Arthritis यानी गठिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें जोड़ों में दर्द, सूजन, जकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत होती है। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या ज़्यादा देखने को मिलती है, लेकिन आजकल young लोगों में भी arthritis की बीमारी आम है। ऐसे में, Arthritis के दर्द को कम करने के लिए लोग अक्सर Heat therapy (गरम सेक) और Ice therapy (ठंडी सिकाई) का इस्तेमाल घरेलू उपचार के रूप में करते हैं। लेकिन ज़्यादातर लोगों को यह confusion रहती है कि “Arthritis में Heat या Ice – कब क्या इस्तेमाल करें?” जिसकी विस्तार से जानकारी नीचे शेयर की गई है।
Heat therapy का मतलब है – जोड़ों पर गरमाहट देना। गरम पानी से सेंक Hot water bag, गरम तौलिया, Electric heating pad आदि गरमाहट देने के तरीके हैं। Heat देने से मांसपेशियाँ relax होती हैं, blood circulation बढ़ता है और जकड़न कम होती है।
Heat therapy ज़्यादातर तेज़ दर्द और जकड़न में ज़्यादा फायदेमंद मानी जाती है। Heat का इस्तेमाल तब करें जब जोड़ों में जकड़न हो, सुबह उठते समय joints बहुत tight लगें, लंबे वक़्त से चल रहा दर्द हो या ठंड के मौसम में pain बढ़ जाता हो।
Heat से joints के आसपास की muscles soft होती हैं, जिससे movement आसान हो जाती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस के रोगियों को सुबह गरम सेक करने से काफी राहत मिलती है। लेकिन ध्यान रखें – 15 से 20 मिनट से ज़्यादा सेक न करें, बहुत ज़्यादा गरम न करें और दिन में 1 से 2 बार ही करें।
Ice therapy का मतलब है – ठंडी सिकाई। इसमें ice pack या ठंडे पानी से सेंक की जाती है। Ice therapy सूजन और inflammation को कम करने में मदद करती है।
Ice therapy ज़्यादातर तेज़ दर्द और inflammation में उपयोगी होती है। Ice का इस्तेमाल तब करें जब जोड़ों में सूजन हो, जोड़ गरम महसूस हो, Exercise या walking के बाद दर्द बढ़ गया हो या अचानक दर्द तेज़ बढ़ जाए।
Ice नसों को थोड़ी देर के लिए सुन्न कर देती है, जिससे दर्द का signal कम हो जाता है। बस ध्यान रखें – Ice को सीधे स्किन पर न रखें; इसे कपड़े में लपेटें और 10 से 15 मिनट से ज़्यादा न लगाएँ, दिन में 2 से 3 बार लगाया जा सकता है।
कुछ cases में contrast therapy यानी heat और ice दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह तभी करना चाहिए जब डॉक्टर इसकी सलाह दें। गलत तरीके से दोनों का इस्तेमाल करने से दर्द ज़्यादा बढ़ भी सकता है।
आयुर्वेद में arthritis को मुख्य रूप से वात दोष से जोड़ा जाता है। वात का गुण होता है – ठंडा, सूखा और चलायमान। वात बढ़ने से joints में दर्द, जकड़न और cracking sound आती है। ठंड और नमी भी arthritis को और बिगाड़ सकती है
आयुर्वेद में गरम सेक, स्नेहन (oil massage) और स्वेदन (sudation therapy) का बहुत इस्तेमाल किया जाता है। Heat वात को शांत करती है, Joint की जकड़न कम करती है और Pain relief में मदद करती है। इसीलिए आयुर्वेद में arthritis के रोगियों को अक्सर गरम तेल से मालिश और हल्की गर्माहट दी जाती है।
आयुर्वेद में बहुत ज़्यादा ठंड को आमतौर पर avoid किया जाता है, खासकर जिनमें वात दोष ज़्यादा हो। लेकिन जब joint में बहुत ज़्यादा सूजन, लाली और जलन हो तब थोड़े वक़्त के लिए ठंडक दी जा सकती है। क्रोनिक arthritis में Heat ज़्यादा फायदेमंद होती है जबकि तेज़ सूजन और inflammation में कम समय के लिए Ice therapy दी जाती है।
रूमेटॉइड गठिया में ice सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती है।
गरम पानी की थैली या warm towel से 15 से 20 मिनट तक सेंक करें, दिन में 1 से 2 बार।
अगर घुटने में सूजन है तो ice, और अगर जकड़न या पुराना दर्द है तो heat लगानी चाहिए।
ठंड में joints और muscles सख्त हो जाते हैं, heat उन्हें गर्म रखती है और दर्द कम करती है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि Arthritis में Heat या Ice – कब क्या इस्तेमाल करें? लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को Arthritis है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से Arthritis का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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