किडनी के खराब होने पर शरीर में कई तरह की समस्याएँ शुरू हो जाती हैं जिनमें से एक आम समस्या है – त्वचा में खुजली। कई patients बताते हैं कि उन्हें बिना किसी दाने या एलर्जी के भी बहुत ज़्यादा खुजली होती है। यह खुजली कभी हल्की होती है, तो कभी इतनी तेज कि रात को नींद भी नहीं आती। ऐसे में यह डीटेल में जानना चाहिए कि ‘किडनी रोग में खुजली क्यों होती है?’ ताकि ट्रीटमेंट में मदद मिल सके।
किडनी रोग में होने वाली खुजली के लक्षण इस प्रकार दिखाई दे सकते हैं –
आमतौर पर ईन कारणों से किडनी रोग में खुजली होती है –
जब किडनी कमजोर हो जाती है, तो वह खून को सही तरीके से साफ नहीं कर पाती। इससे खून में यूरिया, क्रिएटिनिन और दूसरे विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। इस कन्डिशन को मेडिकल भाषा में Uremia कहा जाता है।
जब ये गंदे तत्व शरीर में बढ़ जाते हैं, तो उनका असर स्किन पर भी दिखता है। यही कारण है कि किडनी रोगियों को पूरे शरीर में खुजली महसूस हो सकती है, खासकर पीठ, हाथ-पैर और छाती पर।
किडनी शरीर में मिनरल्स (जैसे कैल्शियम और फॉस्फोरस) का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो खून में फॉस्फोरस का लेवल बढ़ जाता है। ज्यादा फॉस्फोरस स्किन के नीचे जमा होकर खुजली पैदा कर सकता है। कई बार डॉक्टर किडनी मरीजों को low phosphorus diet लेने की सलाह देते हैं, ताकि खुजली कम हो सके।
किडनी रोग में त्वचा बहुत ज्यादा dry हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में नमी बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है। सूखी त्वचा में खिंचाव और जलन महसूस होती है, जिससे खुजली बढ़ जाती है। ठंड के मौसम में यह समस्या और ज़्यादा बढ़ जाती है।
जो रोगी Dialysis पर होते हैं, उनमें भी खुजली की शिकायत आम है। डायलिसिस बॉडी से गंदगी निकालता है, लेकिन कभी-कभी सभी toxins पूरी तरह नहीं निकल पाते। इसके अलावा, डायलिसिस के कारण स्किन और ज्यादा सूखी हो सकती है, जिससे itching बढ़ जाती है।
किडनी फेलियर के कारण बॉडी के nervous system और immune system में भी बदलाव आ सकते हैं। इससे त्वचा ज़्यादा sensitive हो जाती है और हल्की-सी उत्तेजना पर भी खुजली महसूस होती है। कई रिसर्च में पाया गया है कि किडनी रोग में बॉडी में सूजन बढ़ जाती है, जो itching को बढ़ावा देती है।
आयुर्वेद में किडनी से जुड़ी समस्याओं को मूत्रवह स्रोतस की विकृति माना जाता है। जब शरीर में दोष (ख़ासकर पित्त और कफ) imbalance हो जाते हैं, तो खून में अशुद्धियाँ बढ़ जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार खून की अशुद्धि होने पर त्वचा रोग और खुजली हो सकती है। पित्त दोष बढ़ने से त्वचा में जलन और खुजली बढ़ती है। कफ दोष के कारण त्वचा भारी और चिपचिपी महसूस हो सकती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर से मल और गंदगी बाहर नहीं निकलते। इससे दोषों का balance बिगड़ जाता है और स्किन पर खुजली जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
आयुर्वेद में बॉडी को अंदर से शुद्ध करने, खून को साफ रखने और दोषों को संतुलित करने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए खान-पान, lifestyle और कुछ जड़ी-बूटियों का सहारा लिया जाता है। हालांकि, किसी भी ट्रीटमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है।
हाँ, अक्सर पूरे शरीर में खुजली हो सकती है, खासकर पीठ, हाथ-पैर और छाती पर। कई बार बिना दाने के भी खुजली होती है।
हाँ, जब creatinine और अन्य waste products बढ़ जाते हैं, तो खून साफ नहीं हो पाता और इससे itching की समस्या हो सकती है।
अक्सर पीठ, पैरों, हाथों और सिर की त्वचा में ज्यादा महसूस होती है।
नहीं, यह आम एलर्जी से अलग होती है। इसमें आमतौर पर सूजन या एलर्जी जैसे चकत्ते नहीं होते।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको बताया कि ‘किडनी रोग में खुजली क्यों होती है?’ लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी रोग में खुजली की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी रोग और खुजली का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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