किडनी की हेल्थ और उसके काम के लिए किडनी की साइज़ का भी बहुत अहम रोल होता है। यह शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है जिसका काम है – खून को साफ करना, शरीर से गंदे तत्व बाहर निकालना और पानी व मिनरल का संतुलन बनाए रखना। लेकिन, कई बार किसी कारण से किडनी का आकार छोटा होने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में Shrunken Kidney कहा जाता है। जब किडनी छोटी हो जाती है तो वह ठीक से काम नहीं कर पाती और बॉडी में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ऐसें में किडनी छोटी होने का कारण और इलाज ज़रूर जानना चाहिए। साथ ही इसके लक्षण और दूसरी ज़रूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए।
जब किडनी छोटी होने लगती है तो शरीर में कुछ लक्षण दिखने लगते हैं, जैसे:
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाएँ।
किडनी छोटी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ ख़ास कारण इस प्रकार हैं –
लंबे वक़्त से किडनी की बीमारी
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से किडनी की समस्या है और वक़्त पर इलाज नहीं हुआ, तो धीरे-धीरे किडनी सिकुड़ने लगती है।
हाई ब्लड प्रेशर
ज़्यादा समय तक हाई बीपी रहने से किडनी की नसों पर असर पड़ता है, जिससे किडनी कमजोर होकर छोटी हो सकती है।
डायबिटीज (मधुमेह)
ज़्यादा समय तक शुगर कंट्रोल में न रहने से किडनी डैमेज होने लगती है।
बार-बार यूरिन इंफेक्शन
बार-बार पेशाब में जलन, इंफेक्शन या पथरी की समस्या से भी किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
जन्मजात समस्या
कुछ लोगों में जन्म से ही एक या दोनों किडनी छोटी होती हैं।
गलत डाइट और कम पानी पीना
ज्यादा नमक, तला-भुना खाना और कम पानी पीने से भी किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
किडनी छोटी होने की जाँच के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट कराते हैं, जैसे:
इन जांचों से किडनी का साइज़ और उसकी काम करने की क्षमता का पता चलता है।
आयुर्वेद में किडनी को वृक्क नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार किडनी की बीमारी का ख़ास कारण होता है शरीर में वात, पित्त और कफ दोष का बिगड़ता बैलेन्स जो आमतौर पर ईन वजहों से होता है –
इन कारणों से शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन) जमा हो जाते हैं, जिससे किडनी कमजोर होने लगती है।
आयुर्वेद में किडनी को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और जीवनशैली पर ज़ोर दिया जाता है। किडनी छोटी होने की आयुर्वेदिक दवाओं के नाम नीचे दिए गए हैं जिनका इस्तेमाल अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर से पूछकर ही करना चाहिए –
1. पुनर्नवा
यह सूजन कम करती है और पेशाब की समस्या में राहत देती है।
2. गोक्षुर
यह पेशाब से जुड़ी दिक्कतों को ठीक करता है और किडनी को मजबूत बनाता है।
3. वरुण
वरुण पथरी और यूरिन इंफेक्शन में फायदा देता है।
4. चंद्रप्रभा वटी
यह एक आयुर्वेदिक दवा है जो किडनी और मूत्र रोगों में दी जाती है।
हाँ, अगर वक़्त पर इलाज न किया जाए तो धीरे-धीरे किडनी काम करना बंद कर सकती है।
अगर दूसरी किडनी स्वस्थ है तो ज्यादा परेशानी नहीं होती, लेकिन रेगुलर जांच जरूरी होती है।
कम नमक, कम प्रोटीन, ताजा फल-सब्जी और हल्का खाना खाना चाहिए।
हाँ, प्राणायाम और हल्का योग किडनी की कार्यक्षमता सुधारने में मदद करता है।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी छोटी होने का कारण और इलाज बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी छोटी होने की या Shrunken Kidney की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से छोटी किडनी या Shrunken Kidney का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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