आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं जिसके बहुत से कारण हैं जैसे – खान-पान में लापरवाही, stress लेना, कम physical activity आदि। ऐसे में सही रूटीन और लाइफस्टाइल में सुधार बहुत ज़रूरी होता है किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए, जिसमें योग और प्राणायाम बहुत मदद कर सकते हैं। किडनी रोग में योग और प्राणायाम को अपने रूटीन में शामिल करने से किड़ने के उपचार में बड़ी मदद मिलती है अगर इन्हें डॉक्टर और योग एक्सपर्ट की सलाह के साथ किया जाए।
योग, शरीर और मन दोनों पर असर करता है। किडनी रोग में अक्सर शरीर में सूजन, थकान, anxiety और नींद की दिक्कत देखने को मिलती है। योग से blood circulation बेहतर होता है, stress कम होता है और बॉडी के अंदर organs को proper oxygen मिलती है। योग कोई instant इलाज नहीं है, लेकिन यह किडनी की healing process को support करता है और बीमारी को बढ़ने से रोक सकता है।
यह आसन पेट और कमर के लिए बहुत फायदा करता है। इससे abdominal organs activate होते हैं और blood flow बेहतर होता है। किडनी के आसपास की muscles gently stretch होती हैं, जिससे जकड़न कम हो सकती है। लेकिन, अगर back pain बहुत ज़्यादा हो तो डॉक्टर या yoga expert की सलाह ज़रूर लें।
यह आसन gas, कब्ज और digestion से जुड़ी समस्याओं में मदद करता है। किडनी रोग में digestion कमजोर हो जाता है, ऐसे में यह आसन बहुत फायदा करता है।
खाने के बाद किया जाने वाला यह आसन digestion सुधारने में help करता है। अच्छा digestion होने से toxins कम बनते हैं, जिससे किडनी पर extra load नहीं पड़ता।
यह सबसे easy लेकिन बहुत effective आसन है। यह body और mind को deep relaxation देता है, जिससे stress hormones कम होते हैं। Stress कम होगा तो blood pressure भी control में रहेगा, जो किडनी के लिए अच्छा है।
प्राणायाम का मतलब है सांस पर control करना। सही तरीके से सांस लेना बॉडी के हर cell तक oxygen पहुँचाता है। किडनी रोग में प्राणायाम करने से थकान कम होती है और मन शांत रहता है। नीचे दिए गए प्राणायाम किडनी रोग में बहुत help करते हैं –
यह सबसे safe और effective प्राणायाम है। यह nervous system को balance करता है और blood pressure को control कर सकता है। दिन में 5 से 10 मिनट तक अनुलोम-विलोम करना सही रहता है।
इस प्राणायाम में humming sound निकलती है, जो mind को calm करती है। Anxiety और depression किडनी रोगियों में आम है, ऐसे में यह बहुत helpful हो सकता है।
यह बहुत simple technique है। धीरे-धीरे गहरी सांस लें, कुछ सेकंड रोकें और फिर धीरे छोड़ें। यह शरीर में oxygen level बढ़ाने में मदद करता है। कपालभाति जैसे तेज़ प्राणायाम किडनी रोगियों को बिना सलाह के नहीं करने चाहिए।
किडनी रोग को आयुर्वेद में वात और कफ दोष की गड़बड़ी से जोड़ा जाता है। वात बिगड़ने से dryness, कमज़ोरी और डर बढ़ता है। कफ दोष बिगड़ने से सूजन, heaviness और पानी का जमाव होता है। योग और प्राणायाम इन दोनों दोषों को balance करने में मदद करते हैं। Slow और gentle योगासन वात को शांत करते हैं, जबकि रेगुलर प्राणायाम से कफ control में रहता हैं।
शुरु में 15 से 20 मिनट काफ़ी होते हैं। धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है।
सुबह खाली पेट योग करना सबसे बेहतर माना जाता है।
Meditation चिंता और डर को कम करता है, जो kidney patients में बहुत common होता है।
तेज़ twist वाले, भारी stretching और inverted poses बिना सलाह के नहीं करने चाहिए।
आज के इस ब्लॉग में हमनें आपको किडनी रोग में योग और प्राणायाम के बारे में जानकारी दी। लेकिन, आप सिर्फ़ इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर ना रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार को किडनी से जुड़ा कोई रोग है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से किडनी की हर बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार लें। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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