ज़्यादा शुगर खाने से अग्न्याशय को लगातार इंसुलिन बनाना पड़ता है ताकि ग्लूकोज़ (शुगर) को कोशिकाओं तक पहुंचाया जा सके। डायबिटीज़ में अग्न्याशय कम इंसुलिन बनाता है या बॉडी ठीक से इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाती। इससे शुगर खून में जमा होने लगती है जिसे मधुमेह की बीमारी भी कहा जाता है। शुगर को कंट्रोल करना मधुमेह के उपचार में बहुत ज़रूरी है। इसलिए, इस बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए कि “डायबिटीज़ में शुगर कैसे कंट्रोल करें?” आप चाहें तो कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल से डायबिटीज़ का आयुर्वेदिक उपचार भी ले सकते हैं। लेकिन, पहले डायबिटीज़/मधुमेह के लक्षण जान लेने चाहिए ताकि बीमारी की पहचान जल्द हो सके।
प्लेट के 50% हिस्से में हरी सब्जियाँ रखें, 25% प्रोटीन लें जैसे दाल, पनीर, चना, राजमा आदि, 25% कॉम्प्लेक्स कार्ब्स लें जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस आदि। रोटी, गेहूं या मल्टीग्रेन की बनी खाएँ।
चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, चॉकलेट और मीठे फल जैसे आम, केला, लीची, चीकू, अंगूर आदि का परहेज़ करें या डॉक्टर से पूछकर लिमिट में खाएँ।
वॉक करने से ब्लड शुगर तुरंत कम होती है, इंसुलिन सेन्सिटिविटी बढ़ती है और वजन कंट्रोल होता है। इसलिए, रोज़ शाम को 15-20 मिनट वॉक करें।
रोज़ खाने के तुरंत बाद 10-15 मिनट चलने से शुगर को 60–80 mg/dL तक कम किया जा सकता है।
इससे शुगर एक साथ नहीं बढ़ती है। इसलिए, फाइबर वाली चीजें खाएँ जैसे – खीरा, टमाटर, गाजर, चिया सीड्स, अलसी, ओट्स और लिमिट में अंकुरित अनाज।
पानी बॉडी से एक्स्ट्रा शुगर बाहर निकालने में मदद करता है। दिन में 7-9 गिलास पानी पिएँ लेकिन, अगर पहले से किडनी की बीमारी हो तो डॉक्टर से पूछ कर ही पानी की मात्रा तय करें।
स्ट्रेस से शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है। इसलिए योग, ध्यान, प्राणायाम और हल्की म्यूज़िक थेरेपी आदि लेकर स्ट्रेस कम करें।
कम नींद लेने से शुगर और भूख बढ़ती हैं। इसलिए, रात में 7-8 घंटे ज़रूर सोएँ।
रात में 1 चम्मच मेथी भिगोकर सुबह उसका पानी पिएं।
सुबह खाली पेट आधा कप करेले का रस पियें क्योंकि इसमें इंसुलिन जैसा तत्व होता है जो शुगर कंट्रोल कर सकता है।
दालचीनी का पानी इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है। 1 गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर पिएँ।
अलसी के बीज में फाइबर और ओमेगा-3 होता है। इसलिए, सुबह दही/गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच अलसी पाउडर लें।
मल्टीग्रेन रोटी, बाजरा, ज्वार या रागी की रोटी बेहतर रहती है।
खाने के बाद 10-15 मिनट टहलें, सही मात्रा में पानी पिएं और हल्का खाना खाएँ।
हाँ, रोज़ 30 मिनट वॉक और हल्की एक्सर्साइज़ शुगर को तेजी से कंट्रोल करती है।
सरसों का तेल, जैतून का तेल और नारियल तेल बेहतर माने जाते हैं।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया, “डायबिटीज़ में शुगर कैसे कंट्रोल करें?” लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को डायबिटीज़ की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से डायबिटीज़ का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ डायबिटीज़ में ली जाने वाली सही डाइट की जानकारी और कंसल्टेंसी भी मिलेगी। हेल्थ से जुड़े ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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