क्रिएटिनिन स्तर घटाने के देसी नुस्खे वे नेचुरल तरीके हैं जो किडनी के काम करने की capacity को बेहतर बनाकर बॉडी से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करते हैं। सही डाइट, हर्बल उपाय और लाइफस्टाइल बदलाव से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
यह शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट है जो मसल्स के मेटाबॉलिज्म से बनता है। इसे किडनी फिल्टर करती है और पेशाब के ज़रिए बाहर निकालती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो बॉडी में क्रिएटिनिन लेवल बढ़ने लगता है क्योंकि किडनी इसे बाहर नहीं निकाल पाती। अगर आपका क्रिएटिनिन लेवल ज़्यादा है, तो इसका मतलब है कि किडनी पर load है और उसे support की ज़रूरत है।
पानी किडनी को detox करने में मदद करता है। आमतौर पर रोज़ 7 से 8 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन, अगर आप एक किडनी के मरीज हैं तो डॉक्टर ने जो फ्लूड लिमिट दी है तो उसी के अनुसार पानी पिएं।
लौकी को किडनी के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। सुबह खाली पेट लौकी का जूस पीना किडनी को डिटॉक्स करता है और बॉडी में टॉक्सिन्स कम करता है।
धनिया किडनी को detox करने में मदद करता है। एक चम्मच धनिया उबालकर उसका पानी पिएं। इससे क्रिएटिनिन कम करने में हेल्प होती है।
तुलसी एक नेचुरल डिटॉक्स एजेंट है। इसलिए, रोज 4 से 5 तुलसी के पत्ते चबाएं। यह किडनी की फंक्शनिंग सुधारती है।
यह एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो किडनी की सेहत सुधारने के लिए जानी जाती है। यह यूरिन फ्लो बढ़ाती है और किडनी को स्ट्रॉंग बनाती है।
ज़्यादा नमक और प्रोटीन किडनी पर load डालते हैं। इसलिए, नमक लिमिट में लें और अगर आप किडनी रोगी हैं तो सेंधा नमक ही लें। साथ ही रेड मीट और हाई प्रोटीन फूड कम लें। ये किडनी पर प्रेशर डालते हैं।
हल्की एक्सरसाइज बॉडी को एक्टिव रखती है और ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है। इसलिए, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, हल्की वॉक आदि करें। लेकिन, ज़्यादा workout न करें वरना किडनी की हालत बिगड़ सकती है।
ईन चीज़ों से दूर रहें। ये किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं और क्रिएटिनिन बढ़ाती हैं।
| तरीका (Method) | फायदा (Benefits) | Avoid/Risk |
| पानी ज़्यादा पीना | किडनी क्लीन होती है | फ्लूड ओवरलोड (किडनी पेशेंट में) |
| लौकी जूस | डिटॉक्स और कूलिंग इफेक्ट | गलत तरीके से बना जूस नुकसान कर सकता है |
| धनिया पानी | यूरिन फ्लो बढ़ाता है | एलर्जी या लो BP में सावधानी |
| तुलसी | नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट | ज़्यादा सेवन से एसिडिटी |
| आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी | किडनी को सपोर्ट | बिना डॉक्टर सलाह नुकसान |
| लो प्रोटीन डाइट | किडनी पर कम दबाव | बहुत कम प्रोटीन से कमजोरी |
| योग/एक्सरसाइज | ब्लड सर्कुलेशन बेहतर | ज़्यादा मेहनत से थकान |
हां, तुलसी एंटीऑक्सीडेंट होती है और किडनी की सफाई में मदद करती है।
हां, आयुर्वेदिक इलाज किडनी को ठीक कर सकता है, अगर इलाज योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा दिया जाए।
हां, योग और प्राणायाम ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं और किडनी की सेहत को बेहतर बनाते हैं।
यह क्रिएटिनिन बढ़ने के कारण और इलाज पर निर्भर करता है, कई बार कुछ हफ्तों में भी क्रिएटिनिन कम हो जाता है।
हमारे क्लिनिकल अनुभव में कई मरीजों ने क्रिएटिनिन स्तर बढ़ने के सही कारण (जैसे किडनी पर दबाव, गलत डाइट या पानी की कमी) की पहचान होने के बाद डॉक्टर द्वारा दी गई आयुर्वेदिक दवा, सही डाइट, योग आदि अपनाकर क्रिएटिनिन लेवल कम किया है और किडनी फंक्शन में सुधार महसूस किया है। हालांकि, हर मरीज की कंडीशन, किडनी की स्थिति और बीमारी की गंभीरता अलग होती है, इसलिए किसी भी देसी नुस्खे, दवा या सपोर्टिव थेरेपी को शुरू करने से पहले Nephrologist या योग्य डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है और डॉक्टर पुनीत धवन (आयुर्वेदिक एक्सपर्ट) द्वारा प्रमाणित दिशानिर्देशों पर आधारित है।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आज के इस ब्लॉग में हमने आपको बताया क्रिएटिनिन स्तर घटाने के देसी नुस्खे बताए। लेकिन, आप केवल इस जानकारी या सुझावों पर निर्भर न रहें। अगर आप या आपके किसी साथी/रिश्तेदार का क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ है या ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल में भारत के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर से क्रिएटिनिन स्तर बढ़ने की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार लें। यहाँ आपको उपचार के साथ-साथ रोगी विशेष डाइट चार्ट प्लान भी मिलेगा। हेल्थ से जुड़े ऐसे और भी ब्लॉग्स और आर्टिकल्स के लिए जुड़े रहें कर्मा आयुर्वेदा के साथ।
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