किडनी हमारे शरीर का एक बहुत ख़ास अंग है, जो रक्त को साफ करने, गंदगी को बाहर निकालने और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं और कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में सही डाइट चार्ट किडनी रोगियों के लिए दवा जितना ही जरूरी होता है। इसलिए इस बात की पूरी जानकारी लें कि किडनी रोगी के लिए डाइट चार्ट कैसा होना चाहिए। आयुर्वेदिक दृष्टि से किडनी रोग वात और कफ दोष के असंतुलन से पैदा होता है, इसलिए डाइट ऐसी होनी चाहिए जो इन दोषों को संतुलित रखे और किडनी पर एक्स्ट्रा दबाव न डाले।
किडनी रोग में बॉडी से सही मात्रा में अपशिष्ट बाहर नहीं निकल पाता, जिससे क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड जैसे तत्व बढ़ने लगते हैं। गलत डाइट से स्थिति और बिगड़ सकती है। लेकिन, सही डाइट अपनाने से;
पूरे दिन में अलग-अलग समय पर डाइट में शामिल किये जाने वाले आइटम्स इस प्रकार हैं –
सुबह उठने के बाद
सबसे पहले डॉक्टर की सलाह अनुसार सही मात्रा में गुनगुना पानी पियें। चाहे तो 1 चम्मच धनिया पानी या जौ का पानी भी ले सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह से आयुर्वेदिक पुनर्नवा अर्क या गोक्षुर काढ़ा भी ले सकते हैं।
नाश्ता (8 से 9 बजे)
इस वक़्त उबला हुआ दलिया, ओट्स या सूजी का हल्का उपमा, सेब या पपीता (लिमिट में), नारियल पानी (डॉक्टर से पूछकर, अगर पोटैशियम नियंत्रित हो) ले सकते हैं। आयुर्वेद की दृष्टि में दलिया और सूजी सुपाच्य होते हैं और वात दोष को संतुलित करते हैं।
दोपहर का खाना (1 से 2 बजे)
लंच में बिना नमक या कम नमक की रोटी (गेहूं या ज्वार), लौकी, तोरई, परवल, घीया की सब्जी, उबला हुआ चावल (लिमिट में), मूंग दाल (डॉक्टर की सलाह लेकर), कच्चा सलाद (खीरा, गाजर लिमिट में) खा सकते हैं।
शाम का नाश्ता (5 से 6 बजे)
शाम को भुना हुआ मखाना, पोहा या साबूदाना खिचड़ी (कम नमक वाली) ले सकते हैं। साथ में हर्बल चाय (तुलसी, धनिया, सौंफ) भी पी सकते हैं।
डिनर (8 बजे तक)
रात में हल्की सब्जी, 1 या 2 रोटी, दलिया या खिचड़ी खा सकते हैं।
किडनी रोगी को पानी डॉक्टर की सलाह के हिसाब से ही पीना चाहिए। ज़्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है, खासकर जब पेशाब कम आता हो।
केला, संतरा, चीकू, आम, नारियल ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए क्योंकि इनमें पोटैशियम ज़्यादा होता है।
हल्की सब्ज़ी, 1 से 2 रोटी या खिचड़ी सबसे बेहतर रहती है।
बहुत कम मात्रा में सेंधा नमक लेना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा नमक से सूजन और बीपी बढ़ता है।
मैदा वाली ब्रेड से बचें, होल व्हीट ब्रेड लिमिट में ले सकते हैं।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी रोगी के लिए डाइट चार्ट बताया। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को कोई भी किडनी रोग है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से हर किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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