियां, आहार और जीवनशैली का चयन सूजन के कारण, लक्षणों की गंभीरता, आयु, अन्य बीमारियों और संपूर्ण चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, पंचकर्म या घरेलू उपाय को स्वयं शुरू करने के बजाय योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
अरबी, भिंडी, और बैंगन का लिवर सूजन में परहेज़ करना चाहिए। साथ ही टमाटर, मिर्च, और आलू से भी कुछ लोगों में लिवर सूजन हो सकती है इसलिए, इन्हें लिमिटेड खाएं या न खाएं।
इसमें एक राय नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि दूध में प्रोटीन और अमीनो एसिड होते हैं जो लिवर को ठीक करने में मदद करते हैं। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि फैटी लिवर के मरीजों को दूध नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे सूजन और फैट की समस्या बढ़ सकती है।
बहुत ज़्यादा फ्रुक्टोज (fructose) या ज़्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स (high glycemic index) वाले फल नहीं खाने चाहिए जैसे – आम, अंगूर, और लीची।
पी सकते हैं, लेकिन लिमिटेड अमाउंट में।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बाताया कि लिवर सूजन में क्या नहीं खाना चाहिए। लेकिन आप सिर्फ़ ईन सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आपको या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को लिवर में सूजन की समस्या है तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से अपना इलाज करवा सकते हैं। हेल्थ से जुड़े ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
Clinical Experience: हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने लिवर की सूजन का आयुर्वेदिक उपचार, उचित डाइट और जीवनशैली में बदलाव अपनाकर राहत पाई। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन और लिवर की सूजन की गंभीरता अलग होती है, इसलिए किसी भी तरह के इलाज या डाइट प्लान को अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
Medical Review: यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
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